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विश्व कैंसर दिवस विशेष – मौत देता कैंसर, सीएसआर देती जिंदगी  

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कैंसर नाम आते ही एक अच्छे खासे व्यक्ति की रूह कांप जाती है, इन बीमारी के नाम मात्र से ही इंसान टूट जाता है, सिर्फ अकेला कैंसर पीड़ित ही नही बल्कि पूरा परिवार पीड़ित के साथ दुख और तकलीफें सहता है, ऐसे ही परिवारों और मरीजों को नई जिंदगी देता है टाटा मेमोरियल अस्पताल। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मौजूद है टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल, देश के कोने कोने से कैंसर पेशेंट्स टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में अपना इलाज कराने के लिए आते हैं, यहां नई जिंदगी पाने के लिए आते हैं।
आंकड़ों की माने तो हर साल भारत देश में 12 लाख लोग कैंसर से ग्रस्त होते हैं, जिनमें 8 लाख लोगों की इस भयावह बीमारी से मौत हो जाती है। हर साल अकेले टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल में 80 हज़ार नए पेशेंट आते हैं। कैंसर के बढ़ते प्रकोप से बचाने के लिए ही वैश्विक स्तर पर कैंसर के रोकथाम और जनजागरण के लिए विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है और आज इसी ख़ास मौके पर यानि विश्व कैंसर दिवस पर The CSR Journal आपको बता रहा है कि किस तरह से अस्पतालों में सीएसआर की मदद से हज़ारों जिंदगियां मौत के मुँह से वापस आ रही है। साथ ही ये भी बता रहा है कि क्या है सरकार की कैंसर से लड़ने की निति, किस तरह से सीएसआर की वजह से मरीजों को हो रहा है फायदा, किस तरह से सीएसआर की वजह से बढ़ रहे है देश के कोने कोने में कैंसर अस्पताल और उन अस्पतालों में सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर।

सीएसआर से मिल रही है नई जिंदगी

दरअसल पूरे देश में कई कैंसर के अस्पताल है लेकिन टाटा मेमोरियल सेंटर ऐसा अस्पताल है जहाँ गरीब से गरीब मरीज का भी इलाज संभव है, टाटा मेमोरियल अस्पताल होमी भाभा नेशनल इंस्टिट्यूट, डिपार्टमेंट ऑफ़ एटॉमिक एनर्जी, भारत सरकार से एफिलिएटेड एक सरकार अस्पताल है, जो पिछले 80 सालों से देश के कोने कोने से आये मरीजों को कैंसर जैसे घातक रोगों बचा रहा है। और इस नेक कड़ी में सबसे बड़ा योगदान सीएसआर का है। सीएसआर की मदद से देश की कॉर्पोरेट कंपनियां बड़े पैमाने पर कैंसर जैसी घातक बिमारियों पर अपना सीएसआर फंड खर्च कर रही है और बड़े स्तर पर टाटा मेमोरियल अस्पताल में सीएसआर की एक्टिविटीज कर रही है।
टाटा मेमोरियल सेंटर के एडमिनिस्ट्रेशन (प्रोजेक्ट्स) के डायरेक्टर संजीव सूद The CSR Journal से बात करते हुए बताया कि कैंसर से लड़ने के लिए देश की बड़ी सरकारी कंपनियों ने सीएसआर के तहत टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल और सेंटर को दान दिया है, पीएसयू की सीएसआर एक्टिविटीज की वजह से ही अस्पताल में बड़े पैमाने पर सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर पर काम हो रहा है, सीएसआर की मदद से ही अत्याधुनिक इक्विपमेंट और मशीनें अस्पताल में आ रही है, इन सुविधाओं का सीधा फायदा मरीज ही उठाता है।

