भारत का परमाणु ऊर्जा में नया कीर्तिमान: फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तैयार, 400 साल तक बिजली की गारंटी

The CSR Journal Magazine
भारत ने परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। तमिलनाडु के कलपक्कम में भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी-BHAVINI) ने 500 मेगावाट का प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) तैयार किया है। यह तकनीक भारत को दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल करती है, जिन्होंने इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक व्यावसायिक स्तर पर लाया है। इसे 200 से अधिक भारतीय एमएसएमई और निजी कंपनियों के सहयोग से बनाया गया है, जिससे भारत पर किसी भी विदेशी प्रतिबंध का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

विश्व में दूसरे स्थान पर भारत

अब भारत रूस के बाद दुनिया का दूसरा देश बन गया है, जिसने अत्याधुनिक फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को तैयार किया है। यह रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी इंजीनियरिंग के माध्यम से विकसित किया गया है, जो भारत के न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की खासियत यह है कि यह इस्तेमाल किए गए ईंधन (यूरेनियम) से अधिक बिजली पैदा कर सकता है, जिससे इसकी कार्यप्रणाली और कुशलता में वृद्धि होती है।

थोरियम का समृद्ध भंडार

भारत में यूरेनियम के सीमित भंडार हैं, लेकिन थोरियम का विशाल भंडार मौजूद है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस रिएक्टर की सफलता थोरियम के उपयोग को संभव बनाएगी, जिससे भविष्य में बिजली उत्पादन की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी। कलपक्कम में बने इस रिएक्टर की तकनीक न केवल उन्नत है बल्कि यह देश की ऊर्जा संप्रभुता को भी मजबूत करेगी।

सुरक्षा और टिकाऊ तकनीक

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह इस्तेमाल किए गए ईंधन को रिसाइकिल करके फिर से ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है। इसके अलावा, इसमें लिक्विड सोडियम का इस्तेमाल किया गया है, जो किसी आकस्मिकता के समय में भी रिएक्टर को सुरक्षित ठंडा रख सकता है। यह सुरक्षा मापदंड इसे और अधिक प्रभावी बनाते हैं।

’मेक इन इंडिया’ का सफल उदाहरण

यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ की एक बड़ी मिसाल है, जिसमें 22 वर्षों की मेहनत और 7,700 करोड़ रुपये की कुल लागत आई है। कई विशेषज्ञ इस परियोजना को डॉ. अनिल काकोदकर के विजन से जोड़ते हैं, जिन्होंने 72 साल पहले इस दिशा में सोच शुरू की थी। भारत का यह फास्ट ब्रीडर रिएक्टर पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से विकसित किया गया है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देश की क्षमता को प्रदर्शित करता है।

400 साल की बिजली गारंटी

विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार जब भारत न्यूक्लियर प्रोग्राम के तीसरे चरण में प्रवेश करेगा, तो हमारे पास मौजूद थोरियम का भंडार 400 वर्षों तक देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करेगा। यह न केवल हमें आत्मनिर्भर बनाएगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी ऊर्जा की एक स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

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