देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक ओर जहां सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ती नशाखोरी को रोकने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाल ही में मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर हुए गैस टैंकर हादसे के बाद राज्य सरकार आपात स्थिति में क्षतिग्रस्त टैंकरों को एयरलिफ्ट करने जैसे असाधारण उपायों पर भी विचार कर रही है। दोनों ही मुद्दे शनिवार को चर्चा का केंद्र बने रहे।
पार्कों और खुले मैदानों में नशे के खिलाफ संयुक्त अभियान
मुंबई में बढ़ती नशे की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए Brihanmumbai Municipal Corporation (बीएमसी) और Mumbai Police ने संयुक्त अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई विशेष रूप से शहर के पार्कों, उद्यानों, समुद्र तटों और खुले सार्वजनिक स्थलों पर केंद्रित होगी, जहां युवाओं द्वारा नशीले पदार्थों के सेवन की शिकायतें मिल रही थीं। सूत्रों के अनुसार, बीएमसी के गार्डन विभाग और स्थानीय पुलिस थानों की टीम संयुक्त रूप से सुबह और देर शाम औचक निरीक्षण करेगी। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया जाएगा। जहां जरूरत होगी, वहां सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाएगी और अंधेरे कोनों में अतिरिक्त प्रकाश व्यवस्था की जाएगी।
नशाखोर और सप्लायर्स नेटवर्क के ख़िलाफ़ मुहिम
अधिकारियों का कहना है कि कई पार्कों में शाम के समय संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। स्थानीय नागरिकों और आवासीय सोसाइटियों ने भी शिकायत की थी कि कुछ स्थान नशा करने वालों का अड्डा बनते जा रहे हैं। इसी को देखते हुए यह संयुक्त ड्राइव शुरू की जा रही है। अभियान के तहत न केवल नशा करने वालों पर कार्रवाई होगी, बल्कि नशीले पदार्थों की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क को भी चिन्हित कर सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे। पुलिस ने साफ किया है कि बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुंबई- पुणे एक्सप्रेसवे हादसे के बाद बड़ा विचार
इसी बीच, हाल ही में Mumbai-Pune Expressway पर हुए गैस टैंकर हादसे ने राज्य सरकार को नई रणनीति पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। दुर्घटना के कारण एक्सप्रेसवे पर लगभग 36 घंटे तक यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। हजारों वाहन जाम में फंसे रहे और यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई
मामले को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में जानकारी देते हुए सरकार ने कहा कि भविष्य में ऐसी आपात स्थितियों से निपटने के लिए क्षतिग्रस्त टैंकरों को एयरलिफ्ट करने की व्यवहार्यता का अध्ययन किया जा रहा है। यदि किसी दुर्घटना के कारण मार्ग लंबे समय तक बाधित होता है और पारंपरिक तरीके से हटाना संभव नहीं होता, तो वायुसेना या निजी हेलीकॉप्टर सेवाओं की मदद से टैंकर हटाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। हालांकि, अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम केवल “अत्यंत आपातकालीन परिस्थितियों” में ही उठाया जाएगा, क्योंकि इसमें तकनीकी, सुरक्षा और लागत से जुड़े कई पहलुओं का मूल्यांकन आवश्यक है। गैस या ज्वलनशील पदार्थ ले जा रहे टैंकरों को हवा में उठाने से पहले सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
यातायात प्रबंधन में सुधार की जरूरत
सरकार ने स्वीकार किया कि 36 घंटे तक चले जाम ने यातायात प्रबंधन की कमियों को उजागर किया है। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए वैकल्पिक मार्गों की जानकारी समय रहते देने, रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट जारी करने और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर भी जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त मार्गों पर दुर्घटना की स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए विशेष आपदा प्रबंधन दल और भारी क्रेन जैसी उन्नत मशीनरी पहले से तैनात रहनी चाहिए। एयरलिफ्टिंग जैसे उपाय अंतिम विकल्प हो सकते हैं, लेकिन इसके लिए विस्तृत योजना और प्रशिक्षण की आवश्यकता होगी।
नागरिकों से सहयोग की अपील
जहां एक ओर शहर को नशामुक्त बनाने की दिशा में संयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सड़क सुरक्षा और आपातकालीन प्रबंधन को लेकर भी सरकार सक्रिय दिख रही है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और यातायात नियमों का सख्ती से पालन करें। मुंबई में इन दोनों पहलों को कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इनके परिणामों पर सबकी नजर रहेगी।
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