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February 17, 2026

What is Great Nicobar Project? भारत के लिए इतना अहम तो क्यों विरोध में उठ रही आवाज?

The CSR Journal Magazine
What is Great Nicobar Project? ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसकी शुरुआत 2021 में हुई थी। इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 81,000 करोड़ रुपये है। इसका लक्ष्य ग्रेट निकोबार द्वीप के बड़े हिस्से में विकास करना है। यहां एक बड़ा बंदरगाह और एक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की योजना है, जिससे देश को वैश्विक व्यापार में मदद मिलेगी। इस परियोजना के तहत स्मार्ट सिटी बनाने का भी प्रस्ताव है। इसे नीति आयोग और अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह एकीकृत विकास निगम के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

What is Great Nicobar Project? क्या है इस जगह के मायने

ग्रेट निकोबार द्वीप की ताकत इसकी लोकेशन है। यह द्वीप इंडोनेशिया के करीब और हिंद महासागर के मुख्य मार्गों के पास स्थित है। यहां से समुद्र की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है, खासकर मलक्का जल डमरू मध्य के नजदीक होने के कारण। इस क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की बड़े पैमाने पर आवाजाही होती है, जो भारत की आर्थिक सेहत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यदि यहां मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाता है, तो भारत की समुद्री सुरक्षा भी मजबूत होगी।

सोनिया गांधी ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं

कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी ने इस प्रोजेक्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह परियोजना आदिवासी अधिकारों का उल्लंघन करती है, जिससे समुदाय की पहचान और जीवनशैली पर खतरा हो सकता है। उनके अनुसार, यहां पेड़ों की तीव्र कटाई की वजह से पर्यावरण पर भी गंभीर प्रभाव पड़ेगा। यह विकास की प्रक्रिया में आदिवासी जनजातियों की सुनवाई की कमी का भी संकेत देता है।

चीन की बढ़ती उपस्थिति का संदर्भ

भारत की चिंता का मुख्य कारण चीन की गतिविधियों का बढ़ना है, जो हिंद महासागर क्षेत्र में अपने सामरिक प्रभाव को बढ़ा रहा है। इससे भारत को ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट के माध्यम से इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। यह प्रोजेक्ट देश की सुरक्षा और संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

आदिवासी जनजातियों की सुरक्षा

ग्रेट निकोबार में विभिन्न आदिवासी जनजातियां निवास करती हैं, जिनमें शोम्पेन, ओंगे और निकोबारी शामिल हैं। यदि उनके पारंपरिक क्षेत्रों पर प्रभाव पड़ता है, तो उनकी सांस्कृतिक पहचान और जीवनशैली को खतरा हो सकता है। फॉरेस्ट राइट्स एक्ट, 2006 के अंतर्गत इन समुदायों के अधिकारों का खास ध्यान रखा गया है, लेकिन इस प्रोजेक्ट में इसकी अनदेखी की जा रही है।

What is Great Nicobar Project? पर्यावरण पर प्रभाव

इस परियोजना के तहत लाखों पेड़ों को काटने की चर्चा है, जो स्थानीय पारिस्थितिकी को प्रभावित कर सकता है। पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि इतनी बड़ी संख्या में पेड़ काटे गए, तो इससे पूरे क्षेत्र का पर्यावरण संतुलन बिगड़ सकता है। ग्रेट निकोबार में पाए जाने वाले कोरल रीफ भी समुद्री जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।

भूकंप और सुनामी का खतरा

ग्रेट निकोबार एक भूकंपीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र है। 2004 का भूकंप इसका बड़ा उदाहरण है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस क्षेत्र में भारी निर्माण कार्य करना सुरक्षित होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण कार्य से इस इलाके में प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है।
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