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February 15, 2026

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा मामले में CBI से दो सप्ताह में रिपोर्ट और मुख्य न्यायाधीश से निगरानी का आदेश दिया

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में हुई हिंसा के मामले में CBI से दो सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा है। अदालत ने मुख्य न्यायाधीश को मामले की निगरानी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा के शिकार होने वाले लोगों के परिजनों को आरोप पत्र की प्रतियां उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है।

मुख्य न्यायाधीश की निगरानी में होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मणिपुर के मुख्य न्यायाधीश को इस मामले की निगरानी करनी होगी। अगर जरूरत पड़ी, तो अदालत मणिपुर हाईकोर्ट में एक विशेष पीठ गठित करने की अनुमति देगी। इस तरह का प्रावधान स्थानीय स्तर पर स्थिति को संवेदनशीलता से देखने के लिए किया गया है।

सरकार के सॉलिसिटर जनरल का बयान

सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कोर्ट में मौजूद कुछ संगठन लोगों को उकसा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि अब स्थिति शांति की ओर बढ़ रही है और लोग स्वतंत्रता से यात्रा कर रहे हैं। हालांकि, मेहता ने यह भी कहा कि सीमा संबंधी मुद्दे अभी भी महत्वपूर्ण हैं।

पुनर्वास उपायों पर हुईं कई रिपोर्टें

मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद, पूर्व न्यायाधीशों की एक समिति ने पीड़ितों के पुनर्वास पर कई महत्वपूर्ण रिपोर्टें प्रस्तुत की हैं। यह रिपोर्टें उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीशों द्वारा तैयार की गई हैं, जिन्होंने हिंसा और उसके प्रभावों का गहराई से अध्ययन किया है।

पिछले कुछ महीनों में हुई हिंसा

मणिपुर में 3 मई 2023 को जातीय हिंसा शुरू हुई, जब पहाड़ी जिलों में मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का विरोध किया गया। इस हिंसा में 200 से अधिक लोग मारे गए, सैकड़ों घायल हुए और हजारों को विस्थापित होना पड़ा। यह स्थिति बहुत गंभीर है और इसका पूरी तरह से अध्ययन करने की आवश्यकता है।

सीबीआई पर लापरवाही के आरोप

हाल ही में दिवंगत हुई एक महिला पीड़िता के वकील वृंदा ग्रोवर ने सीबीआई पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सीबीआई ने उन्हें यह भी नहीं बताया कि उनके बलात्कार मामले में आरोप पत्र दाखिल किया गया है। यह बात बेहद चिंताजनक है और अदालत को इससे अवगत कराया जाना जरूरी है।

कुकी महिला की दुखद कहानी

ग्रोवर ने एक कुकी महिला के मामले को उठाया, जो पिछले महीने एक बीमारी से चल बसी। उनके अनुसार, यह बीमारी कथित सामूहिक बलात्कार के बाद के मानसिक आघात का परिणाम था। सरकार और जांच एजेंसियों की लापरवाही ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है।

दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की आवश्यकता

अदालत में पेश किए गए मामलों में मुख्य आरोपी की अनुपस्थिति और सीबीआई की लापरवाही को लेकर निराशा व्यक्त की गई है। इससे यह साबित होता है कि ऐसे मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता है। पीड़ितों के अधिकारों की रक्षा करना बेहद महत्वपूर्ण है, और अगर ऐसा नहीं हुआ, तो यह पूरे न्याय प्रणाली पर सवाल उठाता है।

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