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March 17, 2026

उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में होगा Uniform Civil Code का कानून

The CSR Journal Magazine
Uniform Civil Code: उत्तराखंड के बाद अब गुजरात में भी यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की राह पर है। UCC के लिए गठित समिति ने अब मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी है। यह समिति 4 फरवरी, 2025 को बनाई गई थी। समिति ने विभिन्न मुद्दों पर गहन अध्ययन करने के बाद रिपोर्ट में अपनी अंतिम सिफारिशें शामिल की हैं। सरकार अब इस रिपोर्ट पर अधिकारियों के साथ बैठक कर रही है। प्रस्तावित UCC विधेयक 24 मार्च को विधानसभा में पेश किया जा सकता है।

Uniform Civil Code: महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा पर ध्यान

रिपोर्ट में यह उल्लेख किया गया है कि समिति ने विवाह, तलाक, विरासत और गोद लेने समेत विभिन्न मुद्दों पर सभी धर्मों और समुदायों के लिए समान कानूनी ढांचे का प्रस्ताव किया है। इस मसौदे में खासकर महिलाओं के समान अधिकारों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इसके अलावा, रिपोर्ट में गुजरात की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधता को भी ध्यान में रखा गया है, जिससे हर समुदाय की आवश्यकताएं पूरी हो सकें।

मुख्यमंत्री की दिल्ली यात्रा ने बढ़ाई चर्चा

हाल ही में दिल्ली में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उच्च स्तर की बैठक के बाद गुजरात में UCC पर चर्चा और तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि इस बैठक में केंद्र के नेताओं के साथ UCC के कार्यान्वयन के लिए महत्वपूर्ण चर्चाएं हुई हैं। राज्य सरकार ने इस मुद्दे के गहन अध्ययन के लिए एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है, जो विभिन्न धाराओं और कानूनी पहलुओं का मूल्यांकन कर रही है।

मार्च के अंतिम सप्ताह में संभावित विधेयक

सूत्रों का कहना है कि गुजरात विधानसभा के आगामी सत्र में UCC से जुड़े किसी प्रस्ताव या विधेयक को पेश किया जा सकता है। इसके लिए तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो चुकी हैं। अगर यह कानून लागू होता है, तो विवाह, तलाक, गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी नागरिकों पर एक समान कानून लागू होंगे। इस तरह, गुजरात भी उत्तराखंड के बाद UCC को लागू करने वाले राज्य की सूची में जुड़ जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज हैं रंजना प्रकाश देसाई

समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। जस्टिस देसाई 13 सितंबर 2011 से 29 अक्टूबर 2014 तक सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीश रहीं। उन्होंने 1970 में एलफिंस्टन कॉलेज, मुंबई से स्नातक की डिग्री प्राप्त की और बाद में गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से विधि में स्नातक (BA LLB) की। जस्टिस रंजना देसाई जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं और बॉम्बे हाईकोर्ट में भी न्यायाधीश रह चुकी हैं।

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