Bhimashankar Mandir closed on Mahashivratri: महाशिवरात्रि पर भगवान शिव के दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए अहम खबर है। पुणे जिले में स्थित बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, श्री क्षेत्र भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर महाशिवरात्रि के दौरान भी दर्शन के लिए बंद रहेगा। जिला प्रशासन ने सुरक्षा और विकास कार्यों को देखते हुए यह बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, वर्ष 2027 में नासिक में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले (Nasik Kumbh Mela) को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने भीमाशंकर मंदिर के समग्र विकास के लिए विशेष विकास योजना को मंजूरी दी है। प्रशासन का अनुमान है कि कुंभ के दौरान नासिक-त्र्यंबकेश्वर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं में से बड़ी संख्या भीमाशंकर भी दर्शन के लिए पहुंचेगी। रोजाना करीब एक लाख श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को संभालने के लिए मंदिर परिसर में बड़े स्तर पर आधारभूत सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
Bhimashankar Mandir closed on Mahashivratri: भीड़ प्रबंधन पर फोकस
इस विकास योजना के तहत नया भव्य सभामंडप, सुरक्षित प्रवेश और निकास व्यवस्था, सीढ़ी मार्ग और आधुनिक भीड़ प्रबंधन सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है। पुराना सभामंडप भीड़ के लिहाज से छोटा पड़ रहा था, इसलिए उसे पूरी तरह हटाकर नया निर्माण शुरू किया गया है। इसके चलते मंदिर परिसर में भारी मात्रा में पत्थर, निर्माण सामग्री और मशीनें मौजूद हैं। प्रशासन का कहना है कि मौजूदा हालात में मंदिर को श्रद्धालुओं के लिए खुला रखना गंभीर खतरे को न्योता दे सकता है। निर्माण कार्य के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
Bhimashankar Mandir closed on Mahashivratri: महाशिवरात्रि में भी नहीं मिलेंगे दर्शन
पहले महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर को खुला रखने पर विचार किया गया था, लेकिन निर्माण कार्य की रफ्तार, दायरा और सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा के बाद यह फैसला बदला गया। अब 12 फरवरी 2026 से 18 फरवरी 2026 तक महाशिवरात्रि के पूरे कालखंड में भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग मंदिर दर्शन के लिए बंद रहेगा। भीमाशंकर क्षेत्र अत्यधिक वर्षा वाला इलाका है। जून से सितंबर तक भारी बारिश के कारण निर्माण कार्य लगभग असंभव हो जाता है। ऐसे में उपलब्ध समय में ही विकास कार्यों को तेजी से पूरा करना प्रशासन की मजबूरी है।
श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील
पुणे के जिलाधिकारी जितेंद्र डूडी ने श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे इस निर्णय की गंभीरता को समझें और मंदिर संस्थान, जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन का सहयोग करें। प्रशासन का कहना है कि ये अस्थायी असुविधा भविष्य में श्रद्धालुओं को बेहतर, सुरक्षित और सुव्यवस्थित दर्शन का अनुभव देने के लिए जरूरी है।
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