इस समय उत्तराखंड की राजनीति में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने का निर्णय चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन मुफ्ती शमून कासमी ने कहा है कि यह निर्णय किसी तुष्टिकरण के बजाय संतुष्टिकरण के नजरिए से लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यह निर्णय लिया है ताकि सभी समुदायों के बच्चे मुख्यधारा की शिक्षा का लाभ उठा सकें। कासमी ने इस फैसले को सराहते हुए कहा कि इससे बच्चे डॉक्टर, इंजीनियर और आईएएस-आईपीएस जैसे पेशेवर बनने की दिशा में बढ़ सकेंगे।
मदरसा बोर्ड का अस्तित्व खत्म
सीएम धामी के ऐलान के बाद, उत्तराखंड में ‘मदरसा बोर्ड’ का नाम अब इतिहास बन गया है। जुलाई सत्र से सभी मदरसों को उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के तहत लाया जाएगा। इस फैसले से उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया है, जिसने मदरसा बोर्ड को समाप्त किया। यह कदम शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है और इससे बच्चों को बेहतर भविष्य सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
बच्चों को मिलेगी मुख्यधारा की शिक्षा
कासमी ने कहा कि पहले मदरसा बोर्ड के छात्रों के प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं मिलती थी। अब जब वे राज्य बोर्ड से संबद्ध होंगे, तो उन्हें व्यापक मान्यता मिलेगी। इससे बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का एक नया प्लेटफॉर्म मिलेगा और वे मेनस्ट्रीम की शिक्षा का हिस्सा बन सकेंगे। यह कदम मुसलमान समुदाय के लिए भी सकारात्मक बदलाव होगा, क्योंकि इससे उनके बच्चों को बेहतर अवसर मिलेंगे।
सबका साथ, सबका विकास
मुफ्ती कासमी ने कहा कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन जैसे सभी अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे एक ही प्राधिकरण के तहत आ जाएंगे। यह निर्णय सामाजिक समरसता की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ सभी को समान रूप से मिलेगा।
धार्मिक शिक्षा का महत्व बरकरार
मदरसा बोर्ड खत्म होने के बावजूद, कासमी ने आश्वासन दिया कि धार्मिक शिक्षा जारी रहेगी। मदरसों में पढ़ाई करने वाले करीब 50,000 बच्चों को आधुनिक और धार्मिक शिक्षा एक साथ मिलती रहेगी। उनका ‘राइट टू एजुकेशन’ सुरक्षित रहेगा, जिससे वे भविष्य में बेहतर स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं का लाभ ले सकेंगे।
समान शिक्षा का लक्ष्य
कासमी ने इस फैसले को समान शिक्षा के लक्ष्य की ओर एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में उत्तराखंड एक मॉडल बनकर उभरेगा, जिसे अन्य राज्य अनुसरण करेंगे। इस बदलाव के बाद सभी समुदायों के बच्चों को बराबरी का मौका मिलेगा, जो समाज में समरसता को बढ़ावा देगा।
मुख्यमंत्री के अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
मुख्यमंत्री धामी के अन्य निर्णय जैसे नकल विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता (UCC) भी समाज में समानता की दिशा में अहम कदम हैं। कासमी ने कहा कि यह कदम समाज के विकास में सहायक होंगे और सभी वर्गों को आगे बढ़ने का अवसर देंगे। इन बदलावों से समाज में हर्ष और संतोष का माहौल बनेगा।