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March 14, 2026

चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य में हो रहे अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने मीडिया रिपोर्ट्स और CSR रिपोर्टों के आधार पर मामले का स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संरक्षित क्षेत्रों में पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद रेत का अवैध खनन और परिवहन जारी है। यह लुप्तप्राय प्रजातियों के लिए खतरा बनता जा रहा है। सुनवाई के दौरान जस्टिस विक्रम नाथ ने गंभीर टिप्पणी की।

घड़ियालों के लिए सुरक्षित स्थान नहीं

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिन इलाकों में घड़ियाल छोड़े गए थे, वह क्षेत्र भी अब सुरक्षित नहीं रहे। अवैध खनन के कारण वहां का प्राकृतिक वातावरण बिगड़ रहा है। खनन माफिया का आतंक और प्राकृतिक आवासों का नुकसान घड़ियालों को अपने क्षेत्र छोड़ने पर मजबूर कर रहा है। संरक्षित क्षेत्रों में घड़ियाल संरक्षण कार्यक्रम चलाने के बावजूद अंधाधुंध खनन जारी है। इस वजह से घड़ियाल विस्थापित हो रहे हैं। मामले को अब उचित दिशा-निर्देशों के लिए प्रधान न्यायाधीश के समक्ष भेजा जाएगा।

परिस्थितिकी पर मंडरा रहा खतरा

चंबल अभयारण्य का 435 किलोमीटर लंबा क्षेत्र घड़ियालों के अलावा रिवर डॉल्फिन, दुर्लभ कछुओं और पक्षियों का भी घर है। कोर्ट ने चिंता जताई कि संरक्षित क्षेत्र में रेत का परिवहन और खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है, फिर भी यह धड़ल्ले से जारी है। रेत इस पूरे इको-सिस्टम का आधार है। इसके हटने से घड़ियालों के प्रजनन और रहने की जगह खत्म हो रही है। अवैध खनन न केवल वन्यजीवों बल्कि पूरे पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ रहा है।

सेंसिटिव जोन की स्थिति

1979 में अधिसूचित राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के त्रिकोणीय क्षेत्र पर स्थित है। इसे मुख्य रूप से लुप्तप्राय घड़ियालों को बचाने के लिए बनाया गया था। लेकिन अब यह माफियाओं की शरणस्थली बनता जा रहा है। इस प्रकार का अवैध खनन न सिर्फ घड़ियालों के संरक्षण पर संकट पैदा कर रहा है, बल्कि चंबल की पारिस्थितिकी को भी खतरे में डाल रहा है।

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