2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत में सरगर्मी तेज हो गई है। बीजेपी ने ‘मिशन 160’ (BJP Mission 160 for West Bengal Election) का लक्ष्य तय करते हुए 170 सीटों पर फोकस बढ़ाया है। पार्टी की रणनीति 2021 में रहे करीब 6.5% वोट अंतर को पाटने की है, जब उसे 38.15% वोट और 77 सीटें मिली थीं, जबकि तृणमूल कांग्रेस 44.91% वोट और 211 सीटों के साथ सत्ता में लौटी थी।
माइक्रो-मैनेजमेंट और बूथ स्ट्रक्चर पर जोर
बीजेपी 91 हजार से अधिक बूथों पर समितियां मजबूत करने, जिलावार वॉर-रूम बनाने और डेटा एनालिसिस के जरिए सीटवार रणनीति तैयार कर रही है। कम मार्जिन से हारी सीटों पर खास फोकस है। दूसरे राज्यों से ‘प्रवासी कार्यकर्ताओं’ की तैनाती कर मंडल स्तर तक संगठन को सक्रिय किया जा रहा है। चुनाव प्रबंधन में राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को संगठनात्मक समन्वय की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि भूपेंद्र यादव और बिप्लब देब उम्मीदवार चयन और चुनावी गणित पर काम कर रहे हैं।
नैरेटिव की लड़ाई: महिला सुरक्षा और रोजगार
बीजेपी महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और उद्योगों की कमी को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का मानना है कि 5-7% वोट स्विंग से सत्ता की तस्वीर बदल सकती है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी विकास और सामाजिक योजनाओं के सहारे फिर जीत का दावा कर रही है।
क्या बदलेगा बंगाल का समीकरण?
विश्लेषकों का मानना है कि 6-7% का वोट स्विंग आसान नहीं, लेकिन आक्रामक संगठनात्मक रणनीति मुकाबले को रोचक बना सकती है। 2026 का चुनाव सिर्फ सीटों की जंग नहीं, बल्कि नैरेटिव और जमीनी पकड़ की परीक्षा भी होगा क्या ‘मिशन 160’ ममता के किले में सेंध लगा पाएगा, यही बड़ा सवाल है।
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