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February 15, 2026

RTI पर बड़ा खतरा? Supreme Court में आज ऐसा फैसला, जो बदल सकता है हर नागरिक का सूचना अधिकार

The CSR Journal Magazine
आज सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है, जिसमें सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम में हुए संशोधनों के खिलाफ याचिका पर चर्चा होगी। यह याचिका डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDPA) को चुनौती देती है, जिसमें कहा गया है कि नए संशोधन से सार्वजनिक अधिकारियों को सूचना देने से रोकने का अधिकार मिल गया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि धारा 44(3) ने धारा 8(1)(जे) में ऐसे बदलाव किए हैं, जो निजी जानकारी के आधार पर सूचनाओं के खुलासे को दरकिनार करते हैं। यह कदम पहले से मौजूद गोपनीयता और पारदर्शिता के संतुलन को बिगाड़ रहा है।

याचिका का विवरण

याचिका का नेतृत्व मानवाधिकार और पारदर्शिता कार्यकर्ता वेंकटेश नायक कर रहे हैं, जिन्हें अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर का सहयोग मिला है। इनमें कहा गया है कि संशोधन के तहत सूचना देने से इनकार का अधिकार सार्वजनिक अधिकारियों को दिया गया है, जो नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में यह साफ कहा गया है कि यह संशोधन संविधान के अनुच्छेद 19 का उल्लंघन कर रहा है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार की सुरक्षा करता है।

निजता बनाम जनहित

याचिका में तर्क किया गया है कि यदि जनहित में जानकारी साझा करना आवश्यक है, तो अधिकारियों को इसे प्रदान करना होगा। लेकिन नए संशोधन के तहत, अधिकारियों को निजी जानकारी देने से इनकार करने का अनियंत्रित अधिकार मिल गया है। यह स्थिति लोगों के अधिकारों को कमजोर कर रही है और सरकारी कार्यों की पारदर्शिता को चुनौती दे रही है।

राज्य को मिली अनियंत्रित शक्ति

वृंदा ग्रोवर द्वारा दायर याचिका में यह स्पष्ट किया गया है कि नए कानून के तहत राज्य को ऐसी शक्ति मिल गई है, जिससे वह सूचना के अधिकार के तहत बहुत सी जानकारियों को छिपा सकता है। यह स्थिति आम नागरिकों की निजता को एक समान स्तर पर मानते हुए अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करती है। नागरिकों की जानकारी देने में विफलता, पारदर्शिता के अधिकार को भी प्रभावित करती है।

कल की सुनवाई में क्या उम्मीदें?

सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत शामिल हैं, याचिका पर सुनवाई करने जा रही है। इस मामले पर सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या संशोधित कानून नागरिकों के अधिकारों को ध्यान में रखता है या नहीं। DPDPA के प्रावधान और RTI अधिनियम के बीच का संबंध अदालत के सामने महत्वपूर्ण चर्चा का विषय होगा।

सूचना के अधिकार का नया दुष्प्रभाव

याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधन के कारण RTI अधिनियम का उपयोग अब भ्रामक हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब इस धारा को DPDPA के तहत ‘व्यक्तिगत डेटा’ की परिभाषा के अनुसार पढ़ा जाएगा, तो यह सभी प्रकार की सूचनाओं को अपने दायरे में लाएगा। यह स्थिति RTI के अधिकार को कमजोर कर सकती है और नागरिकों की सवाल उठाने की शक्ति को बाधित कर सकती है।
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