आदि कैलाश यात्रा का 1 मई से शुभारंभ, पिथौरागढ़ में खुलेंगे मंदिर के कपाट

The CSR Journal Magazine
उत्तराखंड में 1 मई से शिव-पार्वती मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही आदि कैलाश यात्रा का औपचारिक शुभारंभ होगा। यह पावन स्थल पिथौरागढ़ में 14,500 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। कपाट खुलने का यह अवसर स्थानीय लोगों के लिए बहुत मायने रखता है, क्योंकि इसके साथ ही शीतकालीन प्रवास के बाद ग्रामीण अपने गांवों की ओर लौटना शुरू करेंगे। कुटी गांव में ग्राम प्रधान नगेंद्र सिंह कुटियाल और पुजारियों की बैठक में व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई और कपाट खोलने का निर्णय लिया गया।

श्रद्धालुओं के लिए नए प्रावधान

ग्राम प्रधान ने बताया कि ज्योलिंगकांग क्षेत्र में कचरा फैलने की समस्या को देखते हुए इस बार श्रद्धालुओं को कूड़ा एकत्र करने के लिए बैग और पानी की बोतलें प्रदान की जाएंगी। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी। यह पहल स्थानीय लोगों और पर्यटकों के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी।

स्थानीय रोजगार में वृद्धि

स्थानीय होम स्टे संचालक कुंवर सिंह कुटियाल के अनुसार, पहले यात्रा पूरी तरह से पैदल होती थी, लेकिन अब सड़क निर्माण के कारण श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। टूर ऑपरेटर गुलाब सिंह कुटियाल ने बताया कि इस बढ़ती संख्या से स्थानीय युवाओं को होम स्टे और टैक्सी सेवाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर मिल रहे हैं।

रं समाज का सांस्कृतिक महत्व

रं समाज, जो पिथौरागढ़ जिले की व्यास घाटी में रहने वाला एक प्रमुख जनजातीय समुदाय है, अपनी अद्भुत संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। सर्दियों में ये लोग निचले इलाकों में चले जाते हैं और गर्मियों में पहाड़ों की ओर लौट आते हैं। यही परंपरा आदि कैलाश यात्रा से जुड़ी है, जिसमें मंदिरों के कपाट खोलने और बंद करने का निर्णय भी इसी के अंतर्गत आता है।

यात्रा के लिए परमिट की जानकारी

आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा के लिए इनर लाइन परमिट धारचूला स्थित एसडीएम कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है। इस हेतु आधार कार्ड, मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होती है। यात्रा के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध है, जिससे श्रद्धालुओं को प्रक्रिया में आसानी होगी।

प्रधानमंत्री का अनुभव

इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यात्रा के दौरान आदि कैलाश क्षेत्र का दौरा किया था। उन्होंने पिथौरागढ़ में पूजा-अर्चना की और यहां की प्राकृतिक सुंदरता की तारीफ की। उनके अनुभवों ने यात्रा को और भी आकर्षक बनाया है, जिससे लोग इस पवित्र स्थल की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

आदि कैलाश की महत्वपूर्ण जानकारी

आदि कैलाश को ‘छोटा कैलाश’ भी कहा जाता है, जो भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित है। यहां भगवान शिव और माता पार्वती की यात्रा की धार्मिक मान्यता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालु पार्वती सरोवर और गौरी कुंड का भी दर्शन कर सकते हैं। स्थानीय वाहनों की सुविधा के कारण अब यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो गई है।
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