हरिद्वार में गंगा सभा का सख्त रुख! पवित्र स्थल हर की पैड़ी में ड्रोन उड़ाने पर प्रतिबंध, फिल्मी गानों पर रील/वीडियो बनाने पर रोक ! उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी! Non-Hindus Prohibited के लगाए पोस्टर!
हर की पैड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर विवाद, ‘नॉन-हिंदूज प्रोहिबिटेड’ के पोस्टर लगाए
उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हर की पैड़ी में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर विवाद तेज होता जा रहा है। घाटों की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालने वाली श्री गंगा सभा ने अब इस मुद्दे पर खुलकर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। सभा की ओर से हर की पैड़ी क्षेत्र में “नॉन-हिंदूज प्रोहिबिटेड” लिखे पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक का संदेश दिया गया है। गंगा सभा का कहना है कि हर की पैड़ी सनातन आस्था का प्रमुख केंद्र है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं और परंपराओं की पवित्रता बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से सभा ने क्षेत्र में कई सख्त नियम लागू किए हैं।
ड्रोन और फिल्मी रील्स पर पूर्ण प्रतिबंध, नियम उल्लंघन पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी
गंगा सभा ने घोषणा की है कि हर की पैड़ी और मालवीय द्वीप क्षेत्र में ड्रोन उड़ाने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। इसके साथ ही, फिल्मी गानों पर वीडियो या रील बनाना भी पूरी तरह निषिद्ध कर दिया गया है। सभा का मानना है कि इस तरह की गतिविधियों से तीर्थस्थल की गरिमा और आध्यात्मिक माहौल प्रभावित होता है। श्री गंगा सभा ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति प्रतिबंधों के बावजूद वीडियो, रील या अन्य सामग्री बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने का प्रयास करता है, तो उसके विरुद्ध भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
प्रशासन और स्थानीय स्तर पर बहस
इस फैसले के बाद स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है। जहां एक ओर कुछ लोग इसे धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ वर्ग इसे भेदभाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, गंगा सभा अपने निर्णय पर अडिग है और नियमों के सख्ती से पालन पर जोर दे रही है। हर की पैड़ी में लगाए गए नए नियमों के चलते आने वाले दिनों में प्रशासन, गंगा सभा और आम लोगों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा और तेज होने की संभावना है।
गंगा तट का सबसे पवित्र स्थल, जहां आस्था के साथ समय-समय पर उठते रहे हैं परंपरा और नियमों से जुड़े सवाल
उत्तराखंड के हरिद्वार में स्थित हर की पैड़ी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में सनातन आस्था का एक अत्यंत पवित्र और प्रतिष्ठित तीर्थ स्थल माना जाता है। गंगा नदी के तट पर स्थित यह स्थान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि इसी स्थान से मां गंगा पहाड़ों से मैदानों में उतरी थीं और यहीं भगवान विष्णु के चरणचिह्न आज भी विद्यमान हैं। ‘हर की पैड़ी’ का अर्थ है भगवान हरि (विष्णु) के चरण। धार्मिक ग्रंथों और पुराणों के अनुसार, यह स्थल समुद्र मंथन से जुड़े अमृत कुंभ से भी संबंधित माना जाता है। हर 12 वर्ष में होने वाला कुंभ मेला और 6 वर्ष में अर्धकुंभ यहीं प्रमुख रूप से आयोजित होता है। प्रतिदिन होने वाली गंगा आरती हर की पैड़ी की पहचान है, जिसे देखने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां गंगा में स्नान करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी और परंपराएं
हर की पैड़ी सहित आसपास के प्रमुख घाटों की व्यवस्थाओं का संचालन श्री गंगा सभा द्वारा किया जाता है। यह संस्था दशकों से यहां की धार्मिक परंपराओं, पूजा-अर्चना और नियमों को संरक्षित करती आ रही है। सभा का दावा है कि घाटों की पवित्रता बनाए रखना उसकी धार्मिक जिम्मेदारी है।
पहले भी विवादों में रहा है हर की पैड़ी
हर की पैड़ी अपने धार्मिक महत्व के साथ-साथ विवादों के कारण भी समय-समय पर चर्चा में रही है-
1. रील और वीडियो विवाद– पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया पर फिल्मी गानों पर रील बनाने, अशोभनीय वीडियो शूट करने और स्टंट करने के मामले सामने आए। इसे लेकर संत समाज और गंगा सभा ने कड़ा विरोध जताया।
2. ड्रेस कोड और आचरण को लेकर बहस– घाटों पर अनुचित कपड़ों में फोटोशूट और वीडियो बनाने को लेकर भी विवाद हुआ। धार्मिक संगठनों ने इसे तीर्थ की मर्यादा के खिलाफ बताया।
3. वीआईपी प्रोटोकॉल पर आपत्ति– कुंभ और बड़े स्नान पर्वों के दौरान वीआईपी मूवमेंट और आम श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा पर भी सवाल उठते रहे हैं।
4. गैर-हिंदुओं के प्रवेश को लेकर बहस– समय-समय पर यह मुद्दा उठता रहा है कि हर की पैड़ी जैसे पवित्र स्थल पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश किस हद तक उचित है। हालांकि अब इस मुद्दे ने खुले विवाद का रूप ले लिया है।
5. व्यावसायीकरण का आरोप– घाटों के आसपास बढ़ती दुकानों, प्रचार और पर्यटन गतिविधियों को लेकर भी संत समाज ने आपत्ति जताई है।
आस्था बनाम आधुनिकता की टकराहट
हर की पैड़ी से जुड़े अधिकांश विवाद परंपरा और आधुनिक जीवनशैली के टकराव से पैदा हुए हैं। एक ओर श्रद्धालु इसे मोक्ष का द्वार मानते हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसे पर्यटन स्थल की तरह देखने लगे हैं। यही टकराव बार-बार नए नियमों और विरोध का कारण बनता है। हर की पैड़ी केवल एक घाट नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और आस्था का जीवंत प्रतीक है। इससे जुड़े विवाद यह दर्शाते हैं कि बदलते समय में धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। आने वाले समय में प्रशासन, गंगा सभा और समाज के बीच संतुलन बनाना ही इस ऐतिहासिक तीर्थ की गरिमा को सुरक्षित रख सकता है।
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