उत्तर प्रदेश का नया संकल्प- शिक्षा, तकनीक और बुनियादी ढांचे की त्रिवेणी के विकास के प्रस्ताव हुए पास

The CSR Journal Magazine

 25 लाख टैबलेट, शिक्षामित्रों का मानदेय 17,000, योगी कैबिनेट के 22 प्रस्ताव पास

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने हालिया कैबिनेट बैठक में राज्य के भविष्य को संवारने वाले तीन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाकर अपनी दूरगामी विकासवादी सोच का परिचय दिया है। यह फैसले न केवल ग्रामीण शिक्षा के स्तंभ माने जाने वाले शिक्षामित्रों के जीवन में स्थिरता लाएंगे, बल्कि युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण और प्रदेश के परिवहन ढांचे के आधुनिकीकरण का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।

 शिक्षामित्रों की मानदेय वृद्धि

उत्तर प्रदेश कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई है। इस कैबिनेट बैठक का सबसे संवेदनशील और स्वागत योग्य निर्णय शिक्षामित्रों के मानदेय में वृद्धि रहा है। लंबे समय से आर्थिक चुनौतियों और अनिश्चितता का सामना कर रहे लाखों शिक्षामित्रों के लिए ₹18,000 प्रति माह का मानदेय एक बड़ी राहत के रूप में उभरा है। अप्रैल 2026 से प्रभावी होने वाली यह वृद्धि न केवल उनकी मेहनत का सम्मान है, बल्कि प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था में उनके योगदान को नई ऊर्जा प्रदान करने वाला कदम भी है। शिक्षामित्रों का मानदेय ₹18,000 और अनुदेशकों का ₹17,000 करने का निर्णय लिया गया है, जो 1 मई से प्रभावी होगा। इस निर्णय का इंतजार लंबे समय से लाखों शिक्षामित्र कर रहे थे। अब 1,42,929 शिक्षामित्र और 24,717 अनुदेशक अपनी मेहनत का सही मुआवजा प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम शिक्षामित्रों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।

बस अड्डों का विकास

शिक्षा और तकनीक के साथ-साथ, प्रदेश के आर्थिक विकास के लिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना भी आवश्यक है। कैबिनेट द्वारा बस अड्डों के विकास और आधुनिकीकरण के लिए पीपीपी (PPP) मॉडल की नीति को मंजूरी देना, राज्य के सार्वजनिक परिवहन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस ये बस स्टेशन न केवल यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाएंगे, बल्कि व्यापार और पर्यटन को भी गति प्रदान करेंगे। कैबिनेट बैठक में पीपीपी मॉडल के तहत 49 नए बस अड्डों के निर्माण को मंजूरी मिली है। यह बस अड्डे पूरी तरह से आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे, और इससे राज्य के 52 जिलों में बेहतर परिवहन सेवाएं उपलब्ध होंगी। यात्रियों को नई और विश्वस्तरीय सुविधाएं मिलने की उम्मीद है, जो यात्रा को आसान और सुविधाजनक बनाएगी।

25 लाख टैबलेट का खरीद प्रस्ताव

शिक्षा के क्षेत्र में केवल मानवीय संसाधनों का सुदृढ़ीकरण ही काफी नहीं है, बल्कि डिजिटल युग की चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक का साथ होना भी अनिवार्य है। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए सरकार ने 25 लाख से अधिक युवाओं को टैबलेट वितरण करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह केवल एक उपकरण का वितरण नहीं है, बल्कि प्रदेश के मेधावी छात्रों के लिए ज्ञान के असीमित द्वार खोलने की एक चाबी है। ‘स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना’ के माध्यम से छात्र अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की पाठ्य सामग्री तक आसानी से पहुँच सकेंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में क्रांतिकारी सुधार होगा। जानकारी के अनुसार, स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत छात्रों को वितरित करने के लिए 25 लाख टैबलेट खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी मिली है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में अब तक 60 लाख स्मार्ट फोन और टैबलेट वितरित किए जा चुके हैं। नई खरीद से छात्रों के डिजिटल शिक्षा को और बढ़ावा मिलेगा।

