Home हिन्दी फ़ोरम अविश्वास प्रस्ताव से किसका फायदा किसका नुकसान? – बस जोर आजमाइश

अविश्वास प्रस्ताव से किसका फायदा किसका नुकसान? – बस जोर आजमाइश

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No Confidence Motion
 
   
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर लोकसभा में बहस शुरू है लेकिन इस बहस के पहले देश में एक बहस शुरू हो गई कि आखिरकार इस अविश्वास प्रस्ताव से फायदा किसका है और नुकसान किसका, देश भर में आज सबकी निगाहें अविश्वास प्रस्ताव पर टिकी है, सब जानते है कि नरेंद्र मोदी की संसद में क्या स्तिथि है बावजूद इसके इस रस्सा कस्सी के क्या मायने है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह सुबह ट्वीट कर इसे और अहम बना दिया, अविश्वास प्रस्ताव पर बहस होने के पहले शुक्रवार सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा कि संसदीय लोकतंत्र के लिए आज का दिन अहम है जबपूरे देश की निगाहें संसद पर होंगी, उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “आज संसदीय लोकतंत्र के लिए अहम दिन है, मुझे यकीन है कि मेरे साथी सासंद इस मौके पर सुनिश्चित करेंगे कि रचनात्मक, व्यापक और व्यावधान रहित बहस हो, सारे भारतवर्ष की हम पर करीबी निगाह होगी.” जाहिर है पक्ष और विपक्ष दोनों ही पार्टियों के लिए आज संसद में बहस ख़ास होगी। विपक्ष पहले भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आई थी लेकिन उसे ख़ारिज कर दिया गया था, आख़िर तीन माह में ऐसा क्या हो गया कि नरेंद्र मोदी सरकार उस अविश्वास प्रस्ताव पर बहस को तैयार हो गई जो मार्च में ख़ारिज हो गई थी, और विपक्ष की रणनीति क्या है इस मुद्दे पर जबकि उसे मालूम है कि इस पर होने वाली वोटिंग के लिए नंबर उसके पक्ष में नहीं हैं।
सरकार और विपक्ष दोनों की कोशिश एक-दूसरे को घेरने की है। फिलहाल संसद में एक दूसरे की कमज़ोरियां गिनाकर संसदीय बहस में एक दूसरे को धवस्त करने की और अंत में उस संदेश को जनता के बीच पहुंचाने की कोशिश जारी है। मौजूदा बहस में नरेंद्र मोदी और उनके मंत्री अपने चार सालके काम-काज का लेखा-जोखा पेश कर रहे है वही कांग्रेस और विपक्ष सरकार को घेर रही है, इस बीच सदन में तीखी बहस भी जारी है। सरकार और विपक्ष के लिए एक बेहतर मौक़ा है, इसलिए क्योंकि ये याद रखने की ज़रूरत है कि आम चुनाव को क़रीब साल भर ही रह गया है साथ ही अगले कुछ महीनों में तीन बीजेपी शासित राज्यों – राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में भी चुनाव होने हैं।
हम आपको बता दें कि मोदी सरकार के ख़िलाफ़ ये पहला अविश्वास प्रस्ताव है, तेलुगू देशम पार्टी ने लोकसभा में सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था, इसका कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने समर्थन किया था, बुधवार को मॉनसून सत्र के पहले दिन संसद में मॉब लिंचिंग और दूसरे मुद्दों पर ज़ोरदार हंगामा हुआ, इसी बीच लोकसभा में सत्तारूढ़ एनडीए सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का नोटिस स्वीकार कर लिया गया। अब सवाल यह उठता है कि क्या मोदी सरकार के पास इस अविश्वास प्रस्ताव को विफल करने के लिए पर्याप्त नंबर हैं? इस अविश्वास प्रस्ताव से केंद्र सरकारको कोई ख़तरा तो नहीं है? वर्तमान में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 543 है, इनमें से 9 सीटें अभी खाली हैं, यानी इस वक्त लोकसभा के कुल 534 सांसद हैं, इस लिहाज से लोकसभा में साधारण बहुमत का आंकड़ा 534 का आधा 267+1 यानी 268 होता है।
फ़िलहाल लोकसभा में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी है, अकेले बीजेपी के पास 272 + 1 (लोकसभा अध्यक्ष) सांसद हैं और सहयोगी दलों को मिलाकर एनडीए गठबंधन के पास 311 सांसद हैं, इनमें शिवसेना के सांसद (18), एलजेपी (6), अकाली दल (4), आरएलएसपी (3), जेडीयू (2), अपना दल (2), एनआरकांग्रेस (1), पीएमके (1) और एनपीपी (1) हैं, अगर सहयोगी दलों को छोड़ भी दें तो बीजेपी अकेले अपने दम पर सदन में विश्वास मत हासिल कर लेगी,ऐसे में तकनीकी तौर पर देखा जाए तो सरकार को पेश होने वाले अविश्वास प्रस्ताव से कोई ख़तरा नहीं है। फिर ये जोर आजमाइश आखिर क्यों है।