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March 12, 2026

Supreme Court की CBI को फटकार: घर खरीदारों का मामला लंबा नहीं खींच सकते

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली-NCR सहित देश के अन्य हिस्सों में घर खरीदने वालों को ठगने के लिए बैंकों और डेवलपर्स के बीच गठजोड़ की जांच को लेकर CBI को कड़ा निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि जांच को लंबा खींचा गया, तो इससे फ्लैट खरीदने वालों की परेशानियां बढ़ेंगी। CBI ने अन्य राज्यों के मामलों को स्थानीय एजेंसियों को ट्रांसफर करने की मांग की थी, जिस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने एतराज जताया। कोर्ट वर्तमान में 1,200 से अधिक घर खरीदारों की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें मुख्य याचिका हिमांशु सिंह द्वारा दायर की गई है।

फ्लैट का कब्जा न मिलने पर बैंक की किश्तें

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गुरुग्राम में विभिन्न हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में सबवेंशन प्लान के तहत बुक किए गए फ्लैट का कब्जा न मिलने के बावजूद बैंकों द्वारा उन्हें किश्तें चुकाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस मुद्दे पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CBI को चेतावनी दी कि यदि उसकी कार्यशैली में सुधार नहीं होता, तो उसकी जांच प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक समिति बनाई जाएगी। कोर्ट ने CBI से कहा कि यदि स्टाफ की कमी समस्या है, तो उसे राज्यों के DGP को लिखकर मदद मांगनी चाहिए।

बैंकों के खिलाफ कार्रवाई का संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि CBI बैंक अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं कर रही है। अगली सुनवाई के लिए CBI को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें उसे मामले की जांच की संभावना और समयसीमा के बारे में जानकारी देनी होगी। सबवेंशन स्कीम के तहत बैंकों द्वारा मंजूर की गई रकम सीधे बिल्डरों के खाते में जमा की जाती है और खरीदारों को तब तक EMI चुकानी होती है जब तक कि उनका फ्लैट नहीं मिल जाता। सवाल यह उठता है कि इस प्रक्रिया में खरीदारों का क्या होगा यदि बिल्डर अपनी जिम्मेदारियों को पूरा नहीं करते।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और पहले की शिकायतें

29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को सुपरटेक लिमिटेड समेत NCR में बिल्डर्स के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्देशित किया था। अदालत ने यह भी कहा था कि उसे नोएडा, गुरुग्राम, और अन्य शहरों में बैंकों और बिल्डर्स के बीच मिलीभगत की पहली नजर में पुष्टि मिली है। जजों ने माना कि कॉर्पोरेशन बैंक ने सबवेंशन स्कीम के तहत बिल्डर्स को 2,700 करोड़ रुपए से अधिक का लोन दिया था।

घर खरीदारों की शिकायतों का निवारण

पिछले साल 23 सितंबर को, सुप्रीम कोर्ट ने CBI को बैंक और डेवलपर्स के बीच सांठगांठ की जांच के लिए छह नए मामलों को दर्ज करने की अनुमति दी थी। कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वह इन मामलों में स्पेशल CBI कोर्ट से दो हफ्ते में कार्रवाई की उम्मीद रखे और जांच की प्रगति की दिशा में काम करे। CBI को पहले भी 22 मामलों की जांच की इजाजत दी जा चुकी है, जिसमें एनसीआर में सबवेंशन स्कीम के तहत ठगी का मामला शामिल है।
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