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March 25, 2026

पश्चिम बंगाल में 60 लाख मतदाताओं की स्थिति अधर में, पूरक सूची ने बढ़ाई चुनावी चिंता

The CSR Journal Magazine
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले करीब 60 लाख मतदाताओं की पात्रता पर सवाल खड़े हो गए हैं। ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ के तहत रखे गए इन नामों को लेकर भ्रम और चिंता का माहौल है, जबकि पूरक मतदाता सूची जारी होने के बाद भी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है।

‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ ने बढ़ाई अनिश्चितता

चुनाव से ठीक एक महीने पहले राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं की स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान करीब 60 लाख मतदाताओं को ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ यानी जांच के अधीन रखा गया। यह कुल मतदाताओं का लगभग 8.5% हिस्सा है।
हालांकि पूरक मतदाता सूची जारी कर दी गई है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने नामों को अंतिम सूची में शामिल किया गया और कितनों को हटा दिया गया। इस अस्पष्टता ने मतदाताओं के बीच असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है।

पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़े बदलाव

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की शुरुआत पिछले साल 27 अक्टूबर को हुई थी, जो 28 फरवरी को समाप्त हुई। इस दौरान मृत, डुप्लीकेट, स्थानांतरित और अयोग्य मतदाताओं को सूची से हटाया गया।
इस प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 6.44 करोड़ रह गई। करीब 61 लाख नामों को निश्चित रूप से हटाया गया, जबकि 60 लाख से अधिक मामलों को जांच के लिए लंबित रखा गया।
इन लंबित मामलों को निपटाने के लिए 700 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन अभी तक सभी मामलों का निपटारा नहीं हो पाया है।

मतदाता ऐसे जांच सकते हैं अपनी स्थिति

जिन मतदाताओं के नाम ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ में हैं, वे अपनी स्थिति ऑनलाइन जांच सकते हैं। वे चुनाव आयोग की वेबसाइट पर जाकर मतदान केंद्र के अनुसार पूरक सूची डाउनलोड कर सकते हैं या हटाए गए नामों की सूची में अपना नाम खोज सकते हैं।
यदि किसी मतदाता का मामला निपट जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उसका नाम सूची में जरूर जुड़ जाएगा। निपटारे के बाद नाम या तो योग्य मतदाताओं की सूची में जोड़ा जाता है या अयोग्य घोषित कर हटा दिया जाता है।
इसके अलावा, मतदाता आयोग के फैसले के खिलाफ ऑनलाइन या जिला प्रशासन के माध्यम से ऑफलाइन अपील भी कर सकते हैं।

चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है असर?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई सीटों पर जीत का अंतर बेहद कम रहा है। 2021 के विधानसभा चुनाव में दिनहाटा सीट पर केवल 57 वोटों का अंतर था, जबकि नंदीग्राम में मुकाबला करीब 1956 वोटों से तय हुआ था।
ऐसे में बड़ी संख्या में मतदाताओं का ‘अंडर एडज्यूडिकेशन’ में होना चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल हटाए गए मतदाताओं की संख्या के आधार पर नतीजों का अनुमान लगाना सही नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी परिणामों पर भ्रष्टाचार, संगठनात्मक ताकत, स्थानीय मुद्दे और सांप्रदायिक समीकरण जैसे कई अन्य कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पश्चिम बंगाल में 60 लाख मतदाताओं की स्थिति को लेकर बनी अनिश्चितता चुनावी माहौल को प्रभावित कर रही है। पूरक सूची जारी होने के बावजूद पारदर्शिता की कमी से मतदाताओं में भ्रम बना हुआ है। आने वाले दिनों में इन मामलों के निपटारे और अपील प्रक्रिया पर ही यह तय होगा कि चुनावी तस्वीर किस दिशा में जाएगी।

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