सम्राट चौधरी या कोई और: बिहार के अगले CM की दौड़ में कौन है आगे

The CSR Journal Magazine
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान लगातार सम्राट चौधरी को अपना उत्तराधिकारी बताते रहे हैं। उन्होंने मंच से उन्हें जनता के सामने पेश किया है। पिछले राज्यसभा चुनाव के बाद भी नीतीश ने सम्राट चौधरी को लेकर सांकेतिक अभिवादन किया। यह देखना दिलचस्प है कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, क्योंकि नीतीश की पसंद व भाजपा की रणनीति दोनों ही महत्वपूर्ण पहलू बने हुए हैं।

बिहार का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?

बिहार में अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह सवाल अब गूंज रहा है। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद दिल्ली की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नीतीश के बाद उनकी पसंद कौन है? भाजपा हमेशा नए प्रयोग के लिए जानी जाती है, लेकिन बिहार की राजनीति में इस बार ऐसा कोई नाम अहमियत हासिल कर रहा है।

भाजपा और नीतीश कुमार की तकरार

हालांकि, वर्तमान राजनीतिक स्थिति में बिहार में बढ़े प्रयोग की संभावनाएं कम हैं। जबकि मुख्यमंत्री की कुर्सी भाजपा के पास हो सकती है, परंतु नीतीश कुमार की पसंद को नजरअंदाज करना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। इससे पहले भाजपा ने नीतीश की पसंद को अस्वीकार कर एक बार खामियाजा भी भुगता है, जब सुशील कुमार मोदी को दरकिनार कर किसी अन्य को उपमुख्यमंत्री बनाया गया।

नीतीश की जातीय राजनीति का खेल

नीतीश कुमार ने लालू-राबड़ी की विदाई गैर यादव पिछड़ी जातियों को गोलबंद कर सुनिश्चित की थी। उन्होंने अतिपिछड़ा और महादलित का फार्मूला अपनाया। नीतीश की जाति कुर्मी तो महज 2.87 प्रतिशत है, लेकिन कुर्मी-कोइरी-धानुक के संयुक्त समूह का प्रभाव बड़ा हो जाता है। सम्राट चौधरी का नाम इनके संघर्ष के आलोक में ही प्रमुखता से उभरता है।

सम्राट चौधरी की तैयारी

सम्राट चौधरी को बिहार के भविष्य के मुख्यमंत्री के रूप में तैयार किया जा रहा है। गृह मंत्रालय का विभाग भी उनके लिए महत्वपूर्ण है और उन्होंने इस पर पकड़ बना ली है। हाल ही में उनकी स्थिति और मजबूत हुई है, विशेषकर जब नीतीश कुमार उनके पिता शकुनी चौधरी के जन्मदिन समारोह में गए थे। उन्होंने सम्राट की तारीफ की और उम्मीद जताई कि वह सही मायनों में बिहार का नाम रोशन करेंगे।

जेडीयू और भाजपा के बीच की गतिशीलता

जब बात जेडीयू को गृह विभाग वापस देने की आई, तो भाजपा ने स्पष्ट किया कि यह संभव नहीं है। भाजपा की नीति बिहार में कानून एवं व्यवस्था का नियंत्रण बनाए रखने की है। इसी बीच, उपमुख्यमंत्री के लिए विजय कुमार चौधरी का नाम भी चर्चा में है। ऐसे में यह देखना होगा कि किस दिशा में यह राजनीतिक खेल आगे बढ़ता है।

सम्राट चौधरी की बढ़ती ताकत

सम्राट चौधरी की स्थिति बिहार की राजनीति में काफी मजबूत हो चुकी है। हालांकि, भाजपा कब किसको आगे कर देगी, यह अनुमान लगाना मुश्किल है। सम्राट की लोकप्रियता और नीतीश कुमार का समर्थन उन्हें बेशक पहले स्थान पर लाने में मदद कर रहा है, लेकिन आगामी संसदीय चुनावों में बदलाव संभव है।

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