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February 26, 2026

Supreme Court की गंभीर सुनवाई: NCERT की किताब में ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ पर उठे सवाल

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के क्लास 8 की सोशल साइंस की किताब में न्यायपालिका से जुड़े ‘ज्यूडीशियल करप्शन’ चैप्टर पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। यह सुनवाई गुरुवार को होनी है। CJI सूर्यकांत की अगुवाई में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच इस मामले पर विचार करेगी। CJI ने बुधवार को इस मुद्दे पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की किसी को इजाजत नहीं दी जाएगी।

NCERT की किताब में विवादित चैप्टर

यह विवादित चैप्टर NCERT की नई सोशल साइंस टेक्स्टबुक में शामिल किया गया था, जिसे 23 फरवरी को जारी किया गया। किताब का नाम है ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉंड पार्ट 2’। इसमें ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ विषय के अंतर्गत ‘करप्शन इन द ज्यूडिशियरी’ को जोड़ा गया था। इसमें बताया गया है कि न्यायपालिका के सामने ‘भ्रष्टाचार’ और ‘पेंडिंग मामले’ प्रमुख चुनौतियां हैं।

सरकार का NCERT पर आरोप

सरकार ने इस चैप्टर को शामिल करने पर अपनी आपत्ति जताई है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि NCERT एक ऑटोनॉमस संस्था है, लेकिन इसे किताब में बदलाव करने से पहले उचित विचार करना चाहिए था। उन्होंने बताया कि यदि भ्रष्टाचार का उल्लेख किया गया है, तो इसे कार्यपालिका और विधायिका के संदर्भ में भी पेश करना चाहिए था।

एनसीईआरटी की प्रतिक्रिया

इस विवाद के बाद NCERT ने अपनी वेबसाइट से इस किताब को हटा लिया, और इसे लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि मामला अब अदालत में है, इसलिए वे इस पर कुछ नहीं बोलेंगे। यह एक महत्वपूर्ण विषय है, और अधिकारियों को उचित समय पर एक्शन लेना चाहिए था।

किताब में शामिल आंकड़े

किताब में ‘Justice delayed is justice denied’ शीर्षक वाला एक सेक्शन है, जो यह बताता है कि न्याय में देरी से न्याय नहीं मिलता। सुप्रीम कोर्ट में लगभग 81 हजार मामले, हाईकोर्ट में 62 लाख 40 हजार मामले और डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या दर्शाई गई है। यह आंकड़े भी न्यायपालिका की स्थिति को स्पष्ट करते हैं।

पूर्व CJI का बयान

इस किताब में भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के मामलों पर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इन मुद्दों को सुलझाने के लिए जरूरी है कि पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़े। यह बात लोकतंत्र की खूबसूरती को दर्शाती है।

शैक्षणिक सत्र के लिए योजना

यह किताब 2026-27 से स्कूलों में पढ़ाई जाएगी, और इसका पहला भाग जुलाई 2025 में लांच किया जाएगा। NCERT ने नई किताबों को नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क और NEP-2020 के अधीन तैयार किया है। कोरोना महामारी के बाद पुराने विषयों की जगह नए टॉपिक्स जोड़े जा रहे हैं।

शिक्षा में बदलाव की दिशा में कदम

NCERT की नई किताबें पहली से 8वीं कक्षा तक के लिए तैयार की गई हैं, जिससे छात्रों को प्रासंगिक और वर्तमान मुद्दों पर जानकारी मिल सकI
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