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January 30, 2026

Yamuna को बचाने का मास्टरप्लान: गंगा और मुनक नहर से आएगा पानी, क्या Delhi की ‘मरती नदी’ फिर से जिएगी?

The CSR Journal Magazine
दिल्ली की यमुना नदी लंबे समय से प्रदूषण, गंदगी और घटते जल स्तर की मार झेल रही है। जहरीली झाग, काला पानी और बदबू यमुना की पहचान बन चुकी है। लेकिन अब केंद्र सरकार ने यमुना को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। इस योजना के तहत गंगा और मुनक नहर से अतिरिक्त पानी यमुना में मोड़ा जा रहा है, ताकि नदी में बहाव बढ़े और प्रदूषण को कम किया जा सके।

यमुना में गंगा और मुनक नहर का पानी क्यों जरूरी?

केंद्र सरकार का मानना है कि यमुना की सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी है। जब नदी में पर्याप्त बहाव नहीं होता, तो उसमें गिरने वाला सीवेज और कचरा पतला नहीं हो पाता और प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। गंगा और मुनक नहर से पानी लाकर यमुना में न्यूनतम पर्यावरणीय प्रवाह बनाए रखने की कोशिश की जा रही है, जिससे नदी खुद को साफ करने की क्षमता फिर से हासिल कर सके।

गंगा से कितना पानी आएगा यमुना में?

योजना के अनुसार उत्तर प्रदेश की ऊपरी गंगा नहर से करीब 800 क्यूसेक पानी यमुना में छोड़ा जाएगा। यह पानी सीधे वजीराबाद बैराज के माध्यम से यमुना में पहुंचेगा। इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में यमुना का जल स्तर बढ़ेगा और बहाव तेज होगा, जिससे प्रदूषित पानी आगे की ओर बह सकेगा।

मुनक नहर से कैसे मिलेगा यमुना को सहारा?

हरियाणा की मुनक नहर से भी लगभग 100 क्यूसेक पानी यमुना में मिलाया जाएगा। यह अतिरिक्त पानी यमुना के सूखे हिस्सों में जान फूंकेगा और नदी में न्यूनतम आवश्यक प्रवाह को बनाए रखने में मदद करेगा। मुनक नहर से मिलने वाला यह पानी दिल्ली में यमुना की हालत सुधारने में अहम भूमिका निभा सकता है।

क्या है पर्यावरणीय प्रवाह और क्यों है जरूरी?

पर्यावरणीय प्रवाह का मतलब है नदी के जीवित रहने के लिए जरूरी पानी की न्यूनतम मात्रा। अगर नदी में इतना पानी लगातार बहता रहे, तो उसका इकोसिस्टम बना रहता है। इससे मछलियां, जलीय जीव और प्राकृतिक सफाई प्रक्रिया प्रभावित नहीं होती। यमुना में पर्यावरणीय प्रवाह बढ़ाने से प्रदूषण पतला होगा और नदी को दोबारा जीवंत बनाने में मदद मिलेगी।

हथनीकुंड बैराज और तीसरी धारा की योजना

योजना में हथनीकुंड बैराज से यमुना में पानी की तीसरी धारा बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है। इससे नदी में जमी गाद, कचरा और प्रदूषित तत्वों को बाहर निकालने में मदद मिलेगी। बेहतर बहाव से यमुना का प्राकृतिक संतुलन सुधरने की उम्मीद है।

नालियों और सीवेज पर भी सख्ती

सिर्फ पानी छोड़ना ही नहीं, बल्कि प्रदूषण के स्रोतों पर भी कार्रवाई की जा रही है। हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली की यमुना में गिरने वाली सभी नालियों का थर्ड पार्टी ऑडिट कराया जाएगा। साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले पानी की वास्तविक गुणवत्ता की जांच की जा रही है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि नदी में केवल ट्रीटेड पानी ही छोड़ा जाए।

क्या वाकई जिंदा होगी यमुना?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह योजना यमुना को ‘मरती नदी’ से ‘जीवंत नदी’ बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि उनका यह भी कहना है कि जब तक सीवेज ट्रीटमेंट, औद्योगिक कचरा प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में बड़े सुधार नहीं किए जाते, तब तक यमुना की स्थायी सफाई संभव नहीं होगी। फिर भी गंगा और मुनक नहर से पानी लाने की यह पहल यमुना के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है।
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