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March 11, 2026

जम्मू-कश्मीर के नौशेरा में सेना ने एक आतंकी को मार गिराया, दूसरे की तलाश जारी

The CSR Journal Magazine
जम्मू-कश्मीर के झंगर-नौशेरा सेक्टर में भारतीय सेना ने 10 मार्च 2026 को घुसपैठ की कोशिश के दौरान एक आतंकवादी को मार गिराया। सेना ने बताया कि दोपहर करीब 3 बजे लाइन ऑफ कंट्रोल पर दो आतंकवादियों की गतिविधियों की सूचना मिली थी। तत्पश्चात, सेना ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घुसपैठ की इस कोशिश को सफलतापूर्वक रोक दिया। मारा गया आतंकवादी अब तक की गई मुठभेड़ों का हिस्सा था, जबकि दूसरे आतंकवादी की तलाश जारी है।

सुरक्षा बलों की निगरानी और अभियान

सेना ने कहा कि नगर और हवाई निगरानी का सहारा लिया जा रहा है ताकि दूसरे आतंकवादी को शीघ्रता से पकड़ सकें। पिछले पांच दिनों में, जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने दूसरी बार घुसपैठ की कोशिश को विफल किया है। इस तरह की घटनाएं सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताओं को बढ़ा रही हैं, लेकिन सेना अपनी कार्यवाही में संजीदगी से जुटी हुई है।

326 दिन के ऑपरेशन में सफलताएँ

इससे पहले 23 फरवरी को सेना ने बताया कि 326 दिन के ऑपरेशन के बाद, किश्तवाड़ से आतंक के नेटवर्क को समाप्त किया गया। भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कोर ने बताया कि इस दौरान सात आतंकियों को मार गिराया गया। इनमें जैश का कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल था, जो किश्तवाड़ क्षेत्र में आतंक का सरगना माना जाता था।

आपरेशन त्राशी-1 की महत्वपूर्ण जानकारी

साल 2026 में चलाए गए ऑपरेशन त्राशी-1 की शुरुआत 18 जनवरी को चतरू बेल्ट के मंडराल-सिंहपोरा क्षेत्र में की गई थी। इस मुठभेड़ में आठ जवान घायल हुए थे, जिनमें से एक हवलदार की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। इसके बाद अलग-अलग तारीखों में दो और मुठभेड़ें हुईं, और 31 जनवरी को डोलगाम इलाके में भी गोलीबारी की घटना सामने आई। अंततः चतरू में तीन आतंकियों को ढेर कर इस ऑपरेशन को समाप्त किया गया।

आपरेशन ‘किया’ का विवरण

व्हाइट नाइट कोर ने चार फरवरी को CIF डेल्टा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF के साथ बसंतगढ़ के जोफर फॉरेस्ट एरिया में एक जॉइंट ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में सुरक्षा बलों ने आतंकियों पर UBGLs (अंडर बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) का इस्तेमाल किया, जिससे आतंकियों की एक गुफा को विस्फोट के जरिए नष्ट कर दिया गया। इस विस्फोट में दोनों आतंकवादी मारे गए।

नए सुरक्षा उपायों पर ध्यान

इस तरह की निरंतर मुठभेड़ों और घुसपैठ की कोशिशों से यह स्पष्ट होता है कि सुरक्षा बलों को अपनी सामरिक तैयारियों को बढ़ाने की आवश्यकता है। जम्मू-कश्मीर का क्षेत्र हमेशा से ही सुरक्षा मुद्दों का केंद्र रहा है, और ऐसे समय में हर संभव कदम उठाने की आवश्यकता है। सेना ने अपनी सतर्कता बरकरार रखते हुए नए सुरक्षा उपायों पर काम करने की योजना बनाई है।

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