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February 24, 2026

पुरानी vs नई NCERT: 1947 के बंटवारे में हुए नए बदलाव, जानें क्या है खास!

The CSR Journal Magazine

नई किताब में महत्वपूर्ण बदलाव

NCERT की कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान किताब में 1947 के भारत विभाजन पर कई बदलाव किए गए हैं। नई NCERT किताब में 1947 के विभाजन पर महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिसमें गांधी और कांग्रेस की भूमिका स्पष्ट की गई।नई किताब में बताया गया है कि महात्मा गांधी और कांग्रेस ने विभाजन को अंतिम विकल्प के रूप में स्वीकार किया। इसके साथ ही, यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी मुसलमान विभाजन के पक्ष में नहीं थे।

पुरानी किताब में क्या था?

इसके पहले, पुरानी कक्षा 8 की इतिहास की किताब में यह बताया गया था कि ब्रिटिश सरकार द्वारा भेजे गए तीन सदस्यीय मिशन (कैबिनेट मिशन) ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच सहमति नहीं बना सकी, जिसके बाद विभाजन लगभग तय हो गया। हालांकि, इस किताब में यह नहीं लिखा गया था कि कांग्रेस नेताओं ने इसे अंतिम रास्ता मानकर स्वीकार किया।

नई किताब का परिचय

नई किताब जिसका नाम “Exploring Society: India and Beyond Part 2” है, में 1857 की क्रांति से लेकर 1947 तक की आजादी की लड़ाई के घटनाक्रमों को शामिल किया गया है। इसमें बंगाल विभाजन, स्वतंत्रता आंदोलन, और भारत के विभाजन की घटनाओं को विस्तार से समझाया गया है।

इतिहास पर नई दृष्टि

इस किताब में यह भी बताया गया है कि इतिहासकारों के बीच इस बात पर बहस रही है कि ब्रिटेन ने भारत क्यों छोड़ने का निर्णय लिया। पहले माना जाता था कि महात्मा गांधी की अहिंसा की नीति और कांग्रेस की रणनीति ही मुख्य कारण थे। लेकिन नई किताब में यह स्पष्ट किया गया है कि इसके पीछे कई अन्य कारण भी थे, जैसे- जन आंदोलनों का दबाव, क्रांतिकारियों के प्रयास और रॉयल इंडियन एयर फोर्स व रॉयल इंडियन नेवी में हुए विद्रोह।

शिक्षा जगत में चर्चा

एनसीईआरटी ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पहली किताब (Part 1) पिछले साल जुलाई में जारी की थी। नए बदलाव को लेकर शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में हलचल मची हुई है। नए विषयों के लिए अध्यापक और विद्यार्थी दोनों ही उत्सुक हैं।

क्या है इसका महत्व?

नई किताब के ये बदलाव केवल पाठ्यक्रम में नहीं, बल्कि भारतीय इतिहास को बेहतर तरीके से समझने में भी सहायक साबित होंगे। इससे छात्रों को विभाजन की जटिलताओं को समझने का अवसर मिलेगा, जो भविष्य में उनके विचार और दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है।

अंतिम शब्द

एनसीईआरटी की इस नई पहल ने न केवल शिक्षा प्रणाली में बदलाव लाने का प्रयास किया है, बल्कि यह देश के इतिहास को पुनः परिभाषित करने की कोशिश में भी एक कदम है। यह निश्चित रूप से छात्रों और शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बनेगा।

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