जाने, कैंसर को लेकर इन कंपनियों ने क्या किया

सीएसआर के तहत न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने टाटा हॉस्पिटल को मरीजों के ब्रेन सर्जरी के लिए एक स्पेशल मशीन दिया है, इस मशीन की कीमत 4 करोड़ है, विशेष इस मशीन के आने से ब्रेन कैंसर रोगियों के लिए एक वरदान साबित हुआ है, ये मशीन जीपीएस और कैमरे से लैस है, ये मशीन डॉक्टर्स को ट्यूमर की सटीक जानकारी देता है और उतना ही ऑपरेशन कर ट्यूमर को निकाला जा सकता है, इससे ज्यादा बड़ा ऑपरेशन नहीं करना पड़ता है, ब्लड लॉस नहीं होता और मरीज की रिकवरी तेजी से होती है।
भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने सीएसआर के तहत लीनियर एक्सेलेटर मशीन टाटा मेमोरियल अस्पताल को दान दी है, लीनियर एक्सेलेटर मशीन 7 करोड़ रुपये की है, ये मशीन कैंसर मरीजों को रेडिएशन देने के काम आती है, कैंसर के ट्रीटमेंट के तीन प्रकार होते है, एक सर्जरी, दूसरा कीमो थेरेपी और तीसरा रेडिएशन, लीनियर एक्सेलेटर मशीन ने रेडिएशन देकर ट्यूमर को खत्म किया जाता है।
सीएसआर के तहत न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी ने 2.5 करोड़ रुपये सैंशन किये है, इस रकम से टाटा मेमोरियल अस्पताल में एक ऐसी अत्याधुनिक मशीन आएगी जिससे ऑर्थोपैडिक कैंसर का इलाज और भी सही तरीके से संभव हो पायेगा, इन मशीन से 3 डी के जरिये सटीक मैपिंग की जाएगी और फिर ट्यूमर को ऑपरेट किया जायेगा, अमूमन ऑर्थोपैडिक कैंसर सर्जरी में अंदर की चीजें नहीं देख पाते है डॉक्टर्स लेकिन इस अत्याधुनिक मशीन से 3 डी मैपिंग के जरिये सटीक ऑपरेशन संभव हो पायेगा।
गेल इंडिया ने सीएसआर के तहत टाटा हॉस्पिटल को 5 करोड़ रुपये सैंशन किये है, इस रकम से एक ऐसी अत्याधुनिक मशीन लगायी जाएगी जिससे हाई कम्प्यूटिंग संभव हो पायेगा, उदहारण के तौर पर देश के नार्थ ईस्ट में गॉल ब्लैडर के कैंसर अधिक मात्रा में पाए जाते है, इस मशीन से गॉल ब्लैडर के कैंसर से रिलेटेड रिसर्च में मदद मिलेगी। अब तक के इस तरह के मामलों में गॉल ब्लैडर की ट्यूमर की जाँच लंदन की मदद से होता रहा। लेकिन अब जिओमिक स्टडी और इसके इलाज के लिए ये मशीन मदद करेगी।
सीएसआर के तहत इंफोसिस कंपनी नवी मुंबई के एडवांस सेंटर फॉर ट्रीटमेंट, रिसर्च एंड एजुकेशन इन कैंसर सेंटर पर 100 करोड़ की लागत से एक धर्मशाला बनवा रही है, जहाँ देश के कोने कोने से आये कैंसर के मरीजों की रुकने की व्यवस्था होगी।
अभी की हालात पर नज़र डालें तो मुंबई के टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के बाहर अगर हम नजर डालें तो रास्ते पर मरीजों का तांता लगा रहता है। देश के दूरदराज इलाकों से आए मरीज यहां टाटा अस्पताल में इलाज कराने आते हैं। रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं होता लिहाजा फुटपाथ ही उनका आशियाना बन जाता है। देश के कैंसर मरीजों की 60 फीसदी इलाज यहाँ मुफ्त होता है लिहाजा यहाँ इतनी भीड़ और डॉक्टरों पर इतना वर्क लोड हो जाता है जिसको देखते हुए अब भारत सरकार टाटा मेमोरियल सेंटर का इजाफा कर रही है।

देश के इन शहरों में बन रहा है टाटा कैंसर अस्पताल

टाटा मेमोरियल हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ सी एस प्रमेश ने The CSR Journal से बात करते हुए बताया कि टाटा अस्पताल का मुंबई में विस्तार हो रहा है, टाटा हॉस्पिटल के बगल में ही हैफकिंस इंस्टिट्यूट में 5 एकड़ की जमीन महाराष्ट्र सरकार ने दी है जिससे और भी सुविधाएं ऐड की जा सकेंगी। साथ ही देश के सभी रीजनों में ईस्ट, वेस्ट, नॉथ और साउथ में भी टाटा के कैंसर के अस्पताल बनाये जा रहे है ताकि मरीजों की भीड़ को कम किया जा सके। विशाखापट्टनम, गुवाहाटी, मुल्लांपुर चंडीगढ़, संगरूर में जल्द ही अत्याधुनिक टाटा कैंसर अस्पताल की शुरवात होगी। बनारस में हालही में पीएम नरेंद्र मोदी ने कैंसर सेंटर की शुरवात की।
जहां एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिट रहे इंडिया कार्यक्रम को लेकर बड़े पैमाने पर जन जागरूकता फैला रहे हैं, बड़े पैमाने पर फिट रहे इंडिया को लेकर निवेश किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कैंसर से हमारी जो पीढ़ी है वह मौत के मुंह में जा रही है। भारत में पुरुषों में सबसे ज्यादा कैंसर मुंह का होता है और महिलाओं में स्तन कैंसर के सबसे ज्यादा मामले पाए जा रहे है।

ये करने से 40 फीसदी कैंसर के प्रमाण कम हो जायेंगे

डॉक्टर गौरवी मिश्रा, टाटा मेमोरियल सेंटर के प्रिवेंटिव ऑंकोलॉजी विभाग की प्रमुख है जो बताती है कि दिन की शुरुआत मरीजों की सेवा में शुरू होती है और दिन मरीजों को देखते देखते कब खत्म हो जाता पता ही नहीं चलता। टाटा अस्पताल में मंजर ऐसा रहता है कि हर तरफ बीमार लोग ही नजर आते हैं। किसी के मुंह में गांठ तो किसी के पेट में गांठ, किसी को फेफड़े का कैंसर है, तो किसी को स्किन, तो किसी को ब्लड। लेकिन सबसे ज्यादा जो पेशेंट होते हैं वह मुंह के कैंसर से ग्रसित होते हैं। और इसका सबसे बड़ा कारण होता है तंबाकू और गुटखा। डॉक्टर गौरवी बताती है कि भारत में 40 फ़ीसदी कैंसर तंबाकू और तंबाकू के उत्पादों के खाने के बाद होता है अगर हम गुटका तंबाकू पान सिगरेट जैसे घातक व्यसन को ना करें तो हमारे देश में कैंसर की 40 फ़ीसदी प्रमाण कम हो जाएंगे।
बहरहाल सीएसआर एक ऐसा माध्यम बनता जा रहा है जिससे ना सिर्फ लोगों की जिंदगियों में बदलाव आ रहा है बल्कि कैंसर जैसे घातक बीमारी को भी सीएसआर मात दे रहा है।