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January 7, 2026

2027 के कुंभ से पहले हरिद्वार में बड़ा विवाद! क्या कुंभ क्षेत्र से गैर-हिंदुओं की होगी छुट्टी? 1935 के कानून को लेकर सीएम धामी से मांग

The CSR Journal Magazine
2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले से पहले हिंदू संगठनों ने एक बड़ा मुद्दा उठा दिया है। संगठनों ने मांग की है कि पूरे कुंभ मेला क्षेत्र को “पूर्ण हिंदू क्षेत्र” घोषित किया जाए और यहां गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाई जाए। इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कई बार मुलाकात की जा चुकी है। संगठनों का कहना है कि कुंभ जैसे पवित्र आयोजन की शुद्धता और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए यह कदम जरूरी हो गया है।

1935 के श्री गंगा सभा एक्ट का हवाला

हिंदू संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में श्री गंगा सभा के वर्ष 1935 के एक्ट का हवाला दिया है। इस एक्ट के अनुसार हर की पैड़ी, कुशावर्त घाट सहित कुंभ क्षेत्र में मांस की बिक्री और अहिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध का प्रावधान था। श्री गंगा सभा का कहना है कि यह नियम अंग्रेजी शासनकाल में भी लागू था और करीब 100 वर्षों तक इसका पालन किया गया, जिससे तीर्थ क्षेत्र की धार्मिक मर्यादा बनी रही।

बढ़ती घुसपैठ और विवादों पर चिंता

संगठनों के अनुसार मौजूदा हालात पहले से कहीं अधिक चिंताजनक हैं। उनका कहना है कि देशभर में धार्मिक विवाद, कथित लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। साथ ही बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार और रोहिंग्या व बांग्लादेशी घुसपैठ ने सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन वाले कुंभ मेले में किसी भी तरह की अव्यवस्था या अशांति को रोकना जरूरी है।

‘हिंदू क्षेत्र घोषित करना सुरक्षा के लिए जरूरी’

श्री गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम का कहना है कि पहले लाखों श्रद्धालु कुंभ में आते थे, लेकिन अब संख्या करोड़ों में पहुंच गई है। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान डालने की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि यदि पूरे कुंभ मेला क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित किया जाए तो श्रद्धालुओं को सुरक्षित और शांत वातावरण मिल सकेगा, जिससे वे स्नान, ध्यान और पूजन बिना किसी बाधा के कर सकें।

पुराने नियमों को फिर से लागू करने की मांग

नितिन गौतम ने बताया कि 1935 के म्युनिसिपल बायलॉज के तहत हर की पैड़ी और कुशावर्त घाट में अहिंदुओं का प्रवेश वर्जित था। ये नियम स्थानीय धार्मिक मान्यताओं और तीर्थ समाज की सहमति से बनाए गए थे। उनका कहना है कि यदि 100 वर्ष पहले इन नियमों की आवश्यकता थी, तो आज के हालात में इनकी जरूरत और भी अधिक है। उन्होंने मांग की कि पुराने बायलॉज को मजबूत कानून का रूप दिया जाए।

प्रयागराज कुंभ मॉडल लागू करने की अपील

इस मुद्दे पर तीर्थ पुरोहित उज्ज्वल पंड्या ने भी सरकार से प्रयागराज के कुंभ मेले जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि वहां किसी भी स्टॉल, यज्ञशाला या कथा मंडप का कार्य गैर-हिंदुओं से नहीं कराया गया। हरिद्वार में भी सभी धार्मिक कार्य हिंदू कारीगरों और सेवकों से ही कराए जाएं, ताकि आस्था से जुड़े आयोजनों में किसी तरह का हस्तक्षेप न हो।

सीएम धामी से उम्मीद

हिंदू संगठनों और तीर्थ पुरोहितों को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से काफी उम्मीदें हैं। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री पहले भी अवैध मजारों और अतिक्रमण के खिलाफ सख्त कदम उठा चुके हैं। ऐसे में कुंभ क्षेत्र को हिंदू क्षेत्र घोषित करने की मांग पर भी सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। संगठनों का मानना है कि यह निर्णय न केवल अर्धकुंभ 2027 को शांतिपूर्ण बनाएगा, बल्कि आने वाले वर्षों तक सनातन परंपराओं की रक्षा करेगा।
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