स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना

उत्तर प्रदेश सरकार की स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत टैबलेट और स्मार्टफोन वितरण की प्रक्रिया पूरी तरह से शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से संचालित होती है, जिसमें छात्रों को किसी भी बाहरी वेबसाइट पर स्वयं अलग से पंजीकरण (Registration) करने की आवश्यकता नहीं होती है। सबसे पहले, राज्य के सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी कॉलेज, विश्वविद्यालय, आईटीआई (ITI) और पॉलिटेक्निक संस्थान अपने यहां नामांकित पात्र छात्रों का डेटा तैयार करते हैं और उसे सरकार के आधिकारिक डिजी शक्ति’ (Digi Shakti) पोर्टल पर अपलोड करते हैं। संस्थान द्वारा डेटा अपलोड करने के बाद, शासन स्तर पर छात्र की पात्रता (जैसे उत्तर प्रदेश का निवासी होना, वर्तमान में उच्च शिक्षा या कौशल विकास में अध्ययनरत होना और आय संबंधी शर्तों) की जांच और सत्यापन (Verification) किया जाता है।

यूं होगा टैबलेट आबंटन

एक बार छात्र का डेटा पोर्टल पर सत्यापित हो जाने के बाद, संबंधित छात्र को उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS के माध्यम से सूचना प्राप्त होती है। वितरण की अंतिम प्रक्रिया में, सरकार द्वारा जिलों को टैबलेट आवंटित किए जाते हैं, जिन्हें बाद में कॉलेजों में आयोजित विशेष वितरण समारोहों के माध्यम से छात्रों को सौंपा जाता है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपने कॉलेज के प्रशासनिक कार्यालय में अपना आधार कार्ड, मार्कशीट और सक्रिय मोबाइल नंबर अपडेट रखें ताकि उनका नाम लाभार्थी सूची में शामिल हो सके। किसी भी भ्रामक या फर्जी वेबसाइट पर पंजीकरण से बचें, क्योंकि यह प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और सीधे संस्थानों के माध्यम से ही पूरी की जाती है।

औद्योगिक विकास के लिए निवेश

कैबिनेट ने औद्योगिक विकास विभाग की हाई पावर कमेटी की संस्तुतियों को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के 9 जिलों में ₹15,189 करोड़ से अधिक के निवेश से 12 औद्योगिक इकाइयां स्थापित की जाएंगी। नए शोध और विकास टूल्स से प्रदेश में रोजगार के अवसर उत्पन्न होंगे। इस निवेश का उद्देश्य आर्थिक विकास और औद्योगिक वृद्धि को तेजी देना है।

नए औद्योगिक प्रस्ताव

इस बैठक में 6 नए औद्योगिक प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। इनमें शाहजहांपुर में एग्रो केमिकल्स के लिए 589 करोड़ का निवेश, गोरखपुर में एथेनाल उत्पादन के लिए 669 करोड़ का निवेश, और बुंदेलखंड में सोलर सेल मैन्युफैक्चरिंग के लिए 3805 करोड़ का निवेश शामिल है। ये निवेश प्रदेश की अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देंगे और कई युवा उद्यमियों को आगे बढ़ने का मौका प्रदान करेंगे।

मेडिकल कॉलेज की स्थापना

‘एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज’ योजना के तहत बलिया में एक नया मेडिकल कॉलेज खोला जाएगा। यह कॉलेज कारागार विभाग की जमीन पर स्थित होगा और इसका खर्च ₹437 करोड़ अनुमानित है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और स्थानीय निवासियों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं मिलेंगी। इसके साथ, यह प्रदेश में 82वां मेडिकल कॉलेज होगा।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले

कैबिनेट ने भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय विस्थापित हुए परिवारों को भारतीय नागरिकता के लिए भी प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इसके तहत, पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में लगभग 10,000 परिवारों को इसका लाभ मिलेगा। इसके अलावा, डॉ. अंबेडकर मूर्ति विकास योजना के तहत महापुरुषों की मूर्तियों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा।

डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प

उत्तर प्रदेश सरकार के ये निर्णय राज्य को ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ जोड़ने का ठोस प्रयास हैं। जहाँ एक ओर शिक्षामित्रों को सम्मान मिला है, वहीं दूसरी ओर युवाओं को तकनीक और प्रदेश को बेहतर कनेक्टिविटी का उपहार मिला है। यदि इन योजनाओं का क्रियान्वयन धरातल पर पारदर्शिता और तत्परता के साथ होता है, तो निश्चित रूप से उत्तर प्रदेश देश के विकास के इंजन के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा।

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