मुंबई में बीएमसी (BMC) चुनाव में वोटिंग बूथों को लेकर गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं। मतदान केंद्रों की जानकारी अपडेट न होने के कारण बड़ी संख्या में मतदाता भ्रमित और परेशान नजर आ रहे हैं। हालात ऐसे बन रहे हैं कि कई लोग बिना वोट डाले ही लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
वोटिंग बूथ के बाहर सूची लेकर खुद नाम ढूंढते दिखे मतदाता
BMC Elections 2026– मुंबई में बीएमसी चुनाव में वोटिंग बूथ व्यवस्था की अव्यवस्थाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा हालात यह हैं कि कई इलाकों में मतदाता मतदान केंद्र के बाहर लगी मतदाता सूची में खुद ही अपना नाम ढूंढते नजर आए। सही जानकारी और मदद के अभाव में आम लोगों को यह काम खुद करना पड़ रहा है। बीएमसी चुनाव में सामने आ रही वोटिंग बूथ और मतदाता सूची की गड़बड़ियों का सीधा और नकारात्मक असर मतदान प्रतिशत पर पड़ता दिख रहा है। चुनावी प्रक्रियाओं में अव्यवस्था केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए गंभीर चुनौती बन रही है।
बूथ के बाहर लगी सूची बनी सहारा
मतदाताओं का कहना है कि ऑनलाइन रिकॉर्ड और पुरानी पर्चियों में दिए गए बूथ नंबर मेल नहीं खा रहे, ऐसे में बूथ के बाहर चस्पा की गई कागजी सूची ही एकमात्र सहारा बन गई है। लोग धूप में खड़े होकर पन्ने पलट-पलटकर अपना नाम और क्रमांक खोजते दिखे।
बुजुर्ग और महिलाएं ज्यादा परेशान
इस अव्यवस्था का सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग, महिलाएं और पहली बार वोट डालने वाले मतदाताओं पर पड़ा है। कई बुजुर्ग मतदाता चश्मा लगाकर सूची पढ़ते दिखे, तो कुछ अपने परिजनों की मदद से नाम तलाशते रहे। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग और दिव्यांग मतदाताओं को उठानी पड़ रही है। कई इलाकों से ऐसी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां बुजुर्ग मतदाता एक बूथ से दूसरे बूथ तक भटकते रहे, लेकिन अंततः उनका नाम सूची में नहीं मिल सका। कुछ ने थक-हारकर वापस लौटने का फैसला किया
पुरानी पर्ची, नई हकीकत नहीं
मतदाताओं का कहना है कि पिछले विधानसभा चुनावों की वोटर पर्चियां और ऑनलाइन रिकॉर्ड अब भी अपडेट नहीं किए गए हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वही पुरानी जानकारी दिखाई दे रही है, जबकि जमीनी स्तर पर पोलिंग बूथ बदले जा चुके हैं।
एक नाम, दो मतदान केंद्र
चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ मामलों में एक ही मतदाता का नाम दो अलग-अलग पोलिंग बूथों की सूची में दर्ज पाया गया है। इससे न सिर्फ मतदाता भ्रमित हो रहे हैं, बल्कि बूथ लेवल अधिकारियों के सामने भी असमंजस की स्थिति बन रही है।
मदद के लिए कर्मचारी नदारद
कई मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की सहायता के लिए पर्याप्त कर्मचारी या स्वयंसेवक मौजूद नहीं थे। इससे लोगों को बूथ के बाहर ही समय बिताना पड़ा और कतारें लंबी होती चली गईं।
बिना वोट दिए लौट रहे लोग
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि स्पष्ट दिशा-निर्देशों और सही जानकारी के अभाव में कई मतदाता मतदान के अधिकार से वंचित हो रहे हैं। कतार में खड़े रहने, बार-बार बूथ बदलने और नाम न मिलने से हताश होकर कई लोग बिना वोट डाले घर लौट गए। मतदाताओं का कहना है कि सूची में नाम ढूंढने के बावजूद अंदर जाकर फिर से अलग जानकारी दी जा रही है, जिससे भ्रम और बढ़ रहा है। कुछ लोग बार-बार बूथ बदलने के बाद हतोत्साहित होकर बिना वोट डाले लौट गए।
प्रशासन पर उठे सवाल
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब चुनाव से पहले डिजिटल और भौतिक स्तर पर तैयारियों के दावे किए जाते हैं, तो फिर मतदाताओं को खुद अपनी पहचान और बूथ ढूंढने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है। स्थिति पर नजर बनाए हुए प्रशासन से मतदाता यही मांग कर रहे हैं कि सूची और बूथ जानकारी को तत्काल स्पष्ट और एकरूप किया जाए, ताकि लोकतंत्र के इस महापर्व में किसी का अधिकार न छूटे।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग
नागरिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने प्रशासन से मांग की है कि वोटर लिस्ट और पोलिंग बूथ की जानकारी तुरंत अपडेट की जाए। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों पर एक समान और स्पष्ट सूचना उपलब्ध कराई जाए। बुजुर्गों के लिए मदद डेस्क और विशेष व्यवस्था की जाए।
टर्नआउट में गिरावट का खतरा
चुनाव विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी स्थितियों में 2 से 5 प्रतिशत तक मतदान में गिरावट देखी जा सकती है। महानगरों में पहले से ही अपेक्षाकृत कम मतदान प्रतिशत रहता है, ऐसे में यह अव्यवस्था टर्नआउट को और नीचे धकेल सकती है। चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वोटर लिस्ट और पोलिंग बूथ की जानकारी दुरुस्त नहीं की गई, तो इसका सीधा असर मतदान प्रतिशत और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर पड़ेगा। मतदाता का भरोसा डगमगाना किसी भी चुनाव के लिए गंभीर संकेत माना जाता है।
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