राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज कथित धोखाधड़ी मामले में बॉलीवुड फिल्ममेकर विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी भट्ट को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने दोनों को नियमित जमानत दे दी है। इस मामले में दंपति पर वित्तीय अनियमितता, धन के दुरुपयोग और रकम की हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से उन्हें जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान राहत मिली है।
क्या है मामला?
मामले की शुरुआत राजस्थान के एक शिकायतकर्ता की शिकायत से हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि एक फिल्म के नाम पर उससे बड़ी रकम ली गई, लेकिन बाद में उस पैसे का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। शिकायत के आधार पर राजस्थान पुलिस ने एफआईआर दर्ज की और मामले की जांच शुरू कर दी।
एफआईआर के बाद पुलिस ने की त्वरित कार्रवाई
शिकायत के बाद राजस्थान पुलिस ने इसे गंभीर मानते हुए तेजी से कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार, मामला वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा था, इसलिए इसे प्राथमिकता के आधार पर जांच में लिया गया। जैसे ही विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी के खिलाफ गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई, दोनों ने कानूनी संरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान विक्रम भट्ट और श्वेतांबरी भट्ट ने अपने खिलाफ किसी भी तरह की सख्त कार्रवाई से बचाव की मांग की। दंपति ने कहा कि वे जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं और उन्हें गिरफ्तार करने की आवश्यकता नहीं है।
पहले मिली थी अंतरिम जमानत
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने श्वेतांबरी भट्ट को अंतरिम जमानत दी थी। इसके बाद दोनों ने नियमित जमानत के लिए आवेदन किया ताकि उन्हें जांच और ट्रायल के दौरान स्थायी कानूनी सुरक्षा मिल सके।
नियमित जमानत मिलने के बाद भी शर्तें लागू
सुप्रीम कोर्ट ने नियमित जमानत देते हुए दंपति पर कुछ शर्तें भी लगाई हैं। अदालत के अनुसार:
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उन्हें जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग करना होगा।
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वे किसी भी गवाह को प्रभावित नहीं कर सकेंगे।
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जांच में बाधा डालने की कोशिश नहीं कर सकेंगे।
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बिना अनुमति यात्रा करने पर रोक रहेगी।

