Success Story: कभी रोजी-रोटी का संकट, आज अपना कारोबार; जीविका से जुड़कर रीना देवी ने बदली परिवार की तस्वीर

The CSR Journal Magazine
बिहार में शराबबंदी का असर छपरा में भी साफ देखा गया। यह बंदी कई परिवारों के लिए जीवन यापन का संकट बन गई। पहले शराब के कारोबार से कई घरों का भरण-पोषण होता था, लेकिन अचानक यह कारोबार बंद हो गया। इसके चलते कई परिवारों में भुखमरी का आलम छा गया। ऐसे में पुरुष और महिलाएं मजदूरी करने पर मजबूर हो गए। लेकिन बिहार में फैक्ट्री या कारखाने न होने के कारण लोगों को रोजाना काम नहीं मिल पा रहा था। इस स्थिति में कई दिन और रात खाली पेट सोना पड़ता था।

जीविका से मिली नई राह

गड़खा प्रखंड की निवासी रीना देवी के परिवार के लोग भी पहले शराब बेचने का काम करते थे। अचानक शराबबंदी के बाद उनके घर में भुखमरी का सामना करना पड़ा। मजबूरन उन्हें खेतों में और दूसरों के घरों में मजदूरी करनी पड़ी, लेकिन रोजाना काम न मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया। उस समय रीना देवी ने जीविका से जुड़कर काम करना शुरू किया। जीविका ने उन्हें जीने का सहारा दिया।

मजदूरी से होटल की ओर

लोकल 18 से बात करते हुए रीना देवी ने बताया, “मेरा दारू का कारोबार था। शराबबंदी के बाद यह बंद हो गया और हमें मजदूरी करनी पड़ी। लेकिन मजदूरी से घर का राशन भी नहीं मिल पा रहा था। कई बार तो बच्चों के साथ खाली पेट सोना पड़ता था।” रीना देवी की स्थिति को देखकर जीविका के अधिकारियों ने उन्हें पहले 10,000 रुपये का लोन दिया। इस पैसे से उन्होंने ठेले पर एक होटल खोला। होटल में छोला, समोसा, पकौड़ी जैसे कई प्रकार के खाद्य पदार्थ बेचने लगीं। अब उनका घर चलाने का एक नया साधन बन गया।

जनरल स्टोर का सपना

इस बिजनेस से कुछ पैसे बचाकर रीना देवी ने फिर से जीविका के माध्यम से लोन लिया। इस लोन से उन्होंने एक जनरल स्टोर खोला। अब उनका परिवार अच्छे से चल रहा है। रीना देवी कहती हैं, “अगर सरकार से और मदद मिले तो मैं अपने कारोबार को और बढ़ा सकती हूं। इससे मेरे परिवार का भविष्य भी बेहतर होगा।” शराब के कारोबार में उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता था। पुलिस अक्सर उन्हें पकड़ लेती थी और थाना-कचहरी के चक्कर लगाने पड़ते थे।

नए जीवन की शुरुआत

रीना देवी ने बताया कि शराब के कारोबार से कई गुना बेहतर उनका होटल और जनरल स्टोर का कारोबार है। इस नए व्यवसाय ने उन्हें मान-सम्मान के साथ जीने का मौका दिया है। अब वह अपने बच्चों के भविष्य के लिए भी सोच रही हैं। उनका सपना है कि वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला सकें।

समाज में बदलाव की एक मिसाल

रीना देवी की कहानी न केवल उनके परिवार के लिए, बल्कि समाज के लिए भी एक प्रेरणा है। उन्होंने यह साबित कर दिया है कि कठिनाइयों का सामना करके भी एक नया रास्ता निकाला जा सकता है। जीविका जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें जो सहायता मिली, उसने उनके जीवन में बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अब रीना देवी अपने परिवार के साथ एक नई जिंदगी जी रही हैं, जिसमें संघर्ष के बाद भी सफलता की कहानी छिपी हुई है।

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