app-store-logo
play-store-logo
March 13, 2026

Supreme Court ने कहा पेड मेंस्ट्रुअल लीव से करियर पर पड़ेगा बुरा असर

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पेड मेंस्ट्रुअल लीव के लिए दायर याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका को शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने पेश किया। कोर्ट के प्रमुख न्यायाधीश, CJI सूर्यकांत ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ऐसी याचिकाएं महिलाओं के प्रति बनी रूढ़ियों को और मजबूत कर सकती हैं। CJI ने स्पष्ट किया कि ये याचिकाएं महिलाओं को हीन दिखाने के लिए होती हैं। मासिक धर्म को बुरा मानने की मानसिकता को ये और भी बढ़ावा देती हैं।

नियोक्ता की स्थिति पर सवाल

CJI ने कहा कि हमें उस नियोक्ता के बारे में सोचने की जरूरत है जिसे पेड लीव देनी होगी। उन्होंने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या यह उचित है कि ऐसे मामलों में नियोक्ताओं को जिम्मेदार ठहराया जाए। न्यायालय ने इस बात पर ध्यान दिया कि पेड मेंस्ट्रुअल लीव को अनिवार्य बनाने के संभावित सामाजिक परिणाम क्या हो सकते हैं। किसी भी नियोक्ता के लिए यह चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

याचिका का इतिहास

दरअसल, पेड मेंस्ट्रुअल लीव का मामला तीसरी बार कोर्ट में लाया गया। पहली बार फरवरी 2023 में इस पर सुनवाई हुई थी, जिसमें याचिकाकर्ता को महिला एवं बाल मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दी गई थी। इसके बाद, 2024 में फिर से कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की गई। याचिकाकर्ता ने सरकार से किसी भी प्रतिक्रिया की कमी पर चिंता प्रकट की।

केंद्र सरकार की भूमिका

दूसरी याचिका में याचिकाकर्ता ने कहा कि केंद्रीय मंत्रालय ने उनके पक्ष में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जुलाई 2024 में, इस पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नीतिगत निर्णय लेने के लिए कहा। इस प्रकार, मामला अब सरकारी स्तर पर उठ चुका है, लेकिन कोई ठोस नीति अभी तक नहीं बनाई गई है। समय के साथ, महिलाएं इस मुद्दे पर और भी अधिक जागरूक हो रही हैं।

महिलाओं की चिंताएं

महिलाएं इस मुद्दे को लेकर चिंतित हैं कि अगर पेड मेंस्ट्रुअल लीव का कानून नहीं बनता है, तो उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कई महिलाएं कार्यस्थल पर माहवारी के दौरान असहजता महसूस करती हैं। ऐसे में उन्हें काम के दौरान बुनियादी सुविधाएं आवश्यक लगती हैं।

जन जागरूकता का बढ़ता चलन

महिलाओं के अधिकारों पर बात होने लगी है। सामाजिक कार्यकर्ता इस मुद्दे को लेकर आम जनता के बीच जानकारी फैलाने लगे हैं। शैलेंद्र मणि त्रिपाठी जैसे लोग इस दिशा में प्रयास कर रहे हैं ताकि महिलाओं की आवाज और भी मजबूत हो सके। लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला महिलाओं के लिए एक और चुनौती छोड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस मुद्दे पर अपनी नीति कब बनाती है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540 
Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos