गांव में नहीं आ रही दुल्हनें, कुंवारे बैठे हैं लड़के, पानी है वजह 

The CSR Journal Magazine
Madhya Pradesh के Mandla जिले के बिछिया विकासखंड में एक गांव ऐसा है, जहां पानी की किल्लत इस कदर है कि पानी के लिए करीब 1 किलोमीटर दूर घाट उतरकर कड़ी मशक्कत कर रेत के बने झिरिया से पानी लाना पड़ रहा है। गांव में पानी नहीं होने की वजह से दूसरे गांव के लोग उस गांव में अपनी बेटियों की शादी नहीं रहे है। मतलब Mandla गांव के लड़कों की शादी नहीं हो रही है। गांव में दुल्हन नहीं आ रही है और जो दुल्हने गांव में हैं, वो भी घर और गांव छोड़कर जा रही है।

Mandla: पानी की वजह कुंवारे हैं लड़के

Mandla MP: गर्मी का मौसम अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुआ, कि MP का Mandla जिला पानी की भारी किल्लत से जूझने लगा है। जिले के कई गांवों के लोग पानी के संकट से जूझ रहे है। मध्य प्रदेश के Mandla जिला के बिछिया विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत दानी टोला के Peepartola नाम के इस गांव की 1000 से भी ज्यादा की आबादी है। इस गांव में पानी की किल्लत कुछ इस तरह है कि गांव में आधे से ज्यादा युवक कुंवारे रह गए हैं। इतना ही नहीं, जिनकी शादी हुई है उनकी दुल्हनें गांव और घर छोड़कर जा रही है। आपको सुनकर हैरत जरूर होगी लेकिन यहां पानी की कमी के कारण कई युवाओं की शादी नहीं हो पा रही है। ऐसा नहीं है कि यहां शादी के लिए रिश्ते आते नहीं हैं। बकायदा रिश्ते आते हैं लेकिन जब गांव में पानी के साधन के बारे में पूछा जाता है, तो लड़की वाले उल्टे पांव लौट जाते हैं। ग्रामीण नदी से रेत के बीच से छानकर पानी भरने की बात बताते है तो कितना भी Talented लड़का क्यों न हो, शादी के लिए हर कोई इस गांव में अपनी बेटी ब्याहने से डरता है। इस गांव के लोग कई सालों से 1 किलोमीटर दूर घाट से नीचे उतरकर हालोन नदी से रेत के बीच बनाए हुए झिरिया से छने हुए पानी से अपना जीनव यापन कर रहे है। गांव की इसी समस्या को देखते हुए यहां पर कोई भी अपनी लड़की ब्याहना नहीं चाहता। ये कहानी साल दो साल की नहीं, बल्कि कई सालों से चल रही है।
MP के Mandla जिले में स्थित पिपरटोला गांव, एक गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। गर्मी के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है, जिससे परिवारों को अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। Mandla गांव में पानी का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, इसलिए लोगों को रोजाना नजदीकी नदी तक जाना पड़ता है। गंदे पानी को इकट्ठा करना और उसे रेत से छानकर पीना, उनके अस्तित्व को बचाए रखने का एकमात्र सहारा है। चिलचिलाती गर्मी में पुरुष और महिलाएं दोनों पानी की तलाश में कड़ी मेहनत करते हैं, यही उनकी प्यास बुझाने का एकमात्र विकल्प है। वार्ड सदस्य राय सिंह मरावी का कहना है, “हम नदी और कुओं से पानी लाते हैं, लेकिन पानी बहुत प्रदूषित और गंदा है। कई ग्रामीण उल्टी, पेचिश और कई गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। इस पानी को पीने से कई लोगों की जान भी जा चुकी है।

जल योजना के नल Mandla में फांक रहे धूल

ऐसा बिल्कुल भी नहीं है कि इस गांव में नल-जल योजना के तहत नल नहीं लगे, पर ये सिर्फ धूल फांक रहे है। ऐसे में ग्रामीणों को पानी के लिए गांव से एक किलोमीटर दूर घाट उतरकर हालोन नदी में बह रहे रेत के बीच से एक कुंड बनाकर पानी को निकालना पड़ता है। इससे ग्रामीणों का सारा दिन सिर्फ पानी भरने में ही निकल जाता है। इससे गांव के बच्चे ना तो पढ़ पा रहे हैं और ना ही ग्रामीण सही तरीके से मेहनत मजदूरी कर पा रहे हैं। गांव में सभी मजदूर वर्ग के लोग हैं। यहां की महिलाओं का सारा दिन कोसों दूर से पानी लाने में ही गुज़र जाता है। ग्रामीण लगातार इसकी शिकायत सरपंच से लेकर कलेक्टर और जनप्रतिनिधी तक से कर चुके हैं, लेकिन आज तक इनकी समस्या का निदान नहीं हो पाया है। फिलहाल, Media द्वारा सक्रीयता दिखाने के बाद मामले में PHE अधिकारी ने जल्द ही लोगों को पानी मुहैया कराने का भरोसा दिलाया है।

Latest News

Popular Videos