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January 14, 2026

इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026: अहमदाबाद की विरासत का जीवंत उत्सव-हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन ! 

The CSR Journal Magazine

 

अहमदाबाद में विरासत और पतंगों का अनूठा संगम! इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 के दौरान हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन बना आकर्षण का केंद्र! रंगीन पतंगों के बीच जीवंत हुई अहमदाबाद की ऐतिहासिक विरासत ! काइट फेस्टिवल के बहाने अहमदाबाद की संस्कृति और परंपरा से साक्षात्कार का आग़ाज़!

रंगीन पतंगों के बीच जीवंत हुई अहमदाबाद की ऐतिहासिक विरासत

गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी अहमदाबाद एक बार फिर अपनी समृद्ध विरासत, जीवंत परंपराओं और रंग-बिरंगी पतंगों के साथ दुनिया भर के सैलानियों का स्वागत करने जा रही है। इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 के अवसर पर शहर में स्थापित किया गया “हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन” इस वर्ष खास आकर्षण के रूप में उभर रहा है। 12 जनवरी से 17 जनवरी 2026 तक चलने वाला यह विशेष ज़ोन आगंतुकों को अहमदाबाद की ऐतिहासिक धरोहर, पारंपरिक शिल्प और उत्सवधर्मी माहौल को बेहद करीब से महसूस करने का अवसर देगा।

विरासत की गलियों में सजी संस्कृति

हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि जैसे आगंतुक समय की सुरंग से गुजरते हुए पुराने अहमदाबाद में प्रवेश कर रहे हों। यहां शहर की ऐतिहासिक इमारतों, पोल संस्कृति, हवेलियों, पारंपरिक जीवनशैली और सामाजिक ताने-बाने को प्रदर्शित किया गया है। दीवारों पर सजी दुर्लभ तस्वीरें, दस्तावेज़ और कलाकृतियां अहमदाबाद के गौरवशाली अतीत की कहानी कहती नजर आती हैं।

पतंगों का इतिहास और शिल्प कौशल

इस ज़ोन का प्रमुख आकर्षण है काइट म्यूज़ियम, जहां पतंगों के विकास, उनके सांस्कृतिक महत्व और गुजरात में पतंगबाजी की परंपरा को विस्तार से दर्शाया गया है। यहां देश-विदेश की अनोखी पतंगें, पारंपरिक कागज़ी पतंगों से लेकर कलात्मक और थीम आधारित डिज़ाइनों तक, प्रदर्शित की गई हैं। साथ ही, अनुभवी कारीगरों द्वारा पतंग बनाने की लाइव डेमोंस्ट्रेशन भी देखने को मिलेगी, जिससे दर्शक इस पारंपरिक शिल्प की बारीकियों को समझ सकेंगे।

उत्सव, कला और लोक परंपराओं का संगम

हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन केवल प्रदर्शनी तक सीमित नहीं है। यहां लोक संगीत, पारंपरिक नृत्य, हस्तशिल्प स्टॉल और गुजराती व्यंजनों की खुशबू पूरे माहौल को उत्सवमय बना देती है। स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां और सांस्कृतिक कार्यक्रम आगंतुकों को गुजरात की जीवंत आत्मा से रूबरू कराते हैं।

पर्यटकों और युवाओं के लिए खास अनुभव

यह ज़ोन खास तौर पर युवाओं, छात्रों और विदेशी पर्यटकों के लिए तैयार किया गया है, ताकि वे मनोरंजन के साथ-साथ इतिहास और संस्कृति को भी समझ सकें। इंटरैक्टिव डिस्प्ले, जानकारीपूर्ण पैनल और फोटो ज़ोन इसे सोशल मीडिया फ्रेंडली अनुभव भी बनाते हैं।

टिकट और बुकिंग व्यवस्था

इस विशेष अनुभव का आनंद लेने के लिए बुकिंग केवल BookMyShow के माध्यम से उपलब्ध है। आयोजकों के अनुसार, सीमित स्लॉट और बढ़ती मांग को देखते हुए पहले से टिकट बुक कराने की सलाह दी गई है।

