Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) ने आगामी मानसून से पहले बाढ़ प्रभावित मानी जाने वाली Mithi River की सफाई (डिसिल्टिंग) के दायरे में बड़ी कटौती करने का प्रस्ताव रखा है। इस बार नदी से निकाले जाने वाले गाद (सिल्ट) की मात्रा में लगभग 40 प्रतिशत की कमी की गई है, जिससे परियोजना की कुल लागत भी काफी घट जाएगी। बीएमसी के अनुसार, पिछले वर्ष के अनुभव और तकनीकी आकलन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। नगर निगम का दावा है कि कम मात्रा में गाद निकालने के बावजूद शहर को बड़े पैमाने पर बाढ़ से सुरक्षित रखा जा सकता है।
कितना घटाया गया काम?
बीएमसी ने पिछले सप्ताहांत 1.65 लाख टन गाद निकालने के लिए नया टेंडर जारी किया है। पिछले वर्ष यह मात्रा 2.67 लाख टन थी। यानी इस बार करीब 1 लाख टन कम गाद निकालने का प्रस्ताव है।इसके साथ ही ठेके की लागत भी लगभग आधी कर दी गई है। पिछले वर्ष यह कार्य लगभग 48 करोड़ रुपये में हुआ था, जबकि इस बार नई निविदा 29.5 करोड़ रुपये में जारी की गई है।
जांच के बाद लिया गया फैसला
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मिठी नदी की सफाई से जुड़े ठेकेदारों और कुछ बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ जांच की गई थी। जांच में कार्य आदेशों (वर्क ऑर्डर) में कथित तौर पर अधिक मात्रा दिखाकर भुगतान बढ़ाने के आरोपों की पड़ताल की गई थी। हालांकि, बीएमसी की आधिकारिक सफाई में कार्य आदेशों के अधिक आकलन (ओवरएस्टिमेशन) का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है। निगम का कहना है कि पिछले मानसून के अनुभव से यह स्पष्ट हुआ कि अपेक्षाकृत कम डिसिल्टिंग कार्य के बावजूद बड़े स्तर की बाढ़ की स्थिति नहीं बनी।
मानसून से पहले तैयारी
मिठी नदी मुंबई के कई हिस्सों से होकर गुजरती है और तेज बारिश के दौरान यह नदी उफान पर आ जाती है। अंधेरी, कुर्ला, साकीनाका और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स जैसे इलाकों में जलभराव की समस्या अक्सर देखी जाती है। बीएमसी अधिकारियों का कहना है कि इस बार वैज्ञानिक आकलन, जल प्रवाह के अध्ययन और पिछले वर्ष की रिपोर्ट के आधार पर वास्तविक जरूरत के अनुसार गाद निकासी तय की गई है। उनका दावा है कि इससे न केवल लागत में बचत होगी, बल्कि कार्य में पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
विपक्ष के सवाल
नगर निगम के इस निर्णय पर विपक्षी दलों और कुछ सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि गाद निकासी की मात्रा कम की गई और मानसून के दौरान भारी बारिश हुई, तो जलभराव की समस्या फिर गंभीर रूप ले सकती है। कुछ पार्षदों ने यह भी मांग की है कि नदी की सफाई प्रक्रिया की निगरानी के लिए स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिट कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की आशंका न रहे।
गंदगी के चलते कड़वी हुई मीठी नदी
Mithi River मुंबई की एक महत्वपूर्ण नदी है, जो शहर के बीचों-बीच बहती है और मानसून के समय बारिश के पानी को समुद्र तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका निभाती है। इसका पानी Vihar Lake और Powai Lake से निकलकर लगभग 17–18 किलोमीटर का सफर तय करता है और अंत में Mahim Creek के रास्ते अरब सागर में मिल जाता है। पहले यह एक साफ और प्राकृतिक नदी थी, लेकिन समय के साथ-साथ बढ़ती आबादी, अतिक्रमण, कचरा और गंदे पानी के कारण यह काफी प्रदूषित हो गई है। वर्ष 2005 की भीषण बारिश में जब मुंबई में भारी बाढ़ आई थी, तब मिठी नदी के उफान ने शहर में जलभराव की समस्या को और गंभीर बना दिया था। इसके बाद से नगर निगम नियमित रूप से इसकी सफाई और गाद निकालने का काम करता है, ताकि बारिश के मौसम में पानी का बहाव सुचारु रहे और शहर को बाढ़ से बचाया जा सके। इस तरह मिठी नदी मुंबई के पर्यावरण और बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था का एक अहम हिस्सा है।
मानसून से पहले सफ़ाई की उम्मीद
बीएमसी का कहना है कि कार्य समय पर पूरा कर लिया जाएगा ताकि मानसून से पहले नदी की जलधारण क्षमता बेहतर हो सके। साथ ही, ड्रेनेज सिस्टम की सफाई और पंपिंग स्टेशनों की मरम्मत का कार्य भी समानांतर रूप से किया जा रहा है। अब यह देखना अहम होगा कि कम लागत और घटे हुए कार्य दायरे के बावजूद क्या इस वर्ष मुंबई को मानसूनी बाढ़ से पूरी तरह राहत मिल पाएगी या नहीं।
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