डिजिटल निगरानी में ब्लड बैंक-देश के सभी ब्लड बैंकों के लिए ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य

The CSR Journal Magazine

डिजिटल इंडिया का एक और कदम

अब देशभर के ब्लड बैंकों पर सरकार की ‘डिजिटल’ नजर रहेगी। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) ने सभी लाइसेंस प्राप्त ब्लड सेंटर के लिए ‘ई-रक्तकोष’ पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य देशभर में खून की उपलब्धता को एक सेंट्रलाइज्ड सिस्टम में लाना और कालाबाजारी रोकना है।

सख्ती से होगी निगरानी

इस बार सबसे बड़ा बदलाव यह है कि ‘ई-रक्तकोष’ को सीधे निरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया है। इस सिस्टम के तहत जांच के दौरान ड्रग इंस्पेक्टर पोर्टल पर दर्ज डेटा और वास्तविक स्टॉक का मिलान करेंगे। अगर डेटा में हेराफेरी मिली, तो पहली बार सख्त कार्रवाई की जाएगी। राज्यों की लाइसेंसिंग अथॉरिटी को 30 दिन में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस पहल से खून की सप्लाई चेन में पारदर्शिता आएगी।

डोनर्स का रिकॉर्ड होगा जुड़ा

अब डोनर्स का रिकॉर्ड ‘आभा आईडी’ या आधार से जोड़ा जा सकेगा, जिससे पूरी सप्लाई चेन पारदर्शी होगी। पहले ‘एडवाइजरी’ निर्देशों का पालन अनिवार्य नहीं था, जिससे मनमानी बढ़ी। इसी कारण, पोर्टल के डेटा की नियमित जांच का हिस्सा नहीं बनाया गया था। लेकिन अब अवस्थाएँ बदल गई हैं।

नए नियमों का क्या होगा असर?

इस बार नियम बदले हैं और कार्रवाई का डर लगाया गया है। अब ब्लड बैंक्स के लिए पोर्टल से जुड़ना विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्य हो गया है। अनुपालन न होने पर लाइसेंस पर गाज गिर सकती है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि मेडिकल इमरजेंसी में मरीज भटक न सकें और खून की उपलब्धता हमेशा सुनिश्चित रहे।

सख्त कार्रवाई का प्राविधान

जो भी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसा करने से पूरे देश में एक क्लिक पर ब्लड स्टॉक पर नजर रखना संभव होगा। यह पहल न केवल ब्लड बैंकों के लिए, बल्कि मरीजों के लिए भी बहुत फायदेमंद साबित होगी।

सेहत की बात

अध्यन के अनुसार, दुनिया के हर चौथे शख्स में खून की कमी है, जिसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। इसके कारण, डोनर्स की संख्या में वृद्धि जरूरी है।

उम्मीद की नई किरण

इस नई प्रणाली के लागू होने से उम्मीद है कि ब्लड बैंकों का संचालन अधिक संगठित और प्रभावी होगा। इससे न केवल खून की कालाबाजारी पर अंकुश लगेगा, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार भी मिल सकेगा।

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