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February 22, 2026

बंगाल चुनाव से पहले केंद्र का बड़ा फैसला, CAA लागू करने के लिए बनाई ‘एम्पावर्ड कमेटी’

The CSR Journal Magazine
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत नागरिकता आवेदन को लागू करने के लिए एक ‘एम्पावर्ड कमेटी’ बनाई है। इस कमेटी का मुख्य काम राज्य में नागरिकता के लिए आए आवेदनों की जांच करना होगा और उन्हें मंजूर या नामंजूर करने का निर्णय लेना होगा। इस कदम का खास महत्व है, खासकर मतुआ समुदाय के लिए जो लंबे समय से नागरिकता की मांग कर रहा था।

केंद्र ने लिया अहम फैसला

केंद्र ने एक गजट नोटिफिकेशन जारी कर प्रदेश में CAA को लागू करने के लिए इस कमेटी के गठन का ऐलान किया है। गृह मंत्री अमित शाह की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया, जिसमें विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी इसे लेकर संकेत दिए थे। इस प्रक्रिया को शनिवार को एक और कदम आगे बढ़ाते हुए साकार किया गया।

कौन होंगे कमेटी के सदस्य?

इस ‘एम्पावर्ड कमेटी’ की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के सेंसस ऑपरेशन्स डायरेक्टरेट के डिप्टी रजिस्ट्रार जनरल करेंगे। कमेटी में बहुस्तरीय अधिकारी शामिल होंगे, जैसे कि सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो का एक ऑफिसर, फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर का एक नॉमिनेटेड रिप्रेजेंटेटिव, और वेस्ट बंगाल के नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर का स्टेट इंफॉर्मेटिक्स ऑफिसर। इसके अलावा, राज्य होम डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी और अन्य निमंत्रित सदस्य भी इसमें शामिल होंगे।

तृणमूल कांग्रेस का विरोध

तृणमूल कांग्रेस इस कदम का विरोध कर रही है और इसे भेदभावपूर्ण बता रही है। पार्टी का दावा है कि केंद्र इस फैसले के माध्यम से मतुआ समुदाय का वोट बैंक बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। इसको लेकर टीएमसी नेता ममता बाला ठाकुर ने कहा है कि केंद्र इस मुद्दे को जल्दबाजी में उठाकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

मतुआ समुदाय को लुभाने की कवायद

केंद्र का यह दावा है कि इस नोटिफिकेशन के साथ वेस्ट बंगाल में CAA लागू करने की प्रणाली पूरी हो चुकी है। यह कमेटी 11 मार्च, 2024 को घोषित नागरिकता ढांचे के अनुसार राज्य स्तर पर काम करेगी। हालाँकि, अब तक कई लोगों को CAA के तहत नागरिकता नहीं मिली है, जिससे विवाद पैदा हुआ है। ऐसे में जानकार इसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानते हैं।

सियासी सरगर्मियाँ तेज़

हाल ही में आए घटनाक्रम के बाद, सियासी सरगर्मी बढ़ गई है। मतुआ समुदाय के लोग कई समय से नागरिकता देने की मांग कर रहे हैं, और अब इस मुद्दे पर केंद्र सरकार का एक्शन विभिन्न प्रतिक्रिया उत्पन्न कर रहा है। वहीं, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि यह केंद्र की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है, जिसे चुनावी लाभ के लिए किया जा रहा है।

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