ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और हालिया सैन्य गतिविधियों ने मध्य पूर्व (Middle East) में अस्थिरता का माहौल पैदा कर दिया है। भारत सरकार द्वारा जारी की गई नई एडवाइजरी, जिसमें नागरिकों को “शीघ्रता से बाहर निकलने (Expeditiously Exit)” की सलाह दी गई है, यह संकेत देती है कि 15 दिनों का संघर्ष विराम (Ceasefire) भले ही लागू हो, लेकिन स्थिति अभी भी अत्यंत संवेदनशील है। भारत के लिए यह चुनौती बड़ी है क्योंकि ईरान में लगभग 9,000 भारतीय नागरिक रह रहे हैं, जिनमें छात्र, व्यापारी और श्रमिक शामिल हैं। सरकार की प्राथमिकता उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना और एक सुव्यवस्थित निकासी प्रक्रिया (Evacuation Process) को अंजाम देना है। एडवाइजरी में थल सीमाओं (Land Borders) से बचने और केवल दूतावास के समन्वय से निकलने की हिदायत सुरक्षा के प्रति सरकार की सतर्कता को दर्शाती है। यह कदम ‘ऑपरेशन गंगा’ और ‘ऑपरेशन अजय’ जैसी पिछली सफल निकासियों की रणनीति पर आधारित है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर- ईरान में रह रहे नागरिकों से निकलने की अपील
भारत सरकार ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास (Embassy of India, Tehran) ने ईरान में फंसे लगभग 9,000 भारतीय नागरिकों के लिए निकासी (Evacuation) और मदद से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इस एडवाइजरी के तहत, भारतीय दूतावास ने ईरान में रह रहे सभी भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वे तुरंत और सुरक्षित तरीके से ईरान छोड़ दें। यह कदम सुरक्षा को देखते हुए उठाया गया है, ताकि किसी भी प्रकार के मौजूदा खतरों से बचा जा सके।
सरकार का स्पष्ट संदेश
भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि ईरान में रह रहे नागरिकों को बिल्कुल भी देर नहीं करनी चाहिए। सरकारी सूत्रों के अनुसार, स्थिति नाजुक है और नागरिकों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है। सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे सुरक्षित मार्गों का चयन करें और जल्द से जल्द अपने देश वापस लौटें।
यात्रा की योजना बनाने की सलाह
दूतावास ने ईरान में रहने वाले भारतीयों से कहा है कि वे अपनी यात्रा की योजना तुरंत बनाएं और सभी आवश्यक दस्तावेजों को तैयार रखें। यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि यात्रा के समय किसी भी अप्रत्याशित स्थिति का सामना न करना पड़े। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे अपने परिवार और दोस्तों के संपर्क में रहें ताकि कोई जरूरत पड़ने पर सहायता मिल सके।
विजागा कर रहे लोग भी सतर्क रहें
इस एडवाइजरी के चलते, जो लोग ईरान में व्यवसाय या अध्ययन के लिए हैं, उन्हें भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारत सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि सुरक्षा की स्थिति को देखते हुए भारत के नागरिकों का ईरान में रहना उचित नहीं है। ऐसे में, जिनके पास वीजा या अनुमति है, वे तुरंत अपनी स्थिति की समीक्षा करें।
दूतावास की मदद उपलब्ध
ईरान में स्थित भारतीय दूतावास ने यह भी जानकारी दी है कि वे अपने नागरिकों की मदद के लिए तैयार हैं। दूतावास लगातार स्थानीय स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी प्रकार की सहायता के लिए तत्पर है। नागरिकों को किसी भी प्रकार के सवाल या समस्याओं के लिए तुरंत दूतावास से संपर्क करने की सलाह दी गई है। इमरजेंसी हेल्पलाइन (24×7 Emergency Help) नंबरों पर संपर्क की सलाह दी गई है-
मोबाइल नंबर: +98 912 810 9115, +98 912 810 9102, +98 912 810 9109, +98 993 217 9359
