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February 6, 2026

RBI Policy 2026: EMI पर फिलहाल राहत नहीं, रेपो रेट 5.25% पर स्थिर

The CSR Journal Magazine

एमपीसी की पहली बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने आम लोगों को फिलहाल EMI के मोर्चे पर कोई राहत नहीं दी है। आरबीआई ने इस साल 2026 की पहली Monetary Policy Meeting में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखने का फैसला किया है। MPC की यह बैठक 4 फरवरी को शुरू हुई थी, जो आज 6 फरवरी को समाप्त हुई। आरबीआई के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI में कोई तत्काल कटौती नहीं होने वाली है। इससे पहले दिसंबर 2025 में हुई MPC बैठक में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी, जिसके बाद यह 5.25 प्रतिशत पर आ गया था।

बाजार की उम्मीदों के मुताबिक फैसला

रेपो रेट को लेकर बाजार पहले से ही सतर्क था। ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना था कि महंगाई और ग्रोथ के मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। आरबीआई का फोकस इस बार भी Inflation Control, आर्थिक स्थिरता और वैश्विक हालात पर बना हुआ दिखा।

लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर जोर

आरबीआई ने संकेत दिए हैं कि वह ब्याज दरों में बदलाव के बजाय Liquidity Management के जरिए बाजार को सपोर्ट करता रहेगा। इसके लिए ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO), VRR और अन्य मौद्रिक उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि फाइनेंशियल सिस्टम में नकदी बनी रहे।

आम लोगों पर क्या असर?

रेपो रेट स्थिर रहने का मतलब है कि बैंकों की ओर से लोन की ब्याज दरों में तुरंत कटौती की उम्मीद कम है। हालांकि, महंगाई काबू में रहने और ग्रोथ स्थिर होने पर आने वाले महीनों में दरों को लेकर आरबीआई के रुख में बदलाव संभव है। कुल मिलाकर, आरबीआई की यह नीति न्यूट्रल स्टांस को दिखाती है, जिसमें स्थिरता को प्राथमिकता दी गई है और जल्दबाजी से बचा गया है।

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