रामेश्वरम को देश से जोड़ने वाला ऐतिहासिक पंबन रेलवे ब्रिज अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। नए पंबन रेलवे ब्रिज के संचालन में आने के साथ ही 1914 में बने पुराने पंबन ब्रिज को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पुल सिर्फ इंजीनियरिंग का चमत्कार नहीं था, बल्कि फिल्मों, पर्यटन और आस्था से जुड़ा एक भावनात्मक प्रतीक भी रहा।
1914 में बना, समुद्र पर भारत की पहली रेल कड़ी
ब्रिटिश शासन के दौरान 1914 में बना पंबन रेलवे ब्रिज भारत का पहला समुद्री रेल पुल था। यह तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले के मंडपम को रामेश्वरम द्वीप से जोड़ता था। करीब 2.3 किलोमीटर लंबा यह पुल समुद्र के बीच तेज हवाओं, ऊंची लहरों और खारे पानी को चुनौती देता रहा। एक सदी से भी ज्यादा समय तक इस पुल ने रामेश्वरम को मुख्य भूमि से जोड़े रखा और लाखों यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया।
कैंटिलीवर और लिफ्ट सिस्टम, जो अपने समय से आगे था
पंबन ब्रिज की सबसे खास पहचान थी इसका कैंटिलीवर और वर्टिकल लिफ्ट सिस्टम। जब समुद्री जहाज गुजरते थे, तो पुल का बीच वाला हिस्सा ऊपर उठ जाता था। उस दौर में इतनी उन्नत तकनीक का इस्तेमाल इसे इंजीनियरिंग का बेजोड़ उदाहरण बनाता है। समुद्र के बीच ट्रेन और जहाजों का यह तालमेल लोगों के लिए हमेशा कौतूहल का विषय रहा।
जब फिल्मों ने पंबन ब्रिज को बनाया ‘स्टार’
पंबन ब्रिज सिर्फ रेल यातायात तक सीमित नहीं रहा। इसकी खूबसूरती और समुद्र के ऊपर बनी संरचना ने फिल्मकारों को खूब आकर्षित किया। हिंदी और साउथ सिनेमा की कई चर्चित फिल्मों की शूटिंग यहां हुई। चेन्नई एक्सप्रेस (2013), रावण (2010), कंडुकोनैन कंडुकोनैन (2000) जैसी फिल्मों में समुद्र के ऊपर दौड़ती ट्रेन और तेज हवाओं वाले सीन आज भी दर्शकों को याद हैं। इन फिल्मों ने पंबन ब्रिज को देशभर में अलग पहचान दिलाई और इसे “फिल्मों वाला पुल” बना दिया।
श्रद्धा और पर्यटन का भी मजबूत रिश्ता
रामेश्वरम चार धामों में शामिल है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। पंबन ब्रिज से गुजरती ट्रेन का सफर अपने आप में एक यादगार अनुभव माना जाता था। समुद्र के बीच खड़े होकर सूर्योदय-सूर्यास्त देखना, लहरों की आवाज सुनना और दूर तक फैले नीले पानी को निहारना। यही वजह है कि यह पुल पर्यटकों के लिए भी बड़ा आकर्षण रहा। आज भी लोग पंबन रोड ब्रिज से पुराने रेल पुल की तस्वीरें लेने रुकते हैं।
उम्र और समुद्र ने कमजोर कर दिया ढांचा
हालांकि समय के साथ समुद्री नमक, तेज हवाएं और लगातार बदलते मौसम ने इस पुल की मजबूती पर असर डाला। कई बार चक्रवात और तेज तूफानों के दौरान रेल सेवाएं रोकनी पड़ीं। सुरक्षा कारणों से ट्रेनों की रफ्तार भी सीमित करनी पड़ी। इन जोखिमों को देखते हुए रेलवे और सरकार ने पुराने पुल को सेवा से मुक्त करने का फैसला लिया।
नया पंबन ब्रिज, आधुनिक भारत की नई पहचान
पुराने पुल की जगह अब नया पंबन रेलवे ब्रिज तैयार किया गया है, जो आधुनिक तकनीक से लैस है। यह तेज रफ्तार ट्रेनों, भारी भार और खराब मौसम को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। नए ब्रिज के शुरू होते ही पुराने पंबन ब्रिज को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है, ताकि समुद्री यातायात और सुरक्षा मानकों पर कोई असर न पड़े।
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