गुजरात से पतंगों का रिश्ता: परंपरा, उत्सव और पहचान की कहानी

गुजरात और पतंग- यह केवल एक खेल या मौसमी शौक का संबंध नहीं है, बल्कि सदियों से चली आ रही एक सांस्कृतिक परंपरा है, जो राज्य की पहचान का अभिन्न हिस्सा बन चुकी है। जैसे ही मकर संक्रांति का पर्व आता है, गुजरात की छतें रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाती हैं और पूरा आसमान मानो उत्सव का कैनवास बन जाता है। गुजरात में पतंग उड़ाने की परंपरा मुख्य रूप से मकर संक्रांति से जुड़ी है। सूर्य के उत्तरायण होने का यह पर्व शुभता, नई शुरुआत और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। इसी खुशी के इजहार के रूप में लोग पतंग उड़ाते हैं। सुबह से लेकर शाम तक “काई पो चे” की गूंज के साथ आसमान में पतंगों की होड़ लग जाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इतिहासकारों के अनुसार, गुजरात में पतंगबाजी की शुरुआत राजाओं और नवाबों के दौर में हुई। उस समय पतंग उड़ाना शाही मनोरंजन का हिस्सा था। धीरे-धीरे यह परंपरा आम लोगों तक पहुंची और सामाजिक उत्सव का रूप ले लिया। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहर पतंग निर्माण और व्यापार के बड़े केंद्र बने।

शिल्प और कारीगरों की मेहनत

गुजरात की पतंगें केवल कागज़ और डोर का मेल नहीं हैं, बल्कि यह कारीगरों के हुनर का जीवंत उदाहरण हैं। महीनों पहले से ही पतंग बनाने का काम शुरू हो जाता है। पतले कागज़, बांस की कमान और मांझे की बारीक परत- हर चरण में सटीकता और अनुभव की जरूरत होती है। हजारों परिवार इस परंपरागत उद्योग से जुड़े हुए हैं।

अंतरराष्ट्रीय पहचान

गुजरात के पतंग उत्सव को वैश्विक मंच दिलाने का श्रेय इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल को जाता है। हर साल देश-विदेश से पतंग कलाकार गुजरात पहुंचते हैं और अनोखी, विशाल व कलात्मक पतंगों का प्रदर्शन करते हैं। इससे गुजरात की संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली है।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

पतंग उड़ाना गुजरात में केवल व्यक्तिगत आनंद नहीं, बल्कि सामूहिक उत्सव है। परिवार, पड़ोसी और दोस्त एक साथ छतों पर इकट्ठा होते हैं। यह परंपरा आपसी मेल-जोल, प्रतिस्पर्धा और खुशी का प्रतीक है। साथ ही, लोक संगीत, पारंपरिक भोजन और हंसी-ठिठोली इस उत्सव को और रंगीन बना देती है।समय के साथ पतंगों के डिज़ाइन और रूप बदलते गए हैं। आज थीम आधारित, थ्री-डी और मैसेज वाली पतंगें भी उड़ाई जाती हैं। फिर भी, गुजरात का पतंगों से रिश्ता आज भी उतना ही गहरा और जीवंत है।
गुजरात और पतंगों का संबंध केवल आकाश में उड़ती डोर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की संस्कृति, परंपरा और सामूहिक चेतना का प्रतीक है। यही कारण है कि गुजरात की पहचान दुनिया भर में आज भी रंगीन पतंगों के साथ की  जाती है।

अहमदाबाद की पहचान को वैश्विक मंच

इंटरनेशनल काइट फेस्टिवल 2026 के साथ जुड़ा यह हेरिटेज एंड काइट म्यूज़ियम ज़ोन अहमदाबाद की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करने की एक सशक्त पहल है। यह न केवल पतंगबाजी के उत्सव को नई गहराई देता है, बल्कि शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी सम्मानपूर्वक सामने लाता है। कुल मिलाकर, 12 से 17 जनवरी 2026 के बीच अहमदाबाद आने वाले हर सैलानी के लिए यह ज़ोन एक ऐसा अनुभव साबित होगा, जहां इतिहास, शिल्प और उत्सव हर कदम पर जीवंत नजर आएंगे।

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