बुझ गया घर का इकलौता चिराग
वाराणसी में एक कॉलेज के छात्र सूर्य प्रताप सिंह की हत्या ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। मृतक के पिता भावुक होकर पोस्टमॉर्टम हाउस पर रो पड़े। उन्होंने बताया कि सूर्य प्रताप अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था, और उसकी हत्या से परिवार में दुख है। मृतक के पिता ने कहा कि जब तक आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक वे अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई कि इस मामले में जल्दी से जल्दी कार्यवाही की जाए। परिवार का यह भी कहना है कि न्याय मिलना चाहिए ताकि भविष्य में कोई और ऐसा न हो।
पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
हनुमानगंज थाना क्षेत्र की पुलिस ने घटना के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है। सूर्य की हत्या के आरोपी मंजीत को घटना के बाद छह घंटे में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन मृतक के पिता ने सवाल उठाया कि जब तक अपराधी का एनकाउंटर नहीं किया जाता , तब तक उनका विश्वास पुलिस पर नहीं रहेगा। घटना के स्थल पर भी पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है।
कॉलेज में हुआ दिनदहाड़े निर्मम हत्याकांड
यूपी कॉलेज में क्लासरूम के सामने छात्र सूर्य प्रताप सिंह (23 वर्ष) की शुक्रवार सुबह 11 बजे सीने और सिर में गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या का आरोपी मंजीत चौहान (24 वर्ष) यूपी कॉलेज का ही बीए सेकंड ईयर का छात्र है। जबकि मृतक सूर्य प्रताप बीएससी मैथ्स फोर्थ सेमेस्टर में था। मंजीत शर्ट की बांह मोड़कर कॉलेज आया था, जिस पर सूर्य प्रताप से उसकी बहस हुई थी। मंजीत की शिकायत पर प्राचार्य ने सूर्य प्रताप को बुलाकर डांटा था। इसी घटनाक्रम के कुछ देर बाद मंजीत ने सामाजिक विज्ञान संकाय के क्लासरूम के सामने सूर्य प्रताप को गोली मार दी। सात राउंड फायरिंग के बाद आरोपी मंजीत चौहान बरामदे में पिस्टल फेंककर भाग निकला। जिसे छह घंटे बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। सूर्य प्रताप सिंह के सिर और सीने में 4 गोलियां लगीं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
कमर में पिस्टल खोंसकर कैंपस में आया था आरोपी
गाजीपुर के रामपुरमांझा थाना के दुबईठा गांव निवासी सूर्य प्रताप सिंह यूपी कॉलेज में बीएससी का छात्र था। शुक्रवार को यूपी कॉलेज में चल रही परीक्षा के बीच हत्या की नीयत से मंजीत चौहान कमर में पिस्टल खोंसकर कैंपस में दाखिल हुआ। उसकी कहीं चेकिंग नहीं की गई। प्रशासनिक भवन के बाहर लगभग 11 बजे सूर्य और मंजीत का आमना-सामना हुआ।
प्रोफेसर ने हाथ-पैर जोड़े फिर भी नहीं पसीजा आरोपी का दिल
गाली-गलौज हुई तभी दौरान सामाजिक विज्ञान संकाय के कमरा नंबर-11 के बाहर एक प्रोफेसर के सामने मंजीत ने सूर्य प्रताप को गोली मार दी। सूर्य की जान बचाने के लिए एक प्रोफेसर ने मंजीत के हाथ-पैर जोड़े, लेकिन उसका दिल नहीं पसीजा। उसके सिर पर मानो खून सवार था। ताबड़तोड़ सीने में दो गोलियां मारने के बाद मंजीत ने देखा कि औंधे मुंह फर्श पर गिरे सूर्य की धड़कन चल रही है, तो उसने दोबारा कनपटी के पास सटाकर गोली मार दी। यह सुनिश्चित करने के बाद कि सूर्य की मौत हो चुकी है, मंजीत ने बरामदे के बाहर कूड़े के ढेर में पिस्टल फेंकी और सामाजिक विज्ञान संकाय की पहली मंजिल की छत से कूदकर फरार हो गया।
दोनों के बीच पहले से थी रंजिश
एलआईयू और क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि सूर्य और मंजीत दोनों कैंपस के बाहर रहते थे। सूर्य प्रताप की हॉस्टल के छात्रों में अच्छी पैठ थी और वह अधिकतर समय वहीं बिताता था, जबकि मंजीत बाहरी लड़कों के साथ कैंपस में आता-जाता था। मंजीत हाथ में कड़ा पहनकर आता था, जिस पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड ने उसे कई बार चेतावनी दी थी। दोनों के बीच पहले से रंजिश थी।
वारदात को लेकर परिजनों में गम और आक्रोश
पोस्टमार्टम हाउस में जब पिता ऋषिदेव बेटे का शव देखने पहुंचे तो वह खुद को संभाल नहीं पाए और बेसुध हो गए। बेटे की मौत उन्होंने कहा कि जब तक आरोपी का एनकाउंटर नहीं होगा, तब तक वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पिता के इस बयान के बाद माहौल और ज्यादा भावुक हो गया। परिजन और स्थानीय लोग भी वारदात को लेकर आक्रोशित नजर आए। काफी जद्दोजहद के बाद परिजन शव को अपने शिवपुर स्थित आवास ले गए, जहां भारी संख्या में लोग जुटे रहे। परिवार शव को हरिश्चंद्र घाट ले जाने की तैयारी में था, लेकिन पिता ने इनकार कर दिया। हालांकि आधी रात 12.30 बजे सूर्य प्रताप का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामले में तेजी से कार्रवाई की जा रही है और दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी।
सामाजिक मीडिया पर उठी आवाजें

