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February 5, 2026

वोटर लिस्ट पर सियासी संग्राम संसद में कमल हासन की चेतावनी, सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की तीखी लड़ाई

The CSR Journal Magazine
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर राज्यसभा में अभिनेता-राजनेता कमल हासन ने बिहार का हवाला देते हुए लोकतंत्र पर खतरे की चेतावनी दी, तो दूसरी ओर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ख़ुद सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।

संसद में कमल हासन का तीखा हमला

राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान मक्कल निधि मय्यम के संस्थापक कमल हासन ने एसआईआर प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला।
उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार ही संदेह के घेरे में लाया जा रहा है। नाम, पते और वर्तनी की मामूली ग़लतियों के आधार पर मतदाताओं की जांच की जा रही है, जिससे लोकतंत्र की बुनियाद हिल रही है। हासन ने चेतावनी देते हुए कहा, “बिहार कई ज़िंदा मुर्दों की भूमि बन गया है और हम नहीं चाहते कि यह बीमारी पूरे देश में फैले।” उनका इशारा उन रिपोर्ट्स की ओर था, जिनमें कहा गया था कि बिहार में ज़िंदा मतदाताओं को मृत बताकर वोटर लिस्ट से बाहर कर दिया गया।

‘जीवित मृतकों’ का खतरा और तमिलनाडु की आशंका

कमल हासन ने एसआईआर को “जीवित मृतकों की स्पेल-चेक कहानी” बताते हुए कहा कि प्रशासनिक लापरवाही को अयोग्यता बना दिया गया है।
उन्होंने आगाह किया कि अगर यही प्रक्रिया तमिलनाडु तक पहुंची, तो वहां काग़ज़ों पर लगभग एक करोड़ “जीवित मृतक” खड़े हो सकते हैं। हासन ने कहा कि जिन नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं, उन्हें फिर से मताधिकार दिया जाना चाहिए। अन्यथा, जो भी चुनावी जीत होगी, वह “अधपकी और अवैध” मानी जाएगी। विपक्षी सांसदों ने उनके भाषण का ज़ोरदार समर्थन किया।

‘लोकतंत्र सिर्फ़ जीत का नाम नहीं’

अपने भाषण में कमल हासन ने लोकतंत्र की व्यापक परिभाषा पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र का मतलब केवल चुनाव जीतना नहीं है, बल्कि लोगों के अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने सरकारों की स्थायित्व की अवधारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी सरकार अमर नहीं होती और न ही होनी चाहिए। हासन ने अपने सिनेमा से राजनीति तक के सफ़र का ज़िक्र करते हुए तमिल पहचान, भाषा और अधिकारों पर हमले के ख़िलाफ़ खड़े रहने की सीख को याद किया, जो उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री सी. एन. अन्नादुरई जैसे नेताओं से मिली।

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी की सीधी दलील

इसी दिन पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत हैसियत में याचिका दाख़िल की।
उन्होंने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम बंगाल को निशाना बना रहा है और वहां के लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। अदालत में ममता ने कहा कि बंगाली से अंग्रेज़ी में नामों के अनुवाद के दौरान हुई मामूली ग़लतियों के आधार पर आम नागरिकों को वोटर लिस्ट से बाहर किया जा रहा है।
उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा, “दरवाज़े के पीछे न्याय रो रहा है।”

‘इतनी जल्दी क्यों?’ और आयोग पर गंभीर आरोप

ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि जिस प्रक्रिया में आमतौर पर दो साल लगते हैं, उसे केवल तीन महीने में पूरा करने की इतनी जल्दी क्यों थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले सिर्फ़ बंगाल को निशाना बनाया गया, जबकि असम और पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में ऐसा क्यों नहीं किया गया। ममता ने चुनाव आयोग को “व्हाट्सऐप आयोग” तक कह दिया और दावा किया कि एसआईआर केवल नाम हटाने की प्रक्रिया बन गई है, जोड़ने की नहीं।
सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर निर्वाचन आयोग को नोटिस जारी किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्तनी जैसी छोटी ग़लतियों पर ज़्यादा संवेदनशीलता बरती जाए।
संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक एसआईआर का मुद्दा लोकतंत्र और मताधिकार की मूल भावना से जुड़ता दिख रहा है। कमल हासन और ममता बनर्जी दोनों के आरोपों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि कहीं प्रशासनिक प्रक्रिया के नाम पर नागरिकों के सबसे बुनियादी अधिकार पर चोट तो नहीं की जा रही। अब सबकी निगाहें अदालत के फ़ैसले और चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं।

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