app-store-logo
play-store-logo
March 15, 2026

चाबहार परियोजना पर कांग्रेस का हमला: मोदी सरकार पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चाबहार पोर्ट परियोजना पर मोदी सरकार को घेरते हुए कहा कि यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कार्यकाल में शुरू हुई थी, लेकिन अब इसके लिए बजट आवंटन नहीं है। रमेश ने इस परियोजना के भविष्य के साथ ही भारत की मध्य एशिया कूटनीति पर भी चिंता व्यक्त की। चाबहार पोर्ट भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य अफगानिस्तान और मध्य एशिया के देशों के साथ सही और विश्वसनीय व्यापार रूट प्रदान करना है।

मोदी सरकार की सेमि-रेपोर्टिंग: मनमोहन सिंह की पहल को किया रीपैकेज

रमेश ने बताया कि चाबहार परियोजना की शुरुआत 1990 के दशक के अंत में हुई थी। उन्होंने कहा कि मई 2013 में केंद्र सरकार ने चाबहार बंदरगाह में निवेश के लिए 115 मिलियन डॉलर की मंजूरी दी थी। इस समय भारत अमेरिका के साथ नागरिक परमाणु समझौते के कार्यान्वयन की दिशा में भी सक्रिय था। फिर भी, अक्टूबर 2014 में मोदी सरकार ने इस पहल को नए रूप में पेश किया, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या भारत अब इस परियोजना से बाहर हो चुका है।

क्या चाबिहार अब परिदृश्य से गायब है?

जयराम रमेश ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि वर्ष 2026-27 के बजट में चाबहार परियोजना के लिए कोई आवंटन नहीं किया गया है। इससे यह स्पष्ट होता है कि भारत सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना को नजरअंदाज किया है। उन्होंने यह भी कहा कि चाबहार स्नैपड्राब में पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से लगभग 170 किलोमीटर पश्चिम स्थित है, जिसे चीन ने विकसित किया है। यह स्थिति भारत की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक बड़ा झटका हो सकती है।

चाबहार की महत्ता: भारत का एकमात्र समुद्री संपर्क

चाबहार पोर्ट भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री परियोजनाओं में से एक है। यह ईरान के माध्यम से अरब सागर तक भारत का एकमात्र डायरेक्ट एक्सेस पॉइंट है। इसके जरिए भारत अफगानिस्तान और मध्य एशिया, खासकर उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान के लिए एक सुरक्षित व्यापार मार्ग स्थापित कर सकता है। ऐसे में यदि इस परियोजना को कम महत्व दिया जाता है, तो यह भारत की आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।

कांग्रेस की आलोचना: क्या मोदी सरकार पूरी तरह नाकाम रही?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने चाबहार परियोजना को पहले अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश की, लेकिन अब इसके लिए कोई ठोस बजट आवंटन नहीं दर्शाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शासन में निरंतरता एक बुनियादी सच्चाई है, जिसे वर्तमान प्रधानमंत्री स्वीकार नहीं करते हैं। इस तरह की स्थिति से यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या भारत इस प्रोजेक्ट से बाहर हो चुका है, या उसके निवेश संबंधी दायित्व पूरे हो गए हैं।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos