CEC ज्ञानेश कुमार की Z+ सुरक्षा और कड़ी, दफ्तर से घर तक कड़ा पहरा

The CSR Journal Magazine

ज्ञानेश कुमार को मिली Z-प्लस सुरक्षा, 50 जवान तैनात, सुरक्षा का बढ़ा इंतजाम, विरोध प्रदर्शनों का असर

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के बाद केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने उनकी Z-प्लस (Z+) सुरक्षा को और अधिक मजबूत व अभेद्य बना दिया है। मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR – Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर पूरे देश में जारी भारी विरोध प्रदर्शनों और हाल ही में मिले ताजा खुफिया इनपुट (Threat Input) को देखते हुए गृह मंत्रालय (MHA) के निर्देश पर यह कदम उठाया गया है। इस नए सुरक्षा अपग्रेडेशन के बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त के सुरक्षा घेरे में 24 घंटे एक शिफ्ट में 50 से अधिक अत्याधुनिक हथियारों से लैस जवान मुस्तैद रहेंगे। यह सुरक्षा घेरा प्रधानमंत्री की सुरक्षा करने वाली एसपीजी (SPG) के बाद देश की सबसे बड़ी और दूसरी सबसे सुरक्षित श्रेणी मानी जाती है।

सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह: SIR विवाद और विपक्ष का भारी विरोध प्रदर्शन

सुरक्षा व्यवस्था को अचानक कड़ा करने के पीछे का मुख्य कारण विपक्षी दलों (INDIA गठबंधन) द्वारा देशव्यापी स्तर पर किया जा रहा कड़ा विरोध है।
1. वोट चोरी और अनियमितताओं के आरोप: लोक सभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत ‘इंडिया’ गठबंधन के तमाम वरिष्ठ नेताओं ने चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की जा रही है और जानबूझकर लाखों मतदाताओं के नाम सूची से हटाए या बदले जा रहे हैं, जिसे विपक्ष ने खुले तौर पर “वोटों की चोरी” करार दिया है।
2. इस्तीफे की मांग पर अड़ा विपक्ष: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली, मुंबई और देश के अन्य बड़े महानगरों में बड़े पैमाने पर रैलियां और आंदोलन किए जा रहे हैं। मुंबई में उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे के नेतृत्व में हजारों लोगों ने सड़कों पर मार्च निकाला था।
3. घर और दफ्तर के घेराव की कोशिश: हाल ही में कुछ प्रदर्शनकारियों ने नई दिल्ली स्थित ज्ञानेश कुमार के आधिकारिक आवास और आगरा स्थित उनके पैतृक घर के बेहद करीब पहुंचकर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद खुफिया एजेंसियों ने उनके जीवन पर संभावित खतरे की आशंका जाहिर की थी।

1. नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास (New Moti Bagh)

ज्ञानेश कुमार के दिल्ली स्थित नई मोती बाग कॉलोनी वाले आवास पर सुरक्षाकर्मियों की संख्या काफी बढ़ा दी गई है। दिल्ली पुलिस के अतिरिक्त जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बलों के जवानों को तैनात किया गया है। कॉलोनी के बाहर 24 घंटे पैरामिलिट्री स्टाफ से भरी बसें और पीसीआर वैन खड़ी रहती हैं। कॉलोनी में आने वाले हर नए आगंतुक की गहन पहचान जांच की जा रही है और सुरक्षा कमांडो लगातार क्षेत्र में गश्त कर रहे हैं।

2. निर्वाचन सदन (ECI मुख्यालय, अशोक रोड)

केंद्रीय चुनाव आयोग के मुख्यालय ‘निर्वाचन सदन’ की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को किले में तब्दील कर दिया गया है। अब तक इस परिसर की सुरक्षा का जिम्मा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के पास था। लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए परिसर के भीतर सीआईएसएफ जवानों की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है, जबकि परिसर के ठीक बाहर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और दिल्ली पुलिस की अतिरिक्त टुकड़ियों को चौबीसों घंटे तैनात कर दिया गया है।

3. आगरा स्थित पैतृक आवास और काफिले की सुरक्षा

दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के आगरा में स्थित उनके पैतृक घर पर भी स्थानीय पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है। ज्ञानेश कुमार जब भी यात्रा करेंगे, उनके आधिकारिक काफिले (Cavalcade) में बुलेटप्रूफ गाड़ियों की संख्या बढ़ाई गई है और जैमर व एस्कॉर्ट वाहनों की तैनाती को अनिवार्य कर दिया गया है। सुरक्षा कारणों के चलते उनका दो दिवसीय छत्तीसगढ़ दौरा भी स्थगित कर दिया गया है।

दिल्ली में सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम: 23,000 अतिरिक्त जवान तैनात

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ राजधानी में विपक्ष के बड़े आंदोलनों की चेतावनी को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने दिल्ली में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अब तक का सबसे बड़ा सुरक्षा अमला उतारा है।
• केंद्रीय बलों की 221 कंपनियां उपलब्ध: गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस की मदद के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की 221 कंपनियां (लगभग 23,000 जवान) दिल्ली को सौंपी हैं।
• बाहरी राज्यों से बुलाई गई फोर्स: प्रदर्शनों की गंभीरता को देखते हुए सीआरपीएफ और अन्य बलों की कंपनियों को विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों से एयरलिफ्ट या ट्रेनों के माध्यम से दिल्ली लाया गया है। ये जवान 8 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक दिल्ली के वीवीआईपी इलाकों, संसद मार्ग, इंडिया गेट और लुटियंस दिल्ली की सुरक्षा का जिम्मा संभालेंगे।

जारी रहेगी Z+ सुरक्षा

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि जब तक चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध शांत नहीं हो जाता और खुफिया एजेंसियों की ओर से थ्रेट परसेप्शन (खतरे का स्तर) कम नहीं किया जाता, तब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का यह कड़ा सुरक्षा कवच इसी प्रकार जारी रहेगा।

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