महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। Sanjay Raut ने कहा है कि सभी वरिष्ठ विपक्षी नेता चाहते हैं कि Uddhav Thackeray दोबारा विधान परिषद में पहुंचें। राउत के मुताबिक ठाकरे विपक्ष की एक मजबूत आवाज हैं और उनका विधानमंडल में रहना बेहद जरूरी है। राउत ने कहा कि यह केवल उनकी पार्टी का ही नहीं बल्कि पूरे विपक्ष का मत है कि ठाकरे को फिर से विधान परिषद में भेजा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में अंतिम निर्णय Maha Vikas Aghadi (एमवीए) के सभी घटक दल मिलकर सामूहिक रूप से लेंगे। एमवीए में Shiv Sena (Uddhav Balasaheb Thackeray), Indian National Congress और Nationalist Congress Party (Sharad Pawar faction) शामिल हैं।
क्यों जरूरी है उद्धव ठाकरे का विधान परिषद में रहना
राउत ने कहा कि महाराष्ट्र में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में विपक्ष को एक मजबूत नेतृत्व और आवाज की जरूरत है। उद्धव ठाकरे राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री रह चुके हैं और विधानसभा व परिषद दोनों में उनका अनुभव काफी अहम है। ऐसे में उनका विधान परिषद में बने रहना विपक्ष की रणनीति और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उद्धव ठाकरे का राजनीतिक सफर
Uddhav Thackeray महाराष्ट्र के प्रमुख राजनीतिक परिवार से आते हैं। वे शिवसेना संस्थापक Bal Thackeray के बेटे हैं। उद्धव ठाकरे ने 2019 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय Shiv Sena, Nationalist Congress Party और Indian National Congress ने मिलकर Maha Vikas Aghadi सरकार बनाई थी। हालांकि जून 2022 में Eknath Shinde के नेतृत्व में शिवसेना के कई विधायकों ने बगावत कर दी थी, जिसके बाद ठाकरे सरकार गिर गई। इसके बाद राज्य में शिंदे और Devendra Fadnavis के नेतृत्व में नई सरकार बनी।
विधान परिषद सदस्यता का महत्व
मुख्यमंत्री बनने के समय उद्धव ठाकरे विधानसभा के सदस्य नहीं थे, इसलिए उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया था। परिषद की सदस्यता का कार्यकाल सीमित होता है, इसलिए अब उनके दोबारा चुने जाने को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष चाहता है कि ठाकरे विधानमंडल में बने रहें ताकि वे राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते रहें।
MVA में चल रही चर्चा
संजय राउत के अनुसार MVA के तीनों दल इस मुद्दे पर बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गठबंधन के सभी वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि उद्धव ठाकरे फिर से परिषद में जाएं, लेकिन उम्मीदवार तय करने और रणनीति बनाने का फैसला गठबंधन के स्तर पर ही लिया जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर उद्धव ठाकरे दोबारा विधान परिषद के लिए चुने जाते हैं, तो इससे महाराष्ट्र की विपक्षी राजनीति को नई मजबूती मिल सकती है और आगामी चुनावों की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
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