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February 9, 2026

बीजेपी चांद पर भी अपना मेयर बिठा सकती, उद्धव की शिवसेना का तगड़ा हमला

The CSR Journal Magazine

सत्ता के लिए हिंदुत्व से समझौता?

उद्धव ठाकरे वाली शिवसेना के मुखपत्र सामना ने हाल ही में महाराष्ट्र में मेयर चुनावों को लेकर बीजेपी और शिंदे गुट पर जोरदार हमला किया है। संपादकीय में बीजेपी पर सवाल उठाए गए हैं कि वह सत्ता, धन और पुलिस के बल पर महापौर बनाने की रणनीति पर चल रही है। साथ ही, दलबदल, खजाने की कमी और गिरती राजनीतिक संस्कृति को लेकर चिंता जताई गई है। महाराष्ट्र में कई जगहों पर महापौर का चुनाव संपन्न हो चुका है, जबकि मुंबई में बीजेपी ने रितु तावड़े को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। चुनाव के नाम की घोषणा होते ही शिवसेना ने बीजेपी पर जुबानी हमलावर होने का सिलसिला शुरू कर दिया।

क्या बीजेपी चांद पर भी अपना महापौर बिठा सकती है?

सामना में कहा गया है कि बीजेपी इस बार महाराष्ट्र में 10 जगहों पर महापौर बनाने की योजना बना रही है। संपादकीय में कहा गया कि अगर उसके पास सत्ता, धन और पुलिस है, तो राज्य के किसी भी शहर का क्या? बीजेपी चांद और मंगल पर भी महापौर बिठा सकती है। इसके बाद वो ढोल पीट सकती है कि हमने चांद और मंगल पर हिंदू-मराठी महापौर बिठाए हैं।

मराठी चेहरे का चुनाव, बीजेपी की मजबूरी

बीजेपी की महाराष्ट्र में रितु तावड़े को महापौर चुनने की रणनीति को सामना ने उनके लिए एक स्वीकार्यता करार दिया है। संपादकीय में कहा गया कि बीजेपी को ये मानना पड़ा कि मुंबई का मराठी हिंदू ही असली चेहरा है। शिवसेना ने इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरने की कोशिश की है। ये ऐलान करते हुए बीजेपी को मजबूरन महापौर पद के लिए एक मराठी चेहरे को चुनना पड़ा है।

महापौर का विवादित बयान

सामना में यह भी लिखा गया कि महापौर की शपथ लेने से पहले ही उनका विवादित बयान सामने आया कि वे बांग्लादेशियों को मुंबई से बाहर निकालेंगी। सामना ने दलबदल पर भी कठोर नजर डाली है। संपादकीय में लिखा गया कि कल्याण-डोंबिवली में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने शिंदे गुट के साथ मिलकर चुनाव लड़ा, लेकिन अपने चुनावी वादे को तोड़ दिया। शिवसेना द्वारा उठाए गए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, राजनीति में जो दलबदल हो रहा है, उसे लेकर चिंता व्यक्त की गई है।

खजाने की गंभीर स्थिति

सामना ने महाराष्ट्र की माली हालत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। संपादकीय में कहा गया कि बीजेपी के लोग चुनावों में बेहिसाब पैसा खर्च कर रहे हैं, जबकि राज्य की आर्थिक स्थिति खराब है। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अधिकारियों से खर्च कम करने के लिए कहा है। यहां सवाल ये है कि जब सरकार के पास पैसा नहीं है, तो बीजेपी छोटे-छोटे चुनावों में लाखों रुपये क्यों खर्च कर रही है?

राजनीति की संस्कृति का विघटन

सामना में अजित पवार के निधन के बाद की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी तीखा हमला किया गया है। लिखा गया है कि पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र की राजनीति की संस्कृति गिरती जा रही है।
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