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February 10, 2026

Supreme Court का बड़ा आदेश: डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ SOP बनाने का निर्देश

The CSR Journal Magazine
डिजिटल धोखाधड़ी का मामला तेजी से बढ़ रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस मुद्दे पर बड़ा आदेश देते हुए कहा कि केंद्र सरकार को डिजिटल फ्रॉड से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनानी होगी। पीठ ने इस धोखाधड़ी को पूर्ण रूप से डकैती मानते हुए 54,000 करोड़ रुपये के गबन की चर्चा की है। अदालत ने बैंकों और आरबीआई को इस कार्य में सक्रियता दिखाने के लिए कहा है।

बैंकों की जिम्मेदारी और ग्राहक सुरक्षा

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों ने बैंकों को चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें ग्राहकों को बड़े लेनदेन के बारे में अलर्ट करने की आवश्यकता है। विशेषकर तब जब कोई आमतौर पर छोटे लेनदेन करने वाला ग्राहक अचानक बड़ी राशि निकालता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कोई पेंशनभोगी 10,000 की जगह 50 लाख रुपये निकालता है, तो बैंक को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।

सीबीआई को मिले निर्देश

अदालत ने सीबीआई को डिजिटल अरेस्ट मामलों की पहचान करने का निर्देश दिया है। गुजरात एवं दिल्ली सरकार से भी कहा गया है कि वे सीबीआई को आवश्यक स्वीकृति प्रदान करें ताकि ये मामले तेजी से जांचे जा सकें। न्यायालय ने पीड़ितों को मुआवजा देने के संबंध में भी सख्त बात की है।

आरबीआई की पहल और AI का उपयोग

अटॉर्नी जनरल ने पीठ को बताया कि आरबीआई ने भी इस दिशा में प्रयास किए हैं, जिसमें बैंकों के लिए SOP का मसौदा तैयार किया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस नप्पिनई ने सुझाव दिया कि बैंकों को संदिग्ध लेनदेन के बारे में ग्राहकों को अलर्ट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करना चाहिए। इससे समय पर कार्रवाई की जा सकेगी।

बैंकों की भूमिका और चिंता

जस्टिस बागची ने कहा कि हालात यह दर्शाते हैं कि बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। यदि बैंकों ने संदिग्ध लेनदेन के बारे में सक्रियता दिखाई होती, तो कई बड़ी धोखाधड़ी को रोका जा सकता था। अदालत ने कहा कि समस्या यह है कि बैंकों के कार्य प्रणाली में अनजाने में धोखाधड़ी को बढ़ावा मिल रहा है।

साइबर क्राइम के बढ़ते मामलों पर चिंता

न्यायालय ने यह भी बताया कि पिछले कुछ वर्षों में साइबर धोखाधड़ी के जरिए 52,000 करोड़ रुपये से अधिक की हेराफेरी की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर कड़ी नज़र रखी जानी चाहिए।

बैंकों की साख पर सवाल

अदालत ने बैंकों की साख पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि यह प्रवृत्ति जारी रही, तो बैंकों का भरोसा भी गिर सकता है। न्यायालय ने यह संकेत दिया कि बैंकों को अपनी कार्य प्रणाली में आगे बढ़कर सुधार लाने की आवश्यकता है।
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