बद्रीनाथ हेलिकॉप्टर हादसा: इंस्पेक्टर अरुण सालुंके का आखिरी कॉल, बेंगलुरु के 5 दोस्तों की गई जान

The CSR Journal Magazine

बद्रीनाथ हेलिकॉप्टर हादसे में बेंगलुरु पुलिस इंस्पेक्टर अरुण सालुंके और उनके चार दोस्तों की मौत, मौसम की खराबी बनी कारण

उत्तराखंड के चमोली में शुक्रवार दोपहर को एक भीषण हेलीकॉप्टर हादसा हो गया, जिसमें बेंगलुरु के पांच करीबी दोस्तों और पायलट समेत सभी छह लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। जान गंवाने वाले यात्रियों में बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) के जांबाज इंस्पेक्टर अरुण सालुंके भी शामिल थे। उड़ान भरने से चंद मिनट पहले इंस्पेक्टर अरुण सालुंके ने बेंगलुरु में मौजूद अपने एक करीबी दोस्त को आखिरी कॉल किया था, जिसमें उन्होंने पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी और खराब मौसम का जिक्र किया था। यह कॉल खत्म होने के कुछ ही देर बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

चारधाम यात्रा पर निकले थे बेंगलुरु के 5 दोस्त

कर्नाटक के बेंगलुरु से ताल्लुक रखने वाले पांच दोस्तों का एक समूह पवित्र चारधाम यात्रा के लिए उत्तराखंड आया हुआ था। इस समूह में शामिल लोग अलग-अलग प्रतिष्ठित पेशों से जुड़े हुए थे, जो समय निकालकर बाबा बद्रीनाथ के दर्शन के लिए पहाड़ों पर पहुंचे थे। मृतकों की पहचान इस प्रकार की गई है:
अरुण सालुंके: बेंगलुरु CCB के स्पेशल इंक्वायरी विंग में तैनात 2007 बैच के कड़क पुलिस इंस्पेक्टर।
एच. एस. नटराज: तुमकुरु के हुलियुर्दूर्गा के रहने वाले एक सफल व्यवसायी।
बी. प्रताप गौड़ा: बेंगलुरु के जक्कूर के रहने वाले एक जाने-माने सिविल कांट्रैक्टर।
के. सुधीर: नागराभावी, बेंगलुरु के निवासी और पेशे से वकील।
शंकर गौड़ा: तुमकुरु के रहने वाले और पेशे से अधिवक्ता (वकील)।
इन यात्रियों के साथ हेलीकॉप्टर उड़ा रहे दिल्ली के निवासी, 48 वर्षीय अनुभवी मुख्य पायलट कैप्टन हिमांशु सभरवाल की भी इस क्रैश में मौत हो गई।

बद्रीनाथ से उड़ान भरने के 2 मिनट बाद ही टूटा संपर्क

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविशन (DGCA) और जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह हेलीकॉप्टर ‘ट्रांस भारत एविएशन प्राइवेट लिमिटेड’ (Trans Bharat Aviation) का था, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-HCX था। शुक्रवार दोपहर को बद्रीनाथ धाम के दर्शन करने के बाद सभी पांचों दोस्त देहरादून के सहस्रधारा हेलीपैड के लिए रवाना होने वाले थे। हेलीकॉप्टर ने दोपहर ठीक 1:12 बजे बद्रीनाथ हेलीपैड से हवा में उड़ान भरी। लेकिन उड़ान भरने के मात्र दो मिनट बाद, यानी दोपहर 1:14 बजे जोशीमठ घाटी के पास अचानक इसका एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) और बेस स्टेशन से संपर्क पूरी तरह टूट गया। उसी समय पास की एक सैन्य चौकी (Army Post) ने नोटिस किया कि एक हेलीकॉप्टर काफी तेजी से अपनी ऊंचाई खो रहा है और उसमें से गहरा धुआं निकल रहा है।

हाईटेंशन तार की चपेट में आने और खराब मौसम की आशंका

प्राथमिक जांच रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से सामने आया है कि हादसा जोशीमठ के निकट चाय गांव के पास स्थित एक पहाड़ी और हाथी पर्वत क्षेत्र के घने जंगलों में हुआ। उस समय पूरे इलाके में विजिबिलिटी (दृश्यता) काफी कम थी और पहाड़ों पर तेज बर्फबारी के साथ घना कोहरा छाया हुआ था। उड़ान के दौरान कम विजिबिलिटी के कारण हेलीकॉप्टर संभवतः रास्ता भटक गया या अत्यधिक नीचे आ गया, जिसके चलते वह वहां से गुजर रही एक हाईटेंशन विद्युत लाइन (High-Tension Power Line) के संपर्क में आ गया। बिजली के तारों से टकराने के बाद हेलीकॉप्टर के पिछले हिस्से (Tail Rotor) को भारी क्षति पहुंची और पायलट ने नियंत्रण खो दिया। इसके बाद हेलीकॉप्टर सीधे पहाड़ी ढलान के घने जंगल में जा गिरा और गिरते ही उसमें भीषण आग लग गई।

इंस्पेक्टर अरुण सालुंके का वो ‘आखिरी कॉल’

इस पूरे हादसे की सबसे भावुक कर देने वाली कड़ी इंस्पेक्टर अरुण सालुंके की वह आखिरी बातचीत है, जो उन्होंने क्रैश से ठीक पहले की थी। जब वे सभी बद्रीनाथ हेलीपैड पर बैठकर अपनी फ्लाइट का इंतजार कर रहे थे, तब अरुण ने बेंगलुरु में अपने एक बैचमेट और पुलिस मित्र को फोन मिलाया था। उन्होंने बातचीत के दौरान कहा था, “यार, यहाँ पहाड़ों पर मौसम बहुत तेजी से बदल रहा है। इस समय चारों तरफ भयानक कोहरा है और तेज बर्फबारी शुरू हो चुकी है। विजिबिलिटी न के बराबर है। हमारा हेलीकॉप्टर अभी उड़ने वाला है, देहरादून पहुंचते ही तुम्हें दोबारा कॉल करता हूँ।” दुर्भाग्य से वह दोबारा कॉल कभी नहीं आ सका। इसके अलावा, एक अन्य यात्री प्रताप गौड़ा ने भी हेलीकॉप्टर में बैठते वक्त अपने परिवार को एक छोटा सा वीडियो भेजा था, जिसके कुछ ही समय बाद परिवार को इस मनहूस खबर का सामना करना पड़ा।

इंस्पेक्टर अरुण सालुंके की लोकप्रियता

अरुण सालुंके को बेंगलुरु पुलिस विभाग में एक ‘नो-नॉनसेंस’ और बेहद शांत स्वभाव का होनहार अधिकारी माना जाता था। उन्होंने हाल ही में आईपीएल मैचों के दौरान चल रहे एक बड़े सट्टेबाजी रैकेट का भंडाफोड़ किया था। दो महीने पहले ही उनके एक और करीबी पुलिस मित्र रवि के.बी. की मध्य प्रदेश में एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई थी, जिससे अरुण काफी दुखी थे। अब इस हवाई हादसे ने उनके परिवार और पूरे पुलिस महकमे को कभी न भरने वाला जख्म दे दिया है।

बीहड़ जंगलों में चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की खबर मिलते ही चमोली के जिला प्रशासन ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू करवाया। भारतीय सेना (Indian Army), राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों को मौके के लिए रवाना किया गया। हादसे की जगह खड़ी चढ़ाई और घने जंगलों के बीच होने के कारण बचाव दलों को वहां तक पैदल पहुंचने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जब टीमें मौके पर पहुंचीं, तो हेलीकॉप्टर का मलबा बुरी तरह बिखरा हुआ था और उसमें आग लगी हुई थी। बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद मलबे से पायलट समेत सभी छह शवों को बाहर निकाला। रात के घने अंधेरे, अत्यधिक ठंड और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण शवों को पहाड़ी से नीचे लाने के काम में शनिवार सुबह तक का समय लग गया।

मुख्यमंत्री धामी ने जताया दुख, जांच के आदेश

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विमान दुर्घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर शोक संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि चमोली क्षेत्र में हुआ यह हादसा अत्यंत हृदयविदारक है। उन्होंने जिला प्रशासन को राहत कार्यों को तेजी से पूरा करने और मृतकों के परिजनों की हर संभव मदद करने के निर्देश दिए हैं। कर्नाटक सरकार और वहां के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी इस संबंध में उत्तराखंड के अधिकारियों से संपर्क साधा है। बेंगलुरु से अधिकारियों और पीड़ितों के परिजनों की एक टीम को शवों की शिनाख्त और उन्हें वापस लाने की कागजी कार्रवाई पूरी करने के लिए देहरादून भेजा गया है, ताकि सभी पार्थिव शरीरों को विशेष विमान से जल्द से जल्द उनके गृह राज्य कर्नाटक पहुंचाया जा सके। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) की एक विशेष तकनीकी टीम भी विस्तृत जांच के लिए देहरादून पहुंच चुकी है ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।

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