पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कल होने वाली सुनवाई से पहले 8,505 अधिकारियों की तैनाती पर सहमति जताई है। SIR (सोशल इनफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्ट) प्रक्रिया के तहत यह निर्णय लिया गया, जिसका विरोध तृणमूल कांग्रेस ने पहले किया था। चुनाव आयोग ने पिछले सुनवाई में अधिकारियों की कमी का मामले को उठाया था। SIR की प्रक्रिया पिछले साल नवंबर से चल रही है, लेकिन अब समय बढ़ाने की मांग पूरी नहीं हुई है।
आयोग की चिंताएँ और राज्य सरकार का जवाब
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सुनवाई से पहले ममता बनर्जी ने यह निर्णय लिया कि 8,505 B ग्रेड अधिकारी चुनाव आयोग को दिए जाएंगे। राज्य सचिवालय नबन्ना ने आयोग को लिखकर यह जानकारी दी। इस निर्णय से पहले, कई बार आयोग ने सरकार पर आरोप लगाया था कि पर्याप्त अधिकारी मुहैया नहीं कराए जा रहे हैं। ममता ने खुद पिछली सुनवाई में दलील दी थी कि अधिकारियों की कमी जिलों की संख्या पर निर्भर करती है।
ममता का मुक़ाबला और आरोप
वास्तव में, ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि वह सभी आवश्यक अधिकारी देने को तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चुनाव आयोग जानबूझकर पक्षपात कर रहा है। तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि चुनाव आयोग भाजपा की ओर से काम कर रहा है। यह मामला अब और अधिक गंभीर हो गया है, खासकर तब जब निर्वाचन आयोग ने सरकार पर अधिकारियों की कमी का आरोप लगाया।
ममता की रणनीति या मजबूरी?
सुप्रीम कोर्ट में कल होने वाली सुनवाई के मद्देनजर, राज्य सरकार द्वारा अधिकारियों की तैनाती को लेकर कई सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या यह कदम केवल अदालत में प्रश्नों से बचने के लिए है? भाजपा प्रवक्ता जगन्नाथ चटर्जी ने कहा कि आज अधिकारियों की तैनाती की घोषणा करना सरकार की अधूरी प्रक्रिया को स्वीकार करने जैसा है।
चुनाव से पहले की राजनीति
SIR प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक जंग और अधिक तंत्रिका बन गई है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह प्रक्रिया वास्तव में NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजेंस) का रूप है और भाजपा का चुनावी हथकंडा है। MAMTA बनर्जी और उनकी पार्टी लगातार चुनाव आयोग पर अनियमिता के आरोप लगाती रही हैं।
अगली सुनवाई का इंतजार
रविवार को सुप्रीम कोर्ट में SIR पर महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। ममता बनर्जी का यह कदम शायद एक बडा तीर हो सकता है, लेकिन विपक्ष के तमाम सवाल अब भी हैं। राज्य ने अधिकारी देने का निर्णय लिया है, लेकिन क्या यह निर्णय अंततः राजनीतिक लाभ के लिए है? समय ही बताएगा इस स्थिति का क्या होगा।