Uttarakhand: बनभूलपुरा के लोग बोले- पहली बार ईद फीकी, घर छिनने के डर के बीच रौनक गायब

The CSR Journal Magazine
रमजान के अंत में जहां आमतौर पर खुशियों का माहौल होता है, वहीं बनभूलपुरा के निवासी इस बार ईद को फीका महसूस कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार रेलवे भूमि को खाली कराने की तैयारी के कारण लगभग 27 हजार लोगों के लिए अपने घरों को खोने का खतरा मंडरा रहा है। जब दैनिक भास्कर की टीम ने ग्राउंड जीरो पर स्थिति को जानने की कोशिश की, तो बनभूलपुरा की तंग गलियों में दो भिन्न तस्वीरें सामने आईं। रमजान के तहत घर-घर में सेवइयां बन रही हैं, बाजारों में खरीदारी हो रही है, और बच्चे ईद को लेकर उत्साहित हैं। लेकिन इन सबके बीच, लोगों के बीच डर, अनिश्चितता, और बेचैनी का माहौल भी साफ देखा जा सकता है।

डर के साए में ईद का जश्न

जिला प्रशासन और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण 20 मार्च से इलाके में कैंप लगाकर कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन के अनुसार, लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत विस्थापन करने का आश्वासन दिया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें इस बात पर भरोसा नहीं है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि ईद की तैयारियां तो चल रही हैं, लेकिन दिल में यह डर बैठा हुआ है कि त्योहार के बाद उनके पास अपना घर रहेगा या नहीं। कई परिवारों का कहना है कि वे पीढ़ियों से यहां रह रहे हैं, और उनका सब कुछ इसी इलाके में जुड़ा हुआ है।

आर्थिक चिंता और रोजगार का संकट

इस साल की ईद-उल-फितर 30 या 31 मार्च को चाँद के अनुसार मनाई जाएगी। आमतौर पर यह त्योहार खुशी एवं मेल-मिलाप का प्रतीक होता है, लेकिन बनभूलपुरा में इस बार लोग चिंता के साए में त्योहार की तैयारी कर रहे हैं। प्रशासन द्वारा प्रस्तावित पुनर्वास योजना कागजों में तो है, लेकिन लोगों के मन में कई सवाल हैं कि नया घर कब और कहाँ मिलेगा, और तब तक वे कहाँ रहेंगे। छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों को रोज़गार खत्म होने का भय सता रहा है, जिससे अनिश्चितता का माहौल और बढ़ गया है।

भविष्य का डर: नींद उड़ी

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हुई है। रातों की नींद गायब हो गई है, दिनभर चिंता बनी रहती है, और बच्चों के भविष्य को लेकर डर सताता है। एक बुजुर्ग ने कहा, “ईद तो हर साल आती है, लेकिन ऐसा पहली बार है कि खुश होने की हिम्मत नहीं हो रही।” उनकी बातों में गहरी चिंता और निराशा साफ झलकती है। इसबार ईद की खुशियों में सन्नाटा छाया हुआ है जिससे निवासी चिंतित और परेशान हैं।
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