सिरमौर जिले के भरली गांव में शहीद जवान आशीष कुमार की बहन की शादी ने एक ऐसी तस्वीर रची, जिसने गांव ही नहीं, पूरे प्रदेश को गर्व और भावनाओं से भर दिया। जिसमें देश के सपूत की याद गुम न हो इसी संकल्प के साथ ग्रेनेडियर रेजिमेंट और भूतपूर्व सैनिकों ने बहन की हर रस्म निभा कर कहा “हमारी बहन है ये।”
जज्बे की कहानी: वीरता से लेकर विदाई तक
आशीष कुमार 19 ग्रेनेडियर बटालियन के अंतर्गत अरूणाचल प्रदेश में सेवारत थे। 27 अगस्त 2024 को ‘ऑपरेशन अलर्ट’ के दौरान अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए और वीरता का परिचय देते हुए देश को अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।शादी की हल्दी से लेकर पग-फेरे और विदाई तक, नायक, ग्रेनेडियर और साथी सैनिकों ने step by step निभाया ‘रिस्क’ और ‘रोले’।जब दुल्हन विदा हुई, तो ही फौजी भाइयों ने खुद उसे गाड़ी में बैठाया, एक ऐसा दृश्य, जहां चेहरे पर मुस्कान और आँखों में नम थी।
सम्मान और शगुन: सिर्फ रस्में नहीं, संवेदनशीलता भी
रेजिमेंट ने शहीद की बहन को एफडी (सावधि जमा) भेंट किया यह सिर्फ उपहार नहीं, एक अर्थ था, “हम हमेशा साथ हैं।भूतपूर्व सैनिक संगठन ने शगुन और स्मृति चिन्ह देकर यह संदेश दिया कि शहीद परिवार कभी अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।समारोह में शामिल रहे कमान अधिकारी, साथियों और स्थानीय पूर्व सैनिक, हर एक ने मिलकर इस परिवार को अपना परिवार माना।
गांव में गूंजा गर्व, भावनाओं से भर उठा माहौल
भरली गांव अब सिर्फ एक शादी की वजह से याद नहीं किया जाएगा बल्कि उस भावनात्मक पल की वजह से, जब सैनिकों ने अमर बलिदान को सम्मान दिया और बहन को भाई का साथ।
“शहीद हमारे साथी नहीं, हमारे भाई थे। उनकी बहन अब हमारी बहन है।” इन शब्दों ने पूरे माहौल को भावुक कर दिया और यह संदेश फैलाया , देशभक्ति सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं होती, बल्कि शहीदों के परिवारों के सम्मान में भी निभाई जाती है।
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