WhatsApp (MEA Control Room): +91 99682 91988
ईमेल: cons.tehran@mea.gov.in
Toll Free (India): 1800 118 797
जो नागरिक दूतावास द्वारा बुक किए गए होटलों में ठहरे हैं, उन्हें अंदर ही रहने (Stay Put) और वहां मौजूद दूतावास की टीम के संपर्क में रहने की सलाह दी गई है।
भारत सरकार ने एयरलाइन कंपनियों के साथ मिलकर निकासी को तेज किया है। एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस ने 8 अप्रैल, 2026 को पश्चिम एशिया क्षेत्र से नागरिकों को लाने के लिए कई निर्धारित और गैर-निर्धारित उड़ानें संचालित की हैं। ईरान का हवाई क्षेत्र आंशिक रूप से प्रभावित होने के कारण, भारत ने आर्मेनिया (Armenia) और अजरबैजान (Azerbaijan) के साथ मिलकर ‘ट्रांजिट कॉरिडोर’ बनाया है। भारतीय नागरिकों को सड़क मार्ग से बाकू (अजरबैजान) या येरेवन (आर्मेनिया) ले जाया जा रहा है, जहाँ से एयर इंडिया एक्सप्रेस की विशेष उड़ानें उन्हें भारत पहुँचा रही हैं। दक्षिण ईरान में रहने वाले भारतीयों और नाविकों (Seafarers) के लिए बंदर अब्बास से भी निकासी के विशेष प्रबंध किए गए हैं।
आपातकालीन वित्तीय और दस्तावेजी सहायता
सरकार उन नागरिकों की मदद कर रही है जिनके पास संसाधन कम हैं। जिन नागरिकों के पासपोर्ट गुम हो गए हैं या एक्सपायर हो गए हैं, उनके लिए भारतीय दूतावास तत्काल ‘इमरजेंसी सर्टिफिकेट’ जारी कर रहा है ताकि वे यात्रा कर सकें। विदेश मंत्रालय ने एक समर्पित रैपिड रिस्पांस सेल सक्रिय किया है जो हवाई अड्डों पर सहायता, यात्रा मंजूरी और एयरलाइंस के साथ समन्वय का काम देख रहा है। दूतावास ने कई स्थानीय होटलों को किराए पर लिया है जहाँ भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से ठहर सकते हैं जब तक उनकी उड़ान का समय न हो जाए।
भारत में सहायता केंद्र
कंट्रोल रूम: नई दिल्ली में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
टोल फ्री नंबर: 1800 118 797
WhatsApp: +91 99682 91988
इंटरनेशनल टेंशन का प्रभाव
यह एडवाइजरी उसी सन्दर्भ में आई है जब पश्चिम एशिया में राजनीतिक तनाव बढ़ रहा है। कई देशों के बीच संबंधों में खटास आई है, जिससे वहां के निवासियों की सुरक्षा चिंताजनक हो गई है। ऐसे में भारतीय नागरिकों के लिए सतर्क रहना आवश्यक हो गया है।
खतरनाक स्थिति से बचाव का उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की एडवाइजरी से नागरिकों को सुरक्षित निकालने में मदद मिल सकती है। यह कदम पूरी तरह से नागरिकों की सुरक्षा का सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रही है और उन्हें घर लौटने के लिए प्रेरित कर रही है।
अगले कदम की तैयारी
सरकार ने ईरान में रह रहे नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा की योजनाओं को तुरंत क्रियान्वित करें। साथ ही, नागरिकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी आपात स्थिति में उन्हें तुरंत सहायता मिल सके। ईरान में वर्तमान स्थिति ‘रुको और देखो’ वाली नहीं बल्कि ‘सतर्कता और सक्रियता’ की है। भारत सरकार का संदेश स्पष्ट है: संघर्ष विराम का समय नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी के लिए एक ‘विंडो’ है जिसे गंवाया नहीं जाना चाहिए। नागरिकों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण यह है कि वे दूतावास के निर्देशों का अक्षरशः पालन करें और किसी भी अफवाह या असुरक्षित रास्ते से बचें। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के स्तर पर भारत की यह सक्रियता न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए उसके निरंतर प्रयासों का भी हिस्सा है।
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