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February 8, 2026

Ujjain: Mahakal दर्शन से पहले रेलवे की ‘नई व्यवस्था’, 31 ट्रेनों का प्लेटफार्म बदला — श्रद्धालुओं की बढ़ी मुश्किलें

The CSR Journal Magazine
उज्जैन रेलवे स्टेशन पर रेलवे प्रशासन ने बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए 31 ट्रेनों के प्लेटफार्म में बदलाव कर दिया है। यह नई व्यवस्था 10 फरवरी से लागू होगी। रेलवे का दावा है कि यह कदम यात्री सुविधा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत में इसका सीधा असर महाकाल दर्शन के लिए आने वाले हजारों श्रद्धालुओं पर पड़ता दिख रहा है।

 महाकाल दर्शन के यात्रियों पर सीधा असर

उज्जैन आने वाले अधिकांश यात्री श्री महाकालेश्वर मंदिर के दर्शन के उद्देश्य से ही सफर करते हैं। अब जो ट्रेनें पहले प्लेटफार्म नंबर 1 के पास रुकती थीं, उन्हें प्लेटफार्म 7 और 8 पर शिफ्ट कर दिया गया है। ऐसे में यात्रियों को स्टेशन के एक छोर से दूसरे छोर तक भारी सामान के साथ पैदल चलना पड़ेगा, ताकि वे इंदौर गेट और मुख्य स्टेशन की ओर पहुंच सकें।

 लिफ्ट-एस्केलेटर नहीं, बुजुर्ग और महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

प्लेटफार्म नंबर 7 और 8 (नागदा एंड) की ओर लिफ्ट और एस्केलेटर की सुविधा नहीं है। इसका सबसे ज्यादा असर बुजुर्ग यात्रियों, महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगों पर पड़ेगा। महाकाल दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को अब लंबा पैदल सफर तय करना होगा, जो श्रद्धा की यात्रा को शारीरिक परेशानी में बदल सकता है।

रेलवे का तर्क: भीड़ कम करना उद्देश्य

रतलाम मंडल के रेलवे जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य प्लेटफार्म नंबर 1 पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करना और स्टेशन संचालन को अधिक संतुलित बनाना है। रेलवे का दावा है कि सभी प्लेटफार्मों का समान उपयोग होगा और इससे दीर्घकाल में यात्री सुविधा बढ़ेगी।

रोजाना 76 ट्रेनें, हजारों श्रद्धालु

उज्जैन स्टेशन पर रोजाना करीब 76 यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है। इनमें से बड़ी संख्या में यात्री धार्मिक यात्रा पर होते हैं। 31 ट्रेनों के प्लेटफार्म बदलने से यह स्पष्ट है कि यात्रियों की आवाजाही का पूरा पैटर्न बदल जाएगा, जिससे शुरुआती दिनों में भ्रम, अव्यवस्था और परेशानी बढ़ना तय माना जा रहा है।

एक्सप्रेस और पैसेंजर दोनों ट्रेनों में बदलाव

इस फैसले के तहत सुपरफास्ट, एक्सप्रेस और मेमू/पैसेंजर ट्रेनों को नए प्लेटफार्म आवंटित किए गए हैं। कई प्रमुख ट्रेनें अब प्लेटफार्म 7 और 8 पर आएंगी, जबकि कुछ को प्लेटफार्म 5, 6 और 4 पर शिफ्ट किया गया है। इसके साथ ही 12 पैसेंजर ट्रेनों के प्लेटफार्म भी बदले गए हैं, जिससे लोकल यात्रियों को भी नई व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालना होगा।

 व्यवस्था सुधार या नई अव्यवस्था?

रेलवे इसे व्यवस्थागत सुधार बता रहा है, लेकिन महाकाल दर्शन को आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह बदलाव फिलहाल नई मुश्किल बनकर सामने आ रहा है। बिना पर्याप्त बुनियादी सुविधाओं (लिफ्ट, एस्केलेटर, गाइडेंस सिस्टम) के यह बदलाव यात्रियों के अनुभव को बेहतर करने के बजाय और कठिन बना सकता है।
उज्जैन रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म परिवर्तन प्रशासनिक दृष्टि से जरूरी हो सकता है, लेकिन धार्मिक यात्रियों की संवेदनशील जरूरतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अगर इस बदलाव के साथ यात्री सुविधाओं को मजबूत नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था सुधार नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए परेशानी का नया अध्याय बन जाएगी।
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