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March 6, 2026

16 साल से छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक लगाने वाला पहला राज्य बना कर्नाटक

The CSR Journal Magazine

 बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम

कर्नाटक सरकार ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर सख्ती की घोषणा की। मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने यह ऐलान शुक्रवार को राज्य बजट भाषण के दौरान किया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों पर सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को कम करना है। बजट डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि बच्चों के बीच मोबाइल फोन और सोशल मीडिया का प्रयोग बढ़ा है, जिससे उनके मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य पर संकट उत्पन्न हो रहा है।

नीति के तहत नियम बनाना होगा जरूरी

यह नया निर्णय केवल एक नीति का ऐलान है। इसे लागू करने के लिए राज्य सरकार को उचित नियम बनाने होंगे, जिनमें उम्र की जांच और सोशल मीडिया कंपनियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश शामिल होंगे। इस प्रस्ताव का संबंध देश के नए डेटा सुरक्षा कानून ‘डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023’ से भी है। इसके तहत माता-पिता या कानूनी अभिभावक की अनुमति के बिना किसी भी बच्चे का व्यक्तिगत डेटा उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

अभिभावकों की भूमिका होगी अहम

सरकार ने बताया कि किसी बच्चे के अकाउंट के लिए अभिभावकों की अनुमति अनिवार्य होगी। इसके लिए मान्यता प्राप्त पहचान प्रणाली या डिजिटल लॉकर जैसी सेवाओं का सहारा लिया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अनुमति देने वाला व्यक्ति वयस्क है। बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के इस कदम को लेकर राज्य सरकार काफी गंभीर है।

नशे की समस्या से निपटने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे

मुख्यमंत्री ने बजट भाषण में बताया कि स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों में नशे की समस्या को रोकने के उद्देश्य से जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इसके लिए अनुशासन के साथ-साथ छात्र सहायता और काउंसलिंग केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य और विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इन संस्थानों की भूमिका को मजबूत बनाने का प्रयास है।

आंध्र प्रदेश का सुनहरा भविष्य

आंध्र प्रदेश CM एन चंद्रबाबू नायडू ने भी सामाजिक मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने की योजना का जिक्र किया है। अगर इस पर सभी सहमत होते हैं, तो जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। यह कदम राज्य की शिक्षा प्रणाली को और सुरक्षित बनाएगा।

डाटा सुरक्षा कानून के प्रमुख बिंदु

डिजिटल पर्सनल डाटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत प्रमुख बिंदु शामिल हैं। कोई भी कंपनी बिना सहमति के आपका डेटा संग्रहित नहीं कर सकती है। यदि किसी कंपनी ने आपका डेटा गलत तरीके से उपयोग किया, तो उसके खिलाफ शिकायत की जा सकेगी। इसके अलावा, डेटा लीक होने की स्थिति में सभी कंपनियों को प्रभावित व्यक्तियों को जल्दी से जानकारी देनी होगी।

भविष्य की संभावनाएं

इन कदमों से बच्चों और उनके अभिभावकों को अधिक सुरक्षा मिल सकेगी। सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के माध्यम से शिक्षा संस्थानों में सकारात्मक माहौल बनाने और बच्चों को सुरक्षित रखने का उद्देश्य है। इस प्रकार की नीतियों से न सिर्फ बच्चों का बल्कि समाज का भी भला होगा। आगे आने वाले दिनों में इन नीतियों को किस प्रकार से लागू किया जाएगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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