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February 21, 2026

सुप्रीम कोर्ट 5 मई 2026 से नागरिकता संशोधन कानून की 243 याचिकाओं पर सुनवाई शुरू करेगा

The CSR Journal Magazine
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन एक्ट (CAA) और इससे जुड़े नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई 5 मई 2026 से शुरू करने का निर्णय लिया है। कुल 243 याचिकाएं कोर्ट में दायर की गई हैं, जो कि विशेषकर मुस्लिम समुदाय को कानून से बाहर रखने का आरोप लगाती हैं। इस मामले का मुख्य मुद्दा आर्टिकल 14 के तहत समानता के अधिकार का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में इस सुनवाई को लेकर वकीलों से चर्चा की और बताया कि कैसे मामलों को प्रभावी ढंग से सुना जाएगा।

सुनवाई की प्रक्रिया और समय

सुप्रीम कोर्ट ने बताया है कि सुनवाई दो ग्रुप में बांटी जाएगी: एक ग्रुप असम-त्रिपुरा से संबंधित मामलों का होगा और दूसरा ग्रुप अन्य राज्यों के मामलों का। नोडल वकीलों को गठित किया जाएगा, जो इन मामलों की पहचान करेंगे। प्रत्येक ग्रुप के मामलों को अलग-अलग समय देना तय किया गया है। पहले हफ्ते में याचिकाकर्ताओं की बात सुनी जाएगी, जबकि प्रतिवादियों के लिए बाद में समय निर्धारित किया जाएगा।

CAA का उद्देश्य और विवाद

CAA का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं, जैनियों, ईसाइयों, सिखों, बौद्धों और पारसियों को नागरिकता देना है। यह कानून 31 दिसंबर, 2014 से पहले भारत में आए ऐसे लोगों को नागरिकता प्रदान करने का अधिकार देता है। इस कानून के तहत मुस्लिम समुदाय को बाहर रखा गया है, जिससे पूरे देश में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह कानून धर्म के आधार पर भेदभाव करता है, जिससे भारत के संविधान के नियमों का उल्लंघन होता है।

कानूनी विवाद और Court के फैसले

सुप्रीम कोर्ट ने 18 दिसंबर 2019 को भारत संघ को नोटिस जारी किया था, लेकिन कानून पर कोई रोक नहीं लगाई थी। हालांकि, केंद्र सरकार ने तुरंत नियमों को अधिसूचित कर दिया, जिससे CAA लागू हो गया। इस बदलाव के बाद, कई याचिकाएं दिखाई दीं, जो कि अदालती फैसले का इंतजार कर रही हैं। कोर्ट ने नियमों पर रोक लगाने की याचिका पर अंतरिम रोक लगाने से मना कर दिया, जिससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया।

याचिकाओं की पृष्ठभूमि

इन याचिकाओं में एक प्रमुख याचिका इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की है, जिसने CAA को कोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद अन्य कई याचिकाएं न्यायालय में दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि CAA भारत के मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। इस वजह से सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की प्रक्रिया और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

आगे के कदम

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 5 मई से शुरू होकर आगे बढ़ेगी। अदालत में पैसेज के दौरान मामलों की सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। इस दौरान सभी पक्षों को अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। यह सुनवाई न केवल CAA के भविष्य के लिए बल्कि भारत के मौलिक अधिकारों के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

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