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March 8, 2026

ट्रेन में आग लगने से पहले ही बज जाएगा अलर्ट: छात्रों की ‘रेलसेंस’ डिवाइस से बढ़ेगी रेलवे सुरक्षा

The CSR Journal Magazine
उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर स्थित Rajkiya Engineering College Ambedkar Nagar के छात्रों ने रेलवे सुरक्षा से जुड़ी एक महत्वपूर्ण तकनीक विकसित की है। ‘रेलसेंस’ नाम की यह डिवाइस ट्रेन के पहियों में होने वाली असामान्य गर्मी और घर्षण का पता लगाकर समय रहते चालक को सतर्क कर सकती है।
अक्सर देखा गया है कि ट्रेन के पहिए जाम हो जाने या ब्रेक के पहिए से चिपक जाने पर घर्षण बढ़ जाता है। इससे पहियों से धुआं निकलने लगता है और कई बार आग लगने जैसी खतरनाक स्थिति पैदा हो जाती है। छात्रों द्वारा विकसित यह नई तकनीक ऐसे ही संभावित हादसों को पहले ही पहचानकर उन्हें रोकने में मदद करेगी।

कैसे काम करती है ‘रेलसेंस’ डिवाइस

रेलसेंस डिवाइस को दो हिस्सों में डिजाइन किया गया है। इसका पहला हिस्सा ट्रेन के प्रत्येक पहिए में लगाया जाएगा, जबकि दूसरा हिस्सा इंजन में चालक के सामने स्थापित होगा।
पहिए में लगा सेंसर लगातार सक्रिय रहेगा और पहिए के तापमान की जानकारी इंजन में लगी रीडिंग डिवाइस तक भेजता रहेगा। तापमान के आधार पर यह डिवाइस तीन तरह के संकेत देती है।
  • हरी लाइट: जब तापमान सामान्य हो
  • नीली लाइट: जब तापमान सामान्य से अधिक हो
  • लाल लाइट: जब तापमान 80 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच जाए
लाल संकेत मिलते ही चालक को संभावित खतरे की जानकारी मिल जाएगी और वह तुरंत ट्रेन की गति कम कर सकता है या ट्रेन को रोक सकता है।

 हादसों को रोकने में मिलेगी बड़ी मदद

ट्रेन के पहिए जाम होने या ब्रेक चिपकने से पैदा होने वाले घर्षण के कारण कई बार धुआं निकलता है और आग लगने की आशंका बढ़ जाती है। रेलसेंस डिवाइस समय रहते ऐसी स्थिति का संकेत दे देगी।
इस तकनीक की खास बात यह है कि यह यह भी बताएगी कि ट्रेन के किस डिब्बे और किस पहिए में समस्या पैदा हुई है। इससे चालक और रेलकर्मियों को खराबी ढूंढने में समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा और तुरंत समाधान किया जा सकेगा।

रेलवे में ट्रायल की तैयारी

इस डिवाइस को कॉलेज के नवसंचार इनक्यूवेशन एंड सेंटर फॉर एंटरप्रेन्योरशिप फाउंडेशन (ICABN) में विकसित किया गया है। परियोजना को स्टार्टअप के रूप में Indian Institute of Information Technology Allahabad से लगभग दो लाख रुपये का वित्तीय सहयोग मिला है।
एक रेलसेंस डिवाइस को तैयार करने में लगभग दस हजार रुपये का खर्च आता है। अब पूर्वोत्तर रेलवे ने इसके ट्रायल के लिए डिवाइस मंगाई है और समन्वय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

छात्रों की टीम ने किया नेतृत्व

इस नवाचार परियोजना का नेतृत्व छात्रा खुशी सिंह ने किया। उनकी टीम में संस्कृति सिंह, माही गुप्ता, आकृति तिवारी और अभिषेक यादव शामिल रहे।
कॉलेज प्रशासन का मानना है कि यदि रेलवे में इस तकनीक का सफल परीक्षण हो जाता है तो भविष्य में ट्रेनों में आग लगने की